छेदीलाल की मौत की वजह बनी ‘लघुशंका’
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गजनेर थाना क्षेत्र के मनेथू गांव निवासी छेदीलाल (30) अपनी छत में सो रहा था। रात में लघु शंका के लिए उठा तो उसका पैर वहां पड़े तार से उलझ गया और छत से नीचे जा गिरा। वहां पास में ही सो रही उसकी मां रत्तो देवी की नींद खुली तो उसे लहूलुहान देख बिलखने लगी। रात में रोने बिलखने की आवाज सुन कर मोहल्ले के लोग एकत्र हो गए। उसे तत्काल पीएचसी सरवनखेड़ा ले गए। वहां डाक्टरों के न मिलने से उपचार नहीं हो सका। परिजन उसे जिला अस्पताल लिए जा रहे थे, रास्ते में उसने दम तोड़ दिया। घटना की जानकारी पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। एसओ रवींद्र तिवारी ने बताया कि चचेरे भाई महिपाल पासवान की सूचना पर इत्तफाकिया दर्ज कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है।
परिवार का मुख्य सहारा था
मनेथू गांव में छत से नीचे गिर कर मौत का शिकार छेदीलाल परिवार का कमाने वाला एकलौता सदस्य था। 13 वर्ष पूर्व पिता गोला की मौत के बाद गृहस्थी का बोझ आ गया। घर में अविवाहित बहन कोमल, मीरा व गोल्डी के अलावा गर्भवती पत्नी लक्ष्मी है। सोमवार को पत्नी लक्ष्मी को मायके सिमौर घाटमपुर में छोड़कर वापस आया था। घटना की सूचना पर पत्नी भी घर पहुंची। गांव के लोग उसकी मेहनत की चर्चा करते रहे।
समय से मिलता उपचार तो बच सकती थी जान
छेदीलाल की मौत के बाद उसके परिजनों को जिंदगी पर इस बात का मलाल रहेगा उसका समय से उपचार शुरू नहीं हो सका। परिजन घायल छेदीलाल को लेकर रात एक बजे पीएचसी सरवनखेड़ा पहुंचे। वहां करीब आधे घंटे तक दरवाजा पीटने के बाद किसी ने कोई जवाब नहीं दिया। मायूस परिजन उसे लेकर जिला अस्पताल ले जा रहे थे, तभी रास्ते में मौत हो गई। परिजनों ने कहा कि यदि समय से उपचार मिल जाता तो शायद उसकी जान बच जाती।