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Kanpur News: सालों से लंबित मामले एक एक बार की सुनवाई में निपटे
Sun, 14 Dec 2025 01:54 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Sun, 14 Dec 2025 01:54 AM IST
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कानपुर देहात। माती कचहरी परिसर में शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। प्रशासनिक न्यायमूर्ति समित गोपाल ने मां सरस्वती की मूर्ति पर माल्यार्पण कर राष्ट्रीय लोक अदालत एवं आर्बिट्रेशन की विशेष लोक अदालत का शुभारंभ किया गया। इस दौरान कुल 2,51,786 वाद निस्तारित कर 25, 20, 41, 622 रुपये की धनराशि अर्थदंड के रूप में वसूली गई। इसके अलावा क्षतिपूर्ति भी दिलाई गई।
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली और उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देशन में आयोजित राष्ट्रीय को लोक अदालत में मोटर दुर्घटना प्रतिकर वाद, पारिवारिक विवादों से संबंधित घरेलू हिंसा, व्यवहारिक वाद, उत्तराधिकार वाद, राजस्व वाद तथा लघु फौजदारी, स्वास्थ्य विभाग समेत अन्य लंबित वादों का निस्तारण कराया गया। सालों से अलग रह रहे पति, पत्नी साथ रहने के लिए राजी हुए। वहीं, बैंकों के मामले में लिए गए ऋण की अदायगी न कर पाने पर अधिक बकाया होने पर आधे से कम में रकम जमा करा कर मामले निपटाए गए। राष्ट्रीय लोक अदालत से त्वरित न्याय मिला तो पीड़ितों के चेहरे पर मुस्कान दिखी। प्रशासनिक न्यायमूर्ति ने न्यायिक अधिकारियों के साथ राष्ट्रीय लोक अदालत का निरीक्षण किया। अधिक से अधिक वादों के निस्तारण के लिए दिशा-निर्देश दिए।
राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान जनपद न्यायाधीश की अदालत ने 11 वाद में दो वाद निस्तारित कर 1,97,424 की क्षतिपूर्ति दिलाई। प्रधान न्यायाधीश,पारिवारिक न्यायालय की अदालत में 133 वाद लगाए गए, इसमें 109 वादों का निस्तारण किया गया। 16 वैवाहिक जोड़े साथ रहने के लिए विदा किए गए। पीठासीन अधिकारी, मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण में 150 में 122 वाद निस्तारित हुए। 11, 90, 84, 518 रुपये की क्षतिपूर्ति दिलाई गई।
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अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट-प्रथम की अदालत में 1430 वाद लगाए गए, सभी का निस्तारण कर 26, 835 रुपये की वसूली की गई। स्थायी लोक अदालत द्वारा 12 वाद में पांच का निस्तारण कर पांच लाख की क्षतिपूर्ति दिलाई गई। आर्बिट्रेशन की भी विशेष लोक अदालत में 30 वाद लगाए गए जिसमें तीन वाद निस्तारित कर 1, 97, 424 रुपये की वसूली की गई। बैंकों व फाइनेंस कंपनियों द्वारा रिकवरी के 12, 778 वाद लगाए गए। जिसमें 1348 वाद निस्तारित कर 13, 12, 00,000 रुपये की रिकवरी की गई।
वहीं जिले की सभी छह तहसीलों में राजस्व एवं अन्य प्रकृति के वादों 13722 वाद लगाए गए, इसमें 13722 वाद निस्तारित किए गए। कानपुर नगर की घाटमपुर तहसील में 6582 व बिल्हौर में 9384 वादों का निस्तारण किया गया। इसके अलावा अपर जिला जज प्रथम, अपर जिला जज तृतीय, अपर जिला जज चतुर्थ, पंचम, सप्तम, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-14 (पाॅक्सो), अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/एफटीसी-प्रथम, द्वितीय की अदालत आए वादों का निस्तारण कराया गया।
अपर जिला जज/नामित सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण हिमांशु कुमार सिंह ने बताया की पिछली लोक अदालत में 239908 वाद निस्तारित किए गए थे इस बार सबसे अधिक 251786 वादों का निस्तारण किया गया। यहां र जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, रवींद्र सिंह, जिलाधिकारी कपिल सिंह, कल्पना वर्मा, प्रधान न्यायाधीश, परिवार न्यायालय, रजत सिन्हा अपर जिला जज प्रथम, शाजिया नजर जैदी, पीठासीन अधिकारी, मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण, रवीना, न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वितीय आदि न्यायिक अधिकारी आदि मौजूद रहे।
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केस-1
मांगा गुजारा भत्ता, सुलह समझौते से थामा हाथ
चौबेपुर के नौगवां निवासी ममता (52) का भोगनीपुर के चांदपुर निवासी पति प्यारेलाल (56) से मनमुटाव हो गया था। दोनों अलग रह रहे थे। वर्ष 2024 में ममता ने परिवार न्यायालय में गुजरा भत्ता का वाद दाखिल किया। राष्ट्रीय लोक अदालत में सुनवाई करते हुए प्रधान न्यायधीश परिवार न्यायालय कल्पना वर्मा ने दोनों के बीच सुलह समझौता कर एक साथ रहने के लिए राजी कर दिया। दोनों हंसी खुशी से साथ रहने के लिए चले गए। परिवार न्यायालय के काउंसलर रविशंकर वर्मा ने बताया कि दोनों की छह माह काउंसलिंग की गई।
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केस-2
एक साथ रहने पर बनी बात तो खिले चेहरे
डेरापुर के कुढ़ावल निवासी श्रृष्टि ने परिवार न्यायालय में पति स्वराज से गुजारा भत्ता के लिए वाद दाखिल किया था। काफी समय से दोनों के बीच मनमुटाव चल रहा था। दोनों अलग-अलग रह रहे थे। वर्ष 2024 में गुजारा भत्ता के लिए वाद दाखिल किया गया। मामले में परिवार न्यायालय ने काउंसलिंग कर दोनों के बीच समझौता करा दिया। दोनों एक साथ रहने के लिए राजी हुए और न्यायालय से माला पहना कर विदा किया गया।
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दो गुना से अधिक हो गया बकाया, आधे से कम में निपटा
केस-3
रसूलाबाद निवासी जिनेंद्र सिंह ने वर्ष 2022 में प्रधानमंत्री रोजगार गारंटी योजना के तहत लोन लिया था। उनका स्टेट बैंक शाखा रसूलाबाद में दो ऋण खाते थे। शाखा प्रबंधक ज्ञान सिंह ने बताया कि टर्म लोन 3.60 लाख, क्रेडिट लोन 5.40 लाख लिया था। खाता में टर्न ओवर न करने व ब्याज न जमा करने पर दोनों खाते की धनराशि करीब 13 लाख पहुंच गई थी। करीब एक साल से अधिक से खाता एनपीए था। इधर कारोबार न चलने व बकाया न जमा होने पर जिनेंद्र परेशान थे। राष्ट्रीय लोक अदालत में 5.57 लाख जमा कर दोनों खातों को सेटलमेंट किया गया। मामले में सुलह होने पर जिनेंद्र के चेहरे पर खुशी दिखी।
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पांच लाख था बकाया, दो लाख की मिली राहत
केस-4
मलगांव झींझक के अवधेश कुमार का बैंक ऑफ बड़ौदा शाखा में पांच का ऋण बकाया था। व्यवसाय न चल पाने के कारण वह जमा नहीं कर पा रहे थे। खाता एनपीए होने पर कई बार नोटिस दी गई। इसके बाद भी बकाया जमा नहीं हुआ। शनिवार को मामला राष्ट्रीय लोक अदालत में रखा गया। यहां पर बैंक अधिकारियों ने सुलझ समाझौते से तीन लाख रुपये जमा करा कर मामला निपटा दिया। दो लाख की छूट मिलने पर अवधेश खुश नजर आए। बैंक के रिकवरी इंचार्ज सुनील कुमार, जोन रिकवरी इंचार्ज विपिन कुमार ने बताया इस तरह के कई मामले निपटाए गए, जो सालों से लंंबित थे।
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राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली और उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देशन में आयोजित राष्ट्रीय को लोक अदालत में मोटर दुर्घटना प्रतिकर वाद, पारिवारिक विवादों से संबंधित घरेलू हिंसा, व्यवहारिक वाद, उत्तराधिकार वाद, राजस्व वाद तथा लघु फौजदारी, स्वास्थ्य विभाग समेत अन्य लंबित वादों का निस्तारण कराया गया। सालों से अलग रह रहे पति, पत्नी साथ रहने के लिए राजी हुए। वहीं, बैंकों के मामले में लिए गए ऋण की अदायगी न कर पाने पर अधिक बकाया होने पर आधे से कम में रकम जमा करा कर मामले निपटाए गए। राष्ट्रीय लोक अदालत से त्वरित न्याय मिला तो पीड़ितों के चेहरे पर मुस्कान दिखी। प्रशासनिक न्यायमूर्ति ने न्यायिक अधिकारियों के साथ राष्ट्रीय लोक अदालत का निरीक्षण किया। अधिक से अधिक वादों के निस्तारण के लिए दिशा-निर्देश दिए।
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राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान जनपद न्यायाधीश की अदालत ने 11 वाद में दो वाद निस्तारित कर 1,97,424 की क्षतिपूर्ति दिलाई। प्रधान न्यायाधीश,पारिवारिक न्यायालय की अदालत में 133 वाद लगाए गए, इसमें 109 वादों का निस्तारण किया गया। 16 वैवाहिक जोड़े साथ रहने के लिए विदा किए गए। पीठासीन अधिकारी, मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण में 150 में 122 वाद निस्तारित हुए। 11, 90, 84, 518 रुपये की क्षतिपूर्ति दिलाई गई।
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अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट-प्रथम की अदालत में 1430 वाद लगाए गए, सभी का निस्तारण कर 26, 835 रुपये की वसूली की गई। स्थायी लोक अदालत द्वारा 12 वाद में पांच का निस्तारण कर पांच लाख की क्षतिपूर्ति दिलाई गई। आर्बिट्रेशन की भी विशेष लोक अदालत में 30 वाद लगाए गए जिसमें तीन वाद निस्तारित कर 1, 97, 424 रुपये की वसूली की गई। बैंकों व फाइनेंस कंपनियों द्वारा रिकवरी के 12, 778 वाद लगाए गए। जिसमें 1348 वाद निस्तारित कर 13, 12, 00,000 रुपये की रिकवरी की गई।
वहीं जिले की सभी छह तहसीलों में राजस्व एवं अन्य प्रकृति के वादों 13722 वाद लगाए गए, इसमें 13722 वाद निस्तारित किए गए। कानपुर नगर की घाटमपुर तहसील में 6582 व बिल्हौर में 9384 वादों का निस्तारण किया गया। इसके अलावा अपर जिला जज प्रथम, अपर जिला जज तृतीय, अपर जिला जज चतुर्थ, पंचम, सप्तम, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-14 (पाॅक्सो), अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/एफटीसी-प्रथम, द्वितीय की अदालत आए वादों का निस्तारण कराया गया।
अपर जिला जज/नामित सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण हिमांशु कुमार सिंह ने बताया की पिछली लोक अदालत में 239908 वाद निस्तारित किए गए थे इस बार सबसे अधिक 251786 वादों का निस्तारण किया गया। यहां र जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, रवींद्र सिंह, जिलाधिकारी कपिल सिंह, कल्पना वर्मा, प्रधान न्यायाधीश, परिवार न्यायालय, रजत सिन्हा अपर जिला जज प्रथम, शाजिया नजर जैदी, पीठासीन अधिकारी, मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण, रवीना, न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वितीय आदि न्यायिक अधिकारी आदि मौजूद रहे।
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केस-1
मांगा गुजारा भत्ता, सुलह समझौते से थामा हाथ
चौबेपुर के नौगवां निवासी ममता (52) का भोगनीपुर के चांदपुर निवासी पति प्यारेलाल (56) से मनमुटाव हो गया था। दोनों अलग रह रहे थे। वर्ष 2024 में ममता ने परिवार न्यायालय में गुजरा भत्ता का वाद दाखिल किया। राष्ट्रीय लोक अदालत में सुनवाई करते हुए प्रधान न्यायधीश परिवार न्यायालय कल्पना वर्मा ने दोनों के बीच सुलह समझौता कर एक साथ रहने के लिए राजी कर दिया। दोनों हंसी खुशी से साथ रहने के लिए चले गए। परिवार न्यायालय के काउंसलर रविशंकर वर्मा ने बताया कि दोनों की छह माह काउंसलिंग की गई।
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केस-2
एक साथ रहने पर बनी बात तो खिले चेहरे
डेरापुर के कुढ़ावल निवासी श्रृष्टि ने परिवार न्यायालय में पति स्वराज से गुजारा भत्ता के लिए वाद दाखिल किया था। काफी समय से दोनों के बीच मनमुटाव चल रहा था। दोनों अलग-अलग रह रहे थे। वर्ष 2024 में गुजारा भत्ता के लिए वाद दाखिल किया गया। मामले में परिवार न्यायालय ने काउंसलिंग कर दोनों के बीच समझौता करा दिया। दोनों एक साथ रहने के लिए राजी हुए और न्यायालय से माला पहना कर विदा किया गया।
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दो गुना से अधिक हो गया बकाया, आधे से कम में निपटा
केस-3
रसूलाबाद निवासी जिनेंद्र सिंह ने वर्ष 2022 में प्रधानमंत्री रोजगार गारंटी योजना के तहत लोन लिया था। उनका स्टेट बैंक शाखा रसूलाबाद में दो ऋण खाते थे। शाखा प्रबंधक ज्ञान सिंह ने बताया कि टर्म लोन 3.60 लाख, क्रेडिट लोन 5.40 लाख लिया था। खाता में टर्न ओवर न करने व ब्याज न जमा करने पर दोनों खाते की धनराशि करीब 13 लाख पहुंच गई थी। करीब एक साल से अधिक से खाता एनपीए था। इधर कारोबार न चलने व बकाया न जमा होने पर जिनेंद्र परेशान थे। राष्ट्रीय लोक अदालत में 5.57 लाख जमा कर दोनों खातों को सेटलमेंट किया गया। मामले में सुलह होने पर जिनेंद्र के चेहरे पर खुशी दिखी।
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पांच लाख था बकाया, दो लाख की मिली राहत
केस-4
मलगांव झींझक के अवधेश कुमार का बैंक ऑफ बड़ौदा शाखा में पांच का ऋण बकाया था। व्यवसाय न चल पाने के कारण वह जमा नहीं कर पा रहे थे। खाता एनपीए होने पर कई बार नोटिस दी गई। इसके बाद भी बकाया जमा नहीं हुआ। शनिवार को मामला राष्ट्रीय लोक अदालत में रखा गया। यहां पर बैंक अधिकारियों ने सुलझ समाझौते से तीन लाख रुपये जमा करा कर मामला निपटा दिया। दो लाख की छूट मिलने पर अवधेश खुश नजर आए। बैंक के रिकवरी इंचार्ज सुनील कुमार, जोन रिकवरी इंचार्ज विपिन कुमार ने बताया इस तरह के कई मामले निपटाए गए, जो सालों से लंंबित थे।