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गठबंधन टूटने की सूचना से कांग्रेसियों में खुशी
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Fri, 20 Jan 2017 11:36 PM IST
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कांग्रेसियों ने एक स्वर में कहा गठबंधन टूटने से पार्टी को फायदा ही होगा
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सपा के साथ गठबंधन टूटने की सूचनाएं मिलते ही कानपुर के कांग्रेसियों में खुशी की लहर दिखी। कांग्रेसियों ने एक स्वर में कहा कि गठबंधन टूटने से पार्टी को फायदा ही होगा। अब प्रदेश की सभी 403 विधानसभाओं में कांग्रेस पार्टी का प्रतिनिधित्व होगा। इसका फायदा 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी को मिलेगा।
कानपुर के कई कांग्रेस पदाधिकारियों ने आलाकमान को पत्र लिखकर गठबंधन न करने की अपील की थी।
इस संबंध में युवा कांग्रेसी कृपेश त्रिपाठी ने कहा कि समर्पित कार्यकर्ताओं में इस खबर से ही उत्साह की लहर है। लंबे समय से चुनाव की तैयारी कर रहे कार्यकर्ताओं को अब मौका मिलने की उम्मीद बंधी है। आलाकमान को गठबंधन पर अपनी भावनाओं से अवगत कराया गया था। कांग्रेस के शहर महासचिव विपिन गुप्ता ने कहा कि गठबंधन के पूर्वानुमान से ही कार्यकर्ता निराश थे। चुनाव की तैयारियों में जुटे कांग्रेसी दावेदार गठबंधन में मौका न मिलने पर अन्य दलों की ओर रुख करने लगे थे। अब स्थितियां सुधरेगी।
सांगा के टिकट पर निगाह
कांग्रेसियों की निगाहें अब अभिजीत सांगा के टिकट पर टिक गई हैं। गठबंधन में बिठूर सीट से मौका न मिल पाने की आशंका में कांग्रेस के जिलाध्यक्ष रहे सांगा बीते दिनों भाजपा में शामिल हो गए हैं। कई कांग्रेसी अब कह रहे हैं कि यदि सांगा को टिकट न मिला तो उन्हें पार्टी छोड़ने का मलाल रहेगा।
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सहारों की तलाश में बेसहारा कांग्रेसी
टिकट के चक्कर में दिल्ली में डेरा डाले शहर के कांग्रेसी दावेदारों की उलझनें खत्म होने का नाम नहीं ले रहीं। पार्टी के जिन नेताओं के सहारे टिकट की नैया पार लगवाने दावेदार पहुंचे थे, वे ही ढूंढे नहीं मिल रहे हैं। मायूस कांग्रेसी कार्यालयों से लेकर बंगलों तक की दौड़ लगा रहे हैं। फिलहाल नतीजा सिफर ही है। सपा के साथ गठबंधन टूटने की खबरों के बाद कांग्रेसियों ने कोशिशें और तेज कर दीं।
कांग्रेस प्रत्याशियों की घोषणा से पहले टिकट के दावेदार अपना नाम फाइनल करवाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं। टिकट के जुगाड़ में अंतिम कोशिश क रने शुक्रवार को भी बड़ी संख्या में शहर से कांग्रेसी दिल्ली रवाना हुए। कई ने पहले से ही दिल्ली में डेरा डाल रखा है। दावेदार दूसरे दावेदारों का कच्चा चिट्ठा लेकर भी गए हैं, ताकि दूसरे की दावेदारी हल्की साबित की जा सके। प्रत्याशियों की सूची जारी होने से पहले कोई दावेदार मौका नहीं चूकना चाहता। हालांकि इसमें सबसे बड़ी बाधा यही आ रही है कि वह अपनी बात कहें किससे। पार्टी के जिम्मेदार नेता या तो मिल नहीं रहे हैं, जो मिल भी रहे हैं वह टिकटों की बात नहीं कर रहे। पार्टी सूत्रों के मुताबिक शहर में सबसे ज्यादा मारामारी गोविंद नगर, आर्य नगर और कैंट विधानसभा के लिए है। यहां से चार से पांच-पांच नाम भेजे गए हैं। इसके चलते हर दावेदार अपनी गोट फिट करने में लगा है।
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कानपुर के कई कांग्रेस पदाधिकारियों ने आलाकमान को पत्र लिखकर गठबंधन न करने की अपील की थी।
इस संबंध में युवा कांग्रेसी कृपेश त्रिपाठी ने कहा कि समर्पित कार्यकर्ताओं में इस खबर से ही उत्साह की लहर है। लंबे समय से चुनाव की तैयारी कर रहे कार्यकर्ताओं को अब मौका मिलने की उम्मीद बंधी है। आलाकमान को गठबंधन पर अपनी भावनाओं से अवगत कराया गया था। कांग्रेस के शहर महासचिव विपिन गुप्ता ने कहा कि गठबंधन के पूर्वानुमान से ही कार्यकर्ता निराश थे। चुनाव की तैयारियों में जुटे कांग्रेसी दावेदार गठबंधन में मौका न मिलने पर अन्य दलों की ओर रुख करने लगे थे। अब स्थितियां सुधरेगी।
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सांगा के टिकट पर निगाह
कांग्रेसियों की निगाहें अब अभिजीत सांगा के टिकट पर टिक गई हैं। गठबंधन में बिठूर सीट से मौका न मिल पाने की आशंका में कांग्रेस के जिलाध्यक्ष रहे सांगा बीते दिनों भाजपा में शामिल हो गए हैं। कई कांग्रेसी अब कह रहे हैं कि यदि सांगा को टिकट न मिला तो उन्हें पार्टी छोड़ने का मलाल रहेगा।
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सहारों की तलाश में बेसहारा कांग्रेसी
टिकट के चक्कर में दिल्ली में डेरा डाले शहर के कांग्रेसी दावेदारों की उलझनें खत्म होने का नाम नहीं ले रहीं। पार्टी के जिन नेताओं के सहारे टिकट की नैया पार लगवाने दावेदार पहुंचे थे, वे ही ढूंढे नहीं मिल रहे हैं। मायूस कांग्रेसी कार्यालयों से लेकर बंगलों तक की दौड़ लगा रहे हैं। फिलहाल नतीजा सिफर ही है। सपा के साथ गठबंधन टूटने की खबरों के बाद कांग्रेसियों ने कोशिशें और तेज कर दीं।
कांग्रेस प्रत्याशियों की घोषणा से पहले टिकट के दावेदार अपना नाम फाइनल करवाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं। टिकट के जुगाड़ में अंतिम कोशिश क रने शुक्रवार को भी बड़ी संख्या में शहर से कांग्रेसी दिल्ली रवाना हुए। कई ने पहले से ही दिल्ली में डेरा डाल रखा है। दावेदार दूसरे दावेदारों का कच्चा चिट्ठा लेकर भी गए हैं, ताकि दूसरे की दावेदारी हल्की साबित की जा सके। प्रत्याशियों की सूची जारी होने से पहले कोई दावेदार मौका नहीं चूकना चाहता। हालांकि इसमें सबसे बड़ी बाधा यही आ रही है कि वह अपनी बात कहें किससे। पार्टी के जिम्मेदार नेता या तो मिल नहीं रहे हैं, जो मिल भी रहे हैं वह टिकटों की बात नहीं कर रहे। पार्टी सूत्रों के मुताबिक शहर में सबसे ज्यादा मारामारी गोविंद नगर, आर्य नगर और कैंट विधानसभा के लिए है। यहां से चार से पांच-पांच नाम भेजे गए हैं। इसके चलते हर दावेदार अपनी गोट फिट करने में लगा है।