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GI Sugar: दुनिया में पहली बार बनाई गई है केमिकल फ्री लो जीआई शुगर, लिवर को फैटी होने और हार्ट अटैक से बचाएगी

Wed, 29 Nov 2023 09:10 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Wed, 29 Nov 2023 09:10 PM IST
सार

Kanpur News: लो जीआई शुगर की जरूरत पूरा विश्व महसूस कर रहा है। इसमें किसी तरह के केमिकल का इस्तेमाल नहीं किया गया। इसमें विटामिन ए के साथ मैग्नीशियम, आयरन, जिंक और आयोडीन को भी शामिल किया जा सकता है।

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Chemical free low GI sugar has been created for the first time in the world, it will protect From and heart at
लो जीआई शुगर सैम्पल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

फैटी लिवर, हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज महामारी की शक्ल अपना रहे हैं। इन मर्ज को नेशनल शुगर इंस्टीट्यूट (एनएसआई) की कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स (जीआई) वाली चीनी नियंत्रित करेगी। एनएसआई के निदेशक प्रोफेसर नरेंद्र मोहन ने मंगलवार को पत्रकारों को बताया कि दुनिया में पहली बार केमिकल फ्री लो जीआई चीनी की तकनीक से तैयार की गई है।

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इंस्टीट्यूट इसे पेटेंट कराएगा। इस चीनी को डायबिटीज रोगी खाएंगे, तो ब्लड शुगर लेवल पर अधिक फर्क नहीं आएगा। इसके साथ ही मोटापा नियंत्रण में भी यह काम आएगी। ये लिवर को फैटी होने से बचाएगा। शर्करा उद्योगों के समूह इसे बनाने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।
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एनएसआई की शुगर टेक्नोलॉजी विभाग की सीनियर रिसर्च फैलो अनुष्का कनौडिया ने यह शोध चार साल में पूरा किया। इसमें शुगर टेक्नोलॉजिस्ट श्रुति शुक्ला और स्वेच्छा सिंह ने सहयोग किया। उन्होंने बताया कि लो जीआई शुगर की जरूरत पूरा विश्व महसूस कर रहा है। इसमें किसी तरह के केमिकल का इस्तेमाल नहीं किया गया।

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एक साल बाद भी क्वालिटी में कोई कमी नहीं आई
इसमें विटामिन ए के साथ मैग्नीशियम, आयरन, जिंक और आयोडीन भी शामिल किया जा सकता है। इसे लिक्विड और दानों के रूप में तैयार किया गया। लो जीआई शुगर बनाकर इसे एक साल रखा गया, तो इसकी क्वालिटी में कोई कमी नहीं आई। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 के प्रावधानों के लिहाज से इसे भविष्य में और पौष्टिक बनाया जाएगा।

सामान्य चीनी की तुलना में 20 फीसदी तक महंगी होगी
निदेशक प्रोफेसर नरेंद्र मोहन ने बताया कि ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्राल नियंत्रित होने से लोग हार्ट अटैक से बचेंगे। लो जीआई शुगर की कीमत सामान्य चीनी तुलना में 20 फीसदी तक महंगी होगी। इसके अलावा लोग शुगर फ्री के इस्तेमाल से होने वाले नुकसान से महफूज रहेंगे। इस संबंध में विश्व स्वास्थ्य संगठन पहले ही एडवाइजरी जारी कर चुका है।

ग्लाइसेमिक इंडेक्स 55 से कम
लो जीआई शुगर का ग्लाइसेमिक इंडेक्स का मान 55 से कम रहेगा। सामान्य चीनी के ग्लाइसेमिक इंडेक्स का मान 70 या इससे ऊपर होता है और मध्य जीआई का मान 56 से 69 के बीच होता है। 55 से कम जीआई वाले खाद्य पदार्थ के सेवन से ब्लड शुगर लेवल का स्तर बहुत कम बढ़ता है।

ऐसे नियंत्रित रहेगा ब्लड शुगर लेवल
लो जीआई शुगर में स्टीविया, विटामिन और मोंक फ्रूट का घोल मिलाया जाता है। इससे मास्किंग ऑफ शुगर हो जाती है। इससे लो जीआई शुगर बहुत धीरे-धीरे हजम होती है। इसका असर ब्लड शुगर लेवल पर नहीं आता। सामान्य चीनी तुरंत हजम हो जाती है, जिससे ब्लड शुगर लेवल बढ़ जाता है। ब्लड शुगर नियंत्रित रहने से ये वसा में परिवर्तित नहीं होगी। इससे लिवर फैटी होने से बचा रहेगा।

वर्ष 2017 में यह ख्याल आया था कि अगर ग्लाइसेमिक इंडेक्स घटा दिया जाए, तो चीनी का असर ब्लड शुगर लेवल पर नहीं आएगा। एनएसआई में आने के बाद निदेशक प्रोफेसर नरेंद्र मोहन के निर्देशन में काम शुरू किया। शोध में अन्य लोग भी शामिल रहे। खुद चीनी खाकर ब्लड शुगर लेवल की जांच करते रहे। आखिरकार सफलता मिली।  -अनुष्का कनौडिया, सीनियर रिसर्च फैलो

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