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धर्मांतरण का मामला: इंडोनेशिया के कट्टरपंथी संगठन आईडीएफ और एफपीआई का भी हाथ, आदित्य ने किया खुलासा
Fri, 25 Jun 2021 05:43 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
सूरज शुक्ला, अमर उजाला, कानपुर
सूरज शुक्ला, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Fri, 25 Jun 2021 05:43 AM IST
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आदित्य से बना अब्दुल
- फोटो : amar ujala
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देश भर में हो रहे धर्मांतरण के पीछे आईडीसी (इस्लामिक दावाह सेंटर) के साथ इंडोनेशिया के प्रतिबंधित संगठन आईडीएफ (इस्लामिक डिफेंडर्स फ्रंट) का भी हाथ है। इसको एफपीआई (फ्रंट पेम्बेला इस्लाम) के नाम से भी जाना जाता है जिसका नेटवर्क केरल समेत पूरे दक्षिण भारत में है। एटीएस की पूछताछ में आदित्य उर्फ अब्दुल ने इसका खुलासा किया है। केरल में उसकी नौकरी लगवाने से लेकर रहने का इंतजाम इसी संगठन के लोग कराते हैं। एक साथ नमाज पढ़ते हैं और सभाएं कर इस्लाम के प्रति मोटीवेट करते हैं।
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लेबर की नौकरी दी, बर्तन धुलवाए
आदित्य ने पूछताछ में सांकेतिक भाषा में बताया कि केरल में जब वो पहुंचा तो वहां पर आईडीएफ से संबंधित लोग मिले। उन्होंने सात हजार रुपये प्रति महीने की सैलरी पर लेबर की नौकरी दिलाई। बाद में बर्तन धुलवाने का काम दिलाया। ढाई हजार रुपये पर किराये का कमरा दिलाया।
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जब धर्म परिवर्तन करने वाले एक साथ जुटते थे तो इसी संगठन के लोग उनको संबोधित करते थे। सांकेतिक भाषा एक्सपर्ट भी उसमें शामिल होते थे। ये बेहद चौंकाने वाले तथ्य एटीएस को आदित्य ने बताए हैं। मालूम हो कि आईडीएफ का अगस्त 1998 में इंडोनेशिया में गठन किया गया था। ये एक कट्टरपंथी संगठन है।
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30 जून 1999 में जनविरोधी मानते हुए इस संगठन को वहां प्रतिबंधित भी किया गया था। हिंसा के लिए प्रेरित करना और धर्म के प्रति कट्टरता पैदा करना मुख्य उद्देश्य है। इसका मुख्यालय जकार्ता में है। इसका फाउंडर मोहम्मद रिजिक शिहाब है। आखिरी बार दिसंबर 2020 में इस पर प्रतिबंध लगाया गया।
एक साथ मिलकर काम कर रहे ये संगठन
मोहम्मद उमर गौतम का आईडीसी संगठन धर्मांतरण के लिए काम कर रहा है। जैसे जैसे अब जांच आगे बढ़ रही है इसमें कई अन्य बड़े संगठनों का नाम सामने आ रहा है। इंडोनेशिया के प्रतिबंधित संगठन का नाम आने से जांच एजेंसियों हैरत में पड़ गई हैं। यही नहीं अब आशंका है ये भी है कि पीएफआई का भी इसमें कहीं न कहीं हाथ है। आशंका है कि ये सभी संगठन कहीं न कहीं आपस में जुड़े हैं और धर्मांतरण का काम कर रहे हैं। इसलिए सुरक्षा व जांच एजेंसियों ने आईडीएफ, एफपीआई और पीएफआई के बारे में जानकारियां जुटाना शुरू कर दी है।
क्या साबिर और शाहद इन्हीं संगठनों से हैं
आदित्य ने बताया था कि केरल निवासी साबिर और शाहद से वीडियो कॉल के जरिए उसकी बातचीत होती थी। यही दोनों उसको टेलीग्राम पर वीडियो भेजकर उसका माइंडवॉश करते थे। केरल में ये दोनों उनको मिले भी थे। ऐसे में सवाल है कि क्या ये दोनों इंडोनेशिया के प्रतिबंधित संगठन या पीएफआई से संबंधित हैं। इस पहलू पर जांच जारी है।
एक साथ मिलकर काम कर रहे ये संगठन
मोहम्मद उमर गौतम का आईडीसी संगठन धर्मांतरण के लिए काम कर रहा है। जैसे जैसे अब जांच आगे बढ़ रही है इसमें कई अन्य बड़े संगठनों का नाम सामने आ रहा है। इंडोनेशिया के प्रतिबंधित संगठन का नाम आने से जांच एजेंसियों हैरत में पड़ गई हैं। यही नहीं अब आशंका है ये भी है कि पीएफआई का भी इसमें कहीं न कहीं हाथ है। आशंका है कि ये सभी संगठन कहीं न कहीं आपस में जुड़े हैं और धर्मांतरण का काम कर रहे हैं। इसलिए सुरक्षा व जांच एजेंसियों ने आईडीएफ, एफपीआई और पीएफआई के बारे में जानकारियां जुटाना शुरू कर दी है।
क्या साबिर और शाहद इन्हीं संगठनों से हैं
आदित्य ने बताया था कि केरल निवासी साबिर और शाहद से वीडियो कॉल के जरिए उसकी बातचीत होती थी। यही दोनों उसको टेलीग्राम पर वीडियो भेजकर उसका माइंडवॉश करते थे। केरल में ये दोनों उनको मिले भी थे। ऐसे में सवाल है कि क्या ये दोनों इंडोनेशिया के प्रतिबंधित संगठन या पीएफआई से संबंधित हैं। इस पहलू पर जांच जारी है।