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Chitrakoot: मुठभेड़ में सिपाही की हत्या में एक को उम्रकैद, 12 को तीन-तीन साल की सजा
Sat, 30 Aug 2025 11:55 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चित्रकूट
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चित्रकूट
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sat, 30 Aug 2025 11:55 PM IST
सार
डाकू नान केवट व अन्य सहयोगियों ने मिलकर सिपाही अभयराज की हत्या की थी। सजा पाने वालों में आठ महिलाएं भी शामिल।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : ANI
विस्तार
पुलिस मुठभेड़ में सिपाही की हत्या करने के मामले में विशेष न्यायालय एंटी डकैती कोर्ट अपर सत्र न्यायाधीश द्वितीय नीरज कुमार श्रीवास्तव ने मुख्य अभियुक्त को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। 12 अन्य दोषियों को तीन-तीन साल की सजा दी है। सभी पर कुल दो लाख 14 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। इस मामले में डाकू नान केवट समेत 16 नामजद थे। डाकू नान व नामजद बैजनाथ की मौत हो चुकी है। सजा पाने वालों में आठ महिलाएं भी शामिल हैं।
थाना प्रभारी राजापुर पंकज तिवारी ने बताया कि तत्कालीन थानाध्यक्ष प्रमोद कुमार पांडेय ने 23 मई 2008 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। बताया था कि सरधुवा थाना क्षेत्र के सुरवल निवासी पांच हजार के इनामी बदमाश नान उर्फ घनश्याम केवट के अपने रिश्तेदार गोपी केवट के यहां बनकट पुरवा में छिपे होने की सूचना मिली थी। इस पर थाना व एसओजी टीम को लेकर पकड़ने पहुंचे तो बदमाशों ने फायरिंग कर दी। इस दौरान एसओजी सिपाही अभयराज राय को गोली लग गई। उनकी मौके पर ही मौत हो गई। कई अन्य पुलिस कर्मी भी घायल हुए थे।
पुलिस ने बनकट पुरवा निवासी नान केवट के रिश्तेदार बिंदा केवट, जगन्नाथ केवट, शिवऔतार, रामबली, महाबली, रमेश केवट, बैजनाथ केवट, केवली देवी, कल्ली देवी, जयरानी देवी, उषा देवी, कैलाश देवी, सिन्नी देवी, कुमारी बच्ची, चिरौंजी देवी को पकड़ लिया था। इन पर हत्या, जान से मारने का प्रयास, क्रिमिनल लॉ एक्ट सहित कई धाराओं में मामला दर्ज किया गया था।
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मुकदमे की विवेचना थानाध्यक्ष रैपुरा चिरंजीव मोहन ने की थी। विवेचक ने आरोपियों को जेल भेजा था। नामजद बैजनाथ की विवेचना के दौरान मौत हो चुकी है, जबकि नान केवट पुलिस मुठभेड़ में मारा जा चुका है। आरोपियों के खिलाफ सात अगस्त 2008 को न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया गया था। इस मामले की शनिवार को सुनवाई पूरी हुई तो कोर्ट ने बिंदा केवट को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। उस पर 71 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। साथ ही 12 अन्य दोषियों को तीन-तीन वर्ष का कारावास और 11-11 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।
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थाना प्रभारी राजापुर पंकज तिवारी ने बताया कि तत्कालीन थानाध्यक्ष प्रमोद कुमार पांडेय ने 23 मई 2008 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। बताया था कि सरधुवा थाना क्षेत्र के सुरवल निवासी पांच हजार के इनामी बदमाश नान उर्फ घनश्याम केवट के अपने रिश्तेदार गोपी केवट के यहां बनकट पुरवा में छिपे होने की सूचना मिली थी। इस पर थाना व एसओजी टीम को लेकर पकड़ने पहुंचे तो बदमाशों ने फायरिंग कर दी। इस दौरान एसओजी सिपाही अभयराज राय को गोली लग गई। उनकी मौके पर ही मौत हो गई। कई अन्य पुलिस कर्मी भी घायल हुए थे।
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पुलिस ने बनकट पुरवा निवासी नान केवट के रिश्तेदार बिंदा केवट, जगन्नाथ केवट, शिवऔतार, रामबली, महाबली, रमेश केवट, बैजनाथ केवट, केवली देवी, कल्ली देवी, जयरानी देवी, उषा देवी, कैलाश देवी, सिन्नी देवी, कुमारी बच्ची, चिरौंजी देवी को पकड़ लिया था। इन पर हत्या, जान से मारने का प्रयास, क्रिमिनल लॉ एक्ट सहित कई धाराओं में मामला दर्ज किया गया था।
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मुकदमे की विवेचना थानाध्यक्ष रैपुरा चिरंजीव मोहन ने की थी। विवेचक ने आरोपियों को जेल भेजा था। नामजद बैजनाथ की विवेचना के दौरान मौत हो चुकी है, जबकि नान केवट पुलिस मुठभेड़ में मारा जा चुका है। आरोपियों के खिलाफ सात अगस्त 2008 को न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया गया था। इस मामले की शनिवार को सुनवाई पूरी हुई तो कोर्ट ने बिंदा केवट को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। उस पर 71 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। साथ ही 12 अन्य दोषियों को तीन-तीन वर्ष का कारावास और 11-11 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।