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बैंकों से धोखाधड़ी: 6833 करोड़ की डिफाल्टर कंपनी श्री लक्ष्मी कॉटसिन पर सीबीआई का छापा
Sat, 07 Aug 2021 11:17 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sat, 07 Aug 2021 11:17 PM IST
सार
सीबीआई ने चार अगस्त को श्री लक्ष्मी कॉटसिन के खिलाफ आईपीसी की धारा 120 बी, 406, 420, 468, 471, 477ए में मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। 6833 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का मामला सामने आने के बाद शनिवार सुबह सीबीआई ने ताबड़तोड़ छापेमारी की।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सीबीआई ने शनिवार को 16 बैंकों की करीब 6833 करोड़ रुपये की डिफाल्टर कंपनी श्री लक्ष्मी कॉटसिन के 14 ठिकानों पर एक साथ छापा मारा। कंपनी के मालिक एमपी अग्रवाल के निवास और कानपुर के कृष्णापुरम स्थित कंपनी के मुख्यालय के अलावा, आवास विकास, काकादेव, कल्याणपुर स्थित कार्यालय व कर्मचारियों के घरों, फतेहपुर (मलवां), नोएडा और रुड़की स्थित फैक्ट्रियों और कार्यालयों में सौ से ज्यादा अफसरों और कर्मचारियों ने छानबीन शुरू की।
देर रात तक टीमें कंपनी से जुड़े लोगों से पूछताछ करती रहीं। बड़े पैमाने पर कंपनी के दस्तावेज, करीब 20 कंप्यूटर और लैपटॉप, कंपनी से जुड़े मोबाइल फोन जब्त किए हैं। समाचार लिखे जाने तक अफसर सभी ठिकानों पर जांच कर रहे थे। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के डीजीएम राजीव खुराना ने एक जून 2021 को सीबीआई में शिकायत दर्ज कराई थी।
सीबीआई ने चार अगस्त को श्री लक्ष्मी कॉटसिन के खिलाफ आईपीसी की धारा 120 बी, 406, 420, 468, 471, 477ए में मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। 6833 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का मामला सामने आने के बाद शनिवार सुबह सीबीआई ने ताबड़तोड़ छापेमारी की।
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देर रात तक टीमें कंपनी से जुड़े लोगों से पूछताछ करती रहीं। बड़े पैमाने पर कंपनी के दस्तावेज, करीब 20 कंप्यूटर और लैपटॉप, कंपनी से जुड़े मोबाइल फोन जब्त किए हैं। समाचार लिखे जाने तक अफसर सभी ठिकानों पर जांच कर रहे थे। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के डीजीएम राजीव खुराना ने एक जून 2021 को सीबीआई में शिकायत दर्ज कराई थी।
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सीबीआई ने चार अगस्त को श्री लक्ष्मी कॉटसिन के खिलाफ आईपीसी की धारा 120 बी, 406, 420, 468, 471, 477ए में मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। 6833 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का मामला सामने आने के बाद शनिवार सुबह सीबीआई ने ताबड़तोड़ छापेमारी की।
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रोटोमैक ग्लोबल और फ्रस्ट इंटरनेशनल के बाद शहर की यह तीसरी कंपनी है, जिस पर बैंकों के डिफाल्टर होने के बाद सीबीआई ने कार्रवाई की है। डिफाल्ट होने वाली रकम के मामले में यह प्रदेश का सबसे बड़ा मामला है। सभी लोन दिल्ली स्थित बैंकों से लिए गए हैं।
सूत्रों ने बताया कि छापामारी सुबह आठ बजे शुरू हुई। कृष्णापुरम स्थित मुख्यालय में काम करने आए कर्मचारियों को वापस कर दिया गया। सिर्फ जरूरी अधिकारियों और कर्मचारियों को रोका गया। सभी के फोन जब्त कर लिए गए। इसके बाद सीबीआई अफसरों ने अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ शुरू की। कंपनी के कागजात, बैंक लॉकर व गोपनीय रिकार्ड आदि की जानकारी ली। बताया गया कि कंपनी के मालिक एमपी अग्रवाल अपनी पत्नी का इलाज कराने के संबंध में दिल्ली में हैं।
2650 करोड़ का लोन छह हजार करोड़ के पार हुआ
टेक्सटाइल और प्रतिरक्षा उत्पाद बनाने वाली कंपनी ने 2005 से 2013 तक अलग-अलग बैंकों से कारोबार विस्तार के लिए 2650 करोड़ का लोन लिया था। पेनाल्टी और ब्याज मिलाकर अब लोन की राशि छह हजार करोड़ से अधिक हो गई है।
सूत्रों ने बताया कि छापामारी सुबह आठ बजे शुरू हुई। कृष्णापुरम स्थित मुख्यालय में काम करने आए कर्मचारियों को वापस कर दिया गया। सिर्फ जरूरी अधिकारियों और कर्मचारियों को रोका गया। सभी के फोन जब्त कर लिए गए। इसके बाद सीबीआई अफसरों ने अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ शुरू की। कंपनी के कागजात, बैंक लॉकर व गोपनीय रिकार्ड आदि की जानकारी ली। बताया गया कि कंपनी के मालिक एमपी अग्रवाल अपनी पत्नी का इलाज कराने के संबंध में दिल्ली में हैं।
2650 करोड़ का लोन छह हजार करोड़ के पार हुआ
टेक्सटाइल और प्रतिरक्षा उत्पाद बनाने वाली कंपनी ने 2005 से 2013 तक अलग-अलग बैंकों से कारोबार विस्तार के लिए 2650 करोड़ का लोन लिया था। पेनाल्टी और ब्याज मिलाकर अब लोन की राशि छह हजार करोड़ से अधिक हो गई है।
कंपनी में 2019 तक उत्पादन होता था। जुलाई 2019 में कंपनी लिक्विडेशन में चली गई। इसके बाद बैंकों की रकम लौटाने के लिए कंपनी की ई-नीलामी की प्रक्रिया शुरू हुई थी। 31 मार्च 2021 को तीसरी बार नीलामी का नोटिस निकाला गया था।
इसमें नोएडा सेक्टर 57 स्थित कॉरपोरेट ऑफिस, अभयपुर यूनिट, मलवां स्थित डेनिम यूनिट, रेवाड़ी यूनिट, मलवां स्पिनिंग यूनिट को शामिल किया गया था। इन सभी कंपनियों की अनुमानित कीमत करीब 554 करोड़ लगाई गई थी। देश भर के 18 लोगों ने इसमें रुचि दिखाई थी।
इसमें नोएडा सेक्टर 57 स्थित कॉरपोरेट ऑफिस, अभयपुर यूनिट, मलवां स्थित डेनिम यूनिट, रेवाड़ी यूनिट, मलवां स्पिनिंग यूनिट को शामिल किया गया था। इन सभी कंपनियों की अनुमानित कीमत करीब 554 करोड़ लगाई गई थी। देश भर के 18 लोगों ने इसमें रुचि दिखाई थी।
वेलस्पन, ट्राईडेंट और सुमाया ने नहीं दिखाई थी दिलचस्पी
श्री लक्ष्मी कॉटसिन मिल को टेकओवर करने के लिए कपड़ा क्षेत्र की नामी कंपनियों ने शुरुआत में रुचि दिखाई थी, लेकिन कंपनी के कमजोर इंफ्रास्ट्रक्चर के चलते बात आगे नहीं बढ़ सकी थी। वेलस्पन ने सबसे पहले इसमें रुचि दिखाई थी। इस पर एनसीएलटी ने अक्तूबर 2020 तक का समय दिया था।
इसके बाद भी कंपनी ने प्रस्ताव नहीं दिया था। सूत्रों ने बताया कि वेलस्पन कंपनी के प्रतिनिधियों ने अभयपुर स्थित टॉवेल प्लांट और मलवां स्थित डेनिम प्लांट का निरीक्षण भी किया था। कंप्यूटारइज्ड प्लांट में बड़े पैमाने पर उपकरणों के चोरी होने का पता चला था।
इस वजह से वेलस्पन ने हाथ खींच लिए। इसके बाद लुधियाना की ट्राईडेंट और मुंबई की सुमाया अपेरल कंपनी ने भी इसे दिलचस्पी दिखाई। थी। इसके लिए एनसीएलटी ने चार जनवरी 2021 तक प्रस्ताव देने को कहा था लेकिन प्रस्ताव नहीं मिला। अब कंपनी पर सीबीआई ने छापेमारी की है।
श्री लक्ष्मी कॉटसिन मिल को टेकओवर करने के लिए कपड़ा क्षेत्र की नामी कंपनियों ने शुरुआत में रुचि दिखाई थी, लेकिन कंपनी के कमजोर इंफ्रास्ट्रक्चर के चलते बात आगे नहीं बढ़ सकी थी। वेलस्पन ने सबसे पहले इसमें रुचि दिखाई थी। इस पर एनसीएलटी ने अक्तूबर 2020 तक का समय दिया था।
इसके बाद भी कंपनी ने प्रस्ताव नहीं दिया था। सूत्रों ने बताया कि वेलस्पन कंपनी के प्रतिनिधियों ने अभयपुर स्थित टॉवेल प्लांट और मलवां स्थित डेनिम प्लांट का निरीक्षण भी किया था। कंप्यूटारइज्ड प्लांट में बड़े पैमाने पर उपकरणों के चोरी होने का पता चला था।
इस वजह से वेलस्पन ने हाथ खींच लिए। इसके बाद लुधियाना की ट्राईडेंट और मुंबई की सुमाया अपेरल कंपनी ने भी इसे दिलचस्पी दिखाई। थी। इसके लिए एनसीएलटी ने चार जनवरी 2021 तक प्रस्ताव देने को कहा था लेकिन प्रस्ताव नहीं मिला। अब कंपनी पर सीबीआई ने छापेमारी की है।
बंद मिलों के ताले खुलवाकर सीबीआई ने जुटाए सबूत
लक्ष्मी कॉटसिन ग्रुप की फतेहपुर में बंद पड़ीं चार मिलों की जांच पड़ताल करने शनिवार को सीबीआई की तीन टीमें पहुंचीं। सीबीआई ने मिलों के कार्यालय खुलवाए और जरूरी दस्तावेज, कंप्यूटर की हार्डडिस्क, कई पेन ड्राइव, कर्मचारियों का लेखाजोखा, रजिस्टर, कंपनी के एक्सपोर्ट इंपोर्ट कारोबार संबंधी कागजात जुटाए हैं।
लक्ष्मी कॉटसिन ग्रुुप की सौंरा, मलवां, रहसूपुर रेवाड़ी और अभयपुर में मिले हैं। ग्रुप की सबसे बड़ी इकाई सौंरा में थी, जो करीब पांच साल से बंद चल रही है। इसके बाद धीरे-धीरे दूसरी मिलों में भी ताले लग गए। मामला एनसीएलटी (नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल) में पहुंचा था।
इसके बाद प्रशासक के रूप में रोहित सहगल नियुक्त किए गए थे। उनकी नियुक्ति के बाद कॉटन मिल संचालन की उम्मीद जगी थी। इस उद्योग से जुड़ी कई बड़ी कंपनियां भी आई थीं, लेकिन हालातों को देखकर कंपनियों की जिम्मेदारी नहीं संभाली।
खबर है कि उन कंपनियों ने एनसीएलटी को सभी इकाइयों से कीमती मशीनें गायब होने की जानकारी दी। सीबीआई टीम सुबह 10 बजे सौंरा पहुंची। छिवली में शाम को चार बजे, रेवाड़ी और रहसूपुर औद्योगिक इकाइयों में दोपहर को छापा मारा गया। टीमों ने सिक्योरिटी गार्डों से पूछताछ की। छिवली स्थित मिल में टीम शाम तक डटी थी।
लक्ष्मी कॉटसिन ग्रुप की फतेहपुर में बंद पड़ीं चार मिलों की जांच पड़ताल करने शनिवार को सीबीआई की तीन टीमें पहुंचीं। सीबीआई ने मिलों के कार्यालय खुलवाए और जरूरी दस्तावेज, कंप्यूटर की हार्डडिस्क, कई पेन ड्राइव, कर्मचारियों का लेखाजोखा, रजिस्टर, कंपनी के एक्सपोर्ट इंपोर्ट कारोबार संबंधी कागजात जुटाए हैं।
लक्ष्मी कॉटसिन ग्रुुप की सौंरा, मलवां, रहसूपुर रेवाड़ी और अभयपुर में मिले हैं। ग्रुप की सबसे बड़ी इकाई सौंरा में थी, जो करीब पांच साल से बंद चल रही है। इसके बाद धीरे-धीरे दूसरी मिलों में भी ताले लग गए। मामला एनसीएलटी (नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल) में पहुंचा था।
इसके बाद प्रशासक के रूप में रोहित सहगल नियुक्त किए गए थे। उनकी नियुक्ति के बाद कॉटन मिल संचालन की उम्मीद जगी थी। इस उद्योग से जुड़ी कई बड़ी कंपनियां भी आई थीं, लेकिन हालातों को देखकर कंपनियों की जिम्मेदारी नहीं संभाली।
खबर है कि उन कंपनियों ने एनसीएलटी को सभी इकाइयों से कीमती मशीनें गायब होने की जानकारी दी। सीबीआई टीम सुबह 10 बजे सौंरा पहुंची। छिवली में शाम को चार बजे, रेवाड़ी और रहसूपुर औद्योगिक इकाइयों में दोपहर को छापा मारा गया। टीमों ने सिक्योरिटी गार्डों से पूछताछ की। छिवली स्थित मिल में टीम शाम तक डटी थी।