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चोरी की सीडीआर का इलेक्शन कनेक्शन

Thu, 14 Jul 2016 12:57 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Thu, 14 Jul 2016 12:57 AM IST
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CDR stolen election connection
up police - फोटो : demo pic
कानपुर। दिल्ली के राजनीतिकों की सीडीआर कानपुर से जा रही थी। इसका उपयोग चुनावी रणनीति बनाने में किया जा रहा था। अगले साल यूपी में होने वाले विधानसभा चुनावों में भी ये सीडीआर अहम भूमिका निभाने वाली थी।
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कानपुर सर्विलांस सेल से सीडीआर बेचने के खुलासे और सिपाही नरेंद्र चौधरी के पकड़े जाने के बाद अब तक की जांच में ये तथ्य सामने आए हैं। सिपाही नरेंद्र को नई दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच बीते रविवार को यहां से पकड़ ले गई थी।      इस बीच एसएसपी शलभ माथुर ने नरेंद्र को सस्पेंड कर विभागीय जांच एसपी पूर्वी को दे दी। सर्विलांस सेल से सीडीआर बेचने का धंधा 2013 में ही शुरू हो गया था। फरवरी 2013 में भाजपा नेता अरुण जेटली, नितिन गडकरी, विजय गोयल की सीडीआर बेचने का मामला सामने आया था। तब छह लोग गिरफ्तार किए गए थे। मामला संसद में भी उठा था। इसी के बाद सौदागरों ने दिल्ली छोड़ कानपुर का रुख कर लिया। उस समय नरेंद्र चौधरी यहां की क्राइम ब्रांच में था और सर्विलांस देखता था। तभी वह सौदागरों के संपर्क में आ गया था। बचा इसलिए रहा कि दिल्ली पुलिस ने अपना ध्यान दिल्ली पुलिस के लोगों पर केंद्रित कर रखा था। माना जा रहा है कि 2014 के संसदीय चुनाव में भी नेताओं की जासूसी के लिए सीडीआर कानपुर से ही गई थी। नरेंद्र भी तब से हिरासत में लिए जाने के दिन तक डीआईजी और एसएसपी की सर्विलांस सेल में ही तैनात रहा।
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नरेंद्र चौधरी की तैनाती एसएसपी के बजाय आईजी की सर्विलांस सेल में बताने पर आईजी ज़की अहमद ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर को पत्र भेजा है। आईजी के मुताबिक दिल्ली पुलिस की प्रेस रिलीज में आरोपी सिपाही को आईजी की सर्विलांस सेल में तैनात बताया गया, जो गलत है। दिल्ली पुलिस आसानी से पता कर सकती थी कि आरोपी सिपाही नरेंद्र कहां तैनात है, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। सर्विलांस व्यवस्था में होगा बदलाव ः आईजी ने बुधवार को जोन के सभी जिला पुलिस प्रमुखों को निर्देश दिए कि अधिकारियों की ईमेल आईडी के दुरुपयोग पर अधिकारी ही जिम्मेदार होंगे। आईजी के मुताबिक टेलीकॉम कंपनियों को दी गई अधिकारियों की मेल आईडी किस आईपी एड्रेस के कंप्यूटर से खोली गईं इसकी जांच होगी। सीडीआर लेने की व्यवस्था में कहां कमी है, इसकी जांच की जाएगी। पहले व्यवस्था थी कि जिस नंबर की सीडीआर निकलवाई जाती है उसकी इजाजत एसएसपी से एप्लीकेशन (हार्ड कापी) पर ली जाती थी। लेकिन कुछ साल पहले सर्विलांस सेल अधिकारियों की मेल आईडी से सीधे टेलीकॉम कंपनियों को मेल कर सीडीआर मंगाने लगी। नरेंद्र चौधरी ने इसी का फायदा उठाया। आईजी के मुताबिक अब फिर से पुरानी व्यवस्था को अमल में लाया जाएगा।
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