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सीबीआई रिश्वतखोरी कांड: सभी आरोपियों से तो नहीं ली रिश्वत, सीबीआई की नई टीम इसका पता लगा रही
Sun, 14 Mar 2021 10:52 AM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sun, 14 Mar 2021 10:52 AM IST
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हीरा कारोबारी उदय देसाई
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बैंक घोटाले के आरोपी हीरा कारोबारी उदय देसाई से सीबीआई अफसरों की घूसखोरी का मामला सामने आने के बाद सीबीआई की नई गठित टीम को आशंका है कि कहीं इस मामले के 69 अन्य आरोपियों से भी तो रिश्वत नहीं ली गई।
इसी आशंका के चलते सीबीआई की नई टीम नए सिरे से पूछताछ करने की तैयारी कर रही है। बीते दिनों इसी प्रकरण में शहर आई सीबीआई की नई टीम ने कई अन्य ठिकानों से महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए हैं। माना जा रहा है कि सीबीआई की पुरानी टीम ने इन दस्तावेजों की अनदेखी की।
उदय देसाई और उनके सहयोगियों को राहत देने के मकसद से कई महत्वपूूर्ण सबूत नहीं जुटाए जिससे मामला कोर्ट में स्टैंड न कर सके और जमानत लेने में भी आसानी हो। उदय देसाई ने इस मामले में राहत देने के लिए सीबीआई अफसरों 25 लाख रुपये रिश्वत देने की पेशकश की थी।
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इसमें से 10 लाख रुपये का भुगतान कर भी दिया गया था। यदि इतनी ही रकम मामले के अन्य आरोपियों से भी ली गई होगी तो यह रिश्वतखोरी कांड 15 से 20 करोड़ रुपये के आसपास ठहरता है। सीबीआई की नई टीम के सामने यह सवाल भी है कि कहीं पुरानी टीम ने कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज नष्ट तो नहीं कर दिए।
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इसी आशंका के चलते सीबीआई की नई टीम नए सिरे से पूछताछ करने की तैयारी कर रही है। बीते दिनों इसी प्रकरण में शहर आई सीबीआई की नई टीम ने कई अन्य ठिकानों से महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए हैं। माना जा रहा है कि सीबीआई की पुरानी टीम ने इन दस्तावेजों की अनदेखी की।
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उदय देसाई और उनके सहयोगियों को राहत देने के मकसद से कई महत्वपूूर्ण सबूत नहीं जुटाए जिससे मामला कोर्ट में स्टैंड न कर सके और जमानत लेने में भी आसानी हो। उदय देसाई ने इस मामले में राहत देने के लिए सीबीआई अफसरों 25 लाख रुपये रिश्वत देने की पेशकश की थी।
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इसमें से 10 लाख रुपये का भुगतान कर भी दिया गया था। यदि इतनी ही रकम मामले के अन्य आरोपियों से भी ली गई होगी तो यह रिश्वतखोरी कांड 15 से 20 करोड़ रुपये के आसपास ठहरता है। सीबीआई की नई टीम के सामने यह सवाल भी है कि कहीं पुरानी टीम ने कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज नष्ट तो नहीं कर दिए।
यहां भी रिश्वतखोरी की आ रही बू
उदय देसाई को कर्ज देने के लिए 14 बैंकों का समूह बना था। जून 2017 तक कई बैंकों में इनके लोन खाते एनपीए हो गए तो कुछ बैंकों का धैर्य टूट गया। वसूली के लिए उन्होंने कंसोर्टियम लीडर बैंक ऑफ इंडिया पर दबाव बनाया, लेकिन इस पर सहमति नहीं बनी।
आखिरकार कुछ बैंकों के दबाव में उदय देसाई के लोन खातों का फोरेंसिक ऑडिट कराया गया। इसके लिए सीए फर्म हरि भक्ति एंड कंपनी को जिम्मेदारी दी गई। इसमें शिकायत में शामिल की गईं तमाम गड़बड़ियां सामने आईं। बैंक ऑफ इंडिया को यह रिपोर्ट 28 जनवरी 2019 को हासिल हुई, लेकिन अन्य बैंकों से 15 मार्च 2019 को साझा की गई। यानी फोरेंसिक रिपोर्ट छिपाए जाने का पूरा खेल खेला जाना था।
कंसोर्टियम लीडर की मेहरबानी से बैंकों में पड़ी थी फूट
उदय देसाई को दिए गए ऋण की वसूली में कंसोर्टियम लीडर की अनदेखी से समूह के अन्य बैंकों में फूट पड़ गई थी। नतीजा ये हुआ कि बैंकों ने वसूली के लिए अलग-अलग राह अपनाई। सबसे पहले यूनियन बैंक के रीजनल मैनेजर सत्येंद्र कुमार सिंह ने 4 नवंबर 2019 को लखनऊ में सीबीआई में शिकायत दर्ज कराई।
इसमें यूनाइटेड बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक और ओरियंटल बैंक शामिल रहे। इन बैंकों के करीब 1250 करोड़ रुपये देसाई के लोन खातों में डूबे हैं। यूनियन बैंक की शिकायत पर सीबीआई की जांच शुरू होने के बाद बैंक ऑफ इंडिया ने भी केस दर्ज कराया। कंसोर्टियम लीडर यहां भी यहां पर देसाई पर मेहरबान रहे।
उदय देसाई को कर्ज देने के लिए 14 बैंकों का समूह बना था। जून 2017 तक कई बैंकों में इनके लोन खाते एनपीए हो गए तो कुछ बैंकों का धैर्य टूट गया। वसूली के लिए उन्होंने कंसोर्टियम लीडर बैंक ऑफ इंडिया पर दबाव बनाया, लेकिन इस पर सहमति नहीं बनी।
आखिरकार कुछ बैंकों के दबाव में उदय देसाई के लोन खातों का फोरेंसिक ऑडिट कराया गया। इसके लिए सीए फर्म हरि भक्ति एंड कंपनी को जिम्मेदारी दी गई। इसमें शिकायत में शामिल की गईं तमाम गड़बड़ियां सामने आईं। बैंक ऑफ इंडिया को यह रिपोर्ट 28 जनवरी 2019 को हासिल हुई, लेकिन अन्य बैंकों से 15 मार्च 2019 को साझा की गई। यानी फोरेंसिक रिपोर्ट छिपाए जाने का पूरा खेल खेला जाना था।
कंसोर्टियम लीडर की मेहरबानी से बैंकों में पड़ी थी फूट
उदय देसाई को दिए गए ऋण की वसूली में कंसोर्टियम लीडर की अनदेखी से समूह के अन्य बैंकों में फूट पड़ गई थी। नतीजा ये हुआ कि बैंकों ने वसूली के लिए अलग-अलग राह अपनाई। सबसे पहले यूनियन बैंक के रीजनल मैनेजर सत्येंद्र कुमार सिंह ने 4 नवंबर 2019 को लखनऊ में सीबीआई में शिकायत दर्ज कराई।
इसमें यूनाइटेड बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक और ओरियंटल बैंक शामिल रहे। इन बैंकों के करीब 1250 करोड़ रुपये देसाई के लोन खातों में डूबे हैं। यूनियन बैंक की शिकायत पर सीबीआई की जांच शुरू होने के बाद बैंक ऑफ इंडिया ने भी केस दर्ज कराया। कंसोर्टियम लीडर यहां भी यहां पर देसाई पर मेहरबान रहे।