तेज गेंदबाज थे कुलदीप यादव, एेसे बन गए टीम इंडिया के शानदार चाइनामैन
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धर्मशाला में भारत और आस्ट्रेलिया के बीच चल रहे आखिरी और निर्णायक मैच में तीसरे दिन का खेल खत्म होने तक भारतीय टीम जीत से महज 87 रन दूर रह गई है। टीम के इस शानदार प्रदर्शन में अहम योगदान यूपी के कानपुर जिले के कुलदीप यादव का भी रहा है। मैच की पहली पारी में कुलदीप ने अपनी फिरकी के जाल में तमाम दिग्गज आस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों को छकाया और चार विकेट झटके।
कुलदीप की सफलता में उनके कोच कपिल पांडेय का विशेष योगदान रहा है. ये वही शख्स हैं, जिन्होंने वसीम अकरम की तरह तेज गेंदबाजी करने की चाहत रखने वाले खिलाड़ी को चाइनामैन बना दिया।
2004 में पिता के साथ मैदान पहुंचे थे कुलदीप
कानपुर के चकेरी में स्थित क्रिकेट ग्राउंड में बच्चों को प्रैक्टिस करा रहे कुलदीप के कोच कपिल देव पांडेय बताते हैं कि 2004-05 में कुलदीप अपने पिता के साथ यहां आया था। उस दाैरान कुलदीप मीडियम पेस गेंदबाज थे।
अादर्श थे वसीम अकरम
कुलदीप के आदर्श वसीम अकरम थे। कपिल बताते हैं कि जब उसने गेंदबाजी करनी शुरू की ताे मुझे लगा की वह स्पिन गेंदबाजी अच्छी कर सकता है।इसके बाद उन्होंने कुलदीप को स्पिन गेंदबाजी करने की सलाह दी। कुलदीप ने जब स्पिनर के रूप में पहली गेंद डाली तो वह चाइनामैन थी।
एेसे बन गया चाइनामैन
इसके बाद से कुलदीप अपने काेच की बात मानकर स्पिन गेंदबाजी करने लगे। कपिल बताते हैं कि कुलदीप में चाइनामैन यानी लेफ्ट आर्म लेग ब्रेक फेंकने की स्वाभाविक कला है।
एेसे हाेती गई तरक्की
कुलदीप ने अंडर-16, अंडर-19 बोर्ड की सभी प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया और 40 से 50 विकेट निकाले। अंडर-19 विश्वकप में कुलदीप ने हैट्रिक मारी। वह विश्व का अकेला अंडर-19 खिलाड़ी बना, जिसने हैट्रिक ली है। इसके बाद उसने रणजी खेली। फिर कुलदीप को वेस्टइंडीज के खिलाफ 2014 में वन-डे सीरीज के लिए भारतीय टीम में शामिल किया गया, लेकिन उन्हें खेलने का मौका नहीं मिला था।
फिर मिला माैका
कुलदीप काे बांग्लादेश के खिलाफ टेस्ट से पहले चोटिल अमित मिश्रा की जगह टीम में शामिल किया गया था। उन्होंने कहा कि अब तक उन्हें ये तो विश्वास हो गया था कि एक न एक दिन कुलदीप टीम इंडिया की तरफ से गेंदबाजी करता नजर आएगा। आखिरकार आस्ट्रेलिया के खिलाफ चौथे टेस्ट में उसे मौका मिल ही गया और पहले मौके में उसने वह कर दिखाया जिसकी उससे अपेक्षा थी।