{"_id":"595359a84f1c1b463c8b4c3c","slug":"chaubeypur-village-being-hitech-village-with-micro-smart-grid-of-solar-power","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"‘नदिया के पार’ वाली गुंजा के गांव पर मेहरबान भारत और अमेरिकी सरकार, बना रहे ‘हाईटेक विलेज’","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
‘नदिया के पार’ वाली गुंजा के गांव पर मेहरबान भारत और अमेरिकी सरकार, बना रहे ‘हाईटेक विलेज’
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Fri, 30 Jun 2017 07:41 AM IST
विज्ञापन
नदिया के पार फिल्म का एक सीन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
1982 में आई बॉलीवुड की सुपर-डुपर हिट फिल्म ‘नदिया के पार‘ वाली गुंजा के गांव की सूरत अब बदलने वाली है। फिल्म की सबसे दमदार कैरेक्टर गुंजा का गांव चौबेपुर अब हाईटेक विलेज बनने जा रहा है। सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए भारत और अमेरिका की सरकार ने मिलकर रिसर्च करने का प्लान बनाया है। इसमें दोनों देशों से टॉप 15-15 शिक्षण संस्थानों को शामिल किया गया है। भारत की तरफ से इस प्रोजेक्ट की अगुवाई करने की जिम्मेदारी आईआईटी कानपुर को मिली है जबकि यूएस में इस प्रोजेक्ट की अगुवाई वाशिंगटन स्टेट यूनिवर्सिटी करेगा। प्रोजेक्ट का नाम यूएस-इंडिया कोलाबेरेटिव फॉर स्मार्ट डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम विद स्टोरेज रखा गया है।
डेमो पिक
भारत की तरफ से प्रोजेक्ट को लीड कर रहे आईआईटी कानपुर के इलेक्ट्रीकल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के प्रो. सुरेश चंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि प्रोजेक्ट के तहत चौबेपुर ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले चेरी निवादा और नोनहा नरसिंह गांव में सोलर एनर्जी का माइक्रो स्मार्ट ग्रिड तैयार किया जाएगा। इस ग्रिड पर रिसर्च का काम सितंबर-अक्टूबर माह में शुरू हो जाएगा। इस पूरे प्रोजेक्ट पर सौ करोड़ रुपये यानी 30 यूएस मिलियन डॉलर का खर्च आएगा। इसमें लगभग 50 करोड़ रुपये दोनों देशों की ऊर्जा विभाग की तरफ से दिए जाएंगे जबकि बाकि 50 करोड़ दोनों देशों की सरकारें देंगी।
नंबर गेम :
05 साल तक चलेगा रिसर्च प्रोग्राम
100 करोड़ रुपये होंगे खर्च
30 शिक्षण संस्थान मिलकर करेंगे रिसर्च
नंबर गेम :
05 साल तक चलेगा रिसर्च प्रोग्राम
100 करोड़ रुपये होंगे खर्च
30 शिक्षण संस्थान मिलकर करेंगे रिसर्च
डेमो पिक
क्या है माइक्रो स्मार्ट ग्रिड
दरअसल जिस तरह से अभी तक विद्युत विभाग ने गांव-गांव, शहर-शहर में बिजली के लिए सबस्टेशन बना रखा है सरकार का प्लान है कि आने वाले दिनों में ऐसे ही सब स्टेशन या पॉवर ग्रिड सोलर एनर्जी और बायो मास के बनें। इससे सभी लोग नॉन रिन्युवल एनर्जी की बजाय सोलर एनर्जी का ज्यादा प्रयोग कर पाएंगे।
क्या होगा रिसर्च में
प्रोजेक्ट के प्रिंसिपल इंवेस्टीगेटर प्रो. श्रीवास्तव ने बताया कि रिसर्च के दौरान सोलर एनर्जी तैयार कर उसे घर-घर तक आसानी से वितरित किया जाएगा। इसमें यह देखा जाएगा कि एक ग्रिड से सोलर एनर्जी सप्लाई करने में कैसी दिक्कतें आती हैं और उसे किस तरह से दूर किया जा सकता है। इसके अलावा अन्य रिन्यूवल एनर्जी का प्रयोग करके भी बिजली बनाई जाएगी। सोलर एनर्जी को सेव करने की नई तकनीकों पर भी शोध होगा।
दरअसल जिस तरह से अभी तक विद्युत विभाग ने गांव-गांव, शहर-शहर में बिजली के लिए सबस्टेशन बना रखा है सरकार का प्लान है कि आने वाले दिनों में ऐसे ही सब स्टेशन या पॉवर ग्रिड सोलर एनर्जी और बायो मास के बनें। इससे सभी लोग नॉन रिन्युवल एनर्जी की बजाय सोलर एनर्जी का ज्यादा प्रयोग कर पाएंगे।
क्या होगा रिसर्च में
प्रोजेक्ट के प्रिंसिपल इंवेस्टीगेटर प्रो. श्रीवास्तव ने बताया कि रिसर्च के दौरान सोलर एनर्जी तैयार कर उसे घर-घर तक आसानी से वितरित किया जाएगा। इसमें यह देखा जाएगा कि एक ग्रिड से सोलर एनर्जी सप्लाई करने में कैसी दिक्कतें आती हैं और उसे किस तरह से दूर किया जा सकता है। इसके अलावा अन्य रिन्यूवल एनर्जी का प्रयोग करके भी बिजली बनाई जाएगी। सोलर एनर्जी को सेव करने की नई तकनीकों पर भी शोध होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
पीएम नरेंद्र मोदी
मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी योजना
सोलर एनर्जी को ज्यादा से ज्यादा बढ़ावा देने के लिए पीएम मोदी काफी प्रयासरत हैं। यह प्रोजेक्ट भी उन्हीं की महत्वाकांक्षी योजनाओं में शुमार है। प्रोजेक्ट पर चर्चा तो मनमोहन सरकार के दौरान ही शुरू हो गई थी लेकिन निर्णय मंगलवार को हुआ।
ग्रामीणों को मिलेगा फायदा
सोलर स्मार्ट ग्रिड लगने से ग्रामीणों को इसका काफी फायदा मिलेगा। घर-घर सोलर एनर्जी से चलने वाले लाइट, पंखे लगाए जाएंगे। इसे चलाने के लिए स्मार्ट ग्रिड से ही सोलर एनर्जी सप्लाई की जाएगी।
सोलर एनर्जी को ज्यादा से ज्यादा बढ़ावा देने के लिए पीएम मोदी काफी प्रयासरत हैं। यह प्रोजेक्ट भी उन्हीं की महत्वाकांक्षी योजनाओं में शुमार है। प्रोजेक्ट पर चर्चा तो मनमोहन सरकार के दौरान ही शुरू हो गई थी लेकिन निर्णय मंगलवार को हुआ।
ग्रामीणों को मिलेगा फायदा
सोलर स्मार्ट ग्रिड लगने से ग्रामीणों को इसका काफी फायदा मिलेगा। घर-घर सोलर एनर्जी से चलने वाले लाइट, पंखे लगाए जाएंगे। इसे चलाने के लिए स्मार्ट ग्रिड से ही सोलर एनर्जी सप्लाई की जाएगी।
विज्ञापन
डेमो पिक
भारत से ये संस्थान करेंगे रिसर्च
आईआईटी कानपुर, आईआईटी दिल्ली, आईआईटी मद्रास, आईआईटी रुड़की, आईआईटी भुवनेश्वर, उर्जा एवं संसाधन संस्थान, बीएसईएस राजधानी पावर लिमिटेड, उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड, एनटीपीसी एनर्जी टेक्नोलॉजी रिसर्च एलाइन्स, पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, कस्टमाइज्ड एनर्जी सॉल्यूशन, जीई ग्लोबल रिसर्च बंगलूरू, सिनर्जी सिस्टम एंड सॉल्यूशन, माइंडटेक बंगलूरू, पैनासॉनिक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड गुड़गांव।
आईआईटी कानपुर को लीड करने की जिम्मेदारी
आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर और प्रोजेक्ट हेड इंडिया सुरेश चंद्र श्रीवास्तव बताते हैं कि सोलर एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए भारत और अमेरिका की सरकार मिलकर काम करेंगे। दोनों देशों से 30 शिक्षण संस्थानों का चयन इस प्रोजेक्ट के लिए किया गया है। इसे आईआईटी कानपुर को लीड करने की जिम्मेदारी दी गई है। हम सितंबर-अक्टूबर माह से प्रोजेक्ट पर काम करना शुरू कर देंगे।
आईआईटी कानपुर, आईआईटी दिल्ली, आईआईटी मद्रास, आईआईटी रुड़की, आईआईटी भुवनेश्वर, उर्जा एवं संसाधन संस्थान, बीएसईएस राजधानी पावर लिमिटेड, उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड, एनटीपीसी एनर्जी टेक्नोलॉजी रिसर्च एलाइन्स, पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, कस्टमाइज्ड एनर्जी सॉल्यूशन, जीई ग्लोबल रिसर्च बंगलूरू, सिनर्जी सिस्टम एंड सॉल्यूशन, माइंडटेक बंगलूरू, पैनासॉनिक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड गुड़गांव।
आईआईटी कानपुर को लीड करने की जिम्मेदारी
आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर और प्रोजेक्ट हेड इंडिया सुरेश चंद्र श्रीवास्तव बताते हैं कि सोलर एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए भारत और अमेरिका की सरकार मिलकर काम करेंगे। दोनों देशों से 30 शिक्षण संस्थानों का चयन इस प्रोजेक्ट के लिए किया गया है। इसे आईआईटी कानपुर को लीड करने की जिम्मेदारी दी गई है। हम सितंबर-अक्टूबर माह से प्रोजेक्ट पर काम करना शुरू कर देंगे।