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Kanpur News: उत्तर रेलवे सेफ्टी शू खरीद भ्रष्टाचार में जाजमऊ के दो कारोबारियों समेत सात पर रिपोर्ट
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कानपुर। उत्तर रेलवे मुख्यालय वडोदरा हाउस में सेफ्टी शू की खरीद से जुड़े कथित भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने इस मामले में रिपोर्ट दर्ज की है। इसमें उत्तर रेलवे के तीन अधिकारियों और जाजमऊ स्थित एक निजी कंपनी सहित उसके दो कारोबारियों को आरोपी बनाया गया है। रविवार को जांच टीम शहर पहुंची और जांच पड़ताल की।
आरोपियों में चीफ मैटीरियल्स मैनेजर (स्टोर) नरेंद्र सिंह, डिप्टी चीफ मैटीरियल्स मैनेजर (स्टोर) शुभाशीष माइती और सीनियर क्लर्क (स्टोर) लेनिन शर्मा शामिल हैं। इनके साथ मेसर्स मैश इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड और उसके कारोबारी शारिक अली व एजाज अली को भी आरोपी बनाया गया है। सीबीआई अधिकारियों ने रविवार को जाजमऊ स्थित कंपनी में छानबीन की। इसके बाद टीम आरोपी कारोबारियों के घर भी पहुंची और जानकारी जुटाई। एफआईआर के अनुसार, इन रेलवे अधिकारियों पर कंपनी को टेंडर में अनुचित लाभ पहुंचाने का आरोप है। इसके बदले उन्होंने रिश्वत और अन्य अवैध लाभ लेने की साजिश रची। तीनों आरोपी रेलवे के मुख्यालय वडोदरा हाउस, नई दिल्ली में तैनात हैं। कारोबारी शारिक अली और एजाज अली के माध्यम से अधिकारियों तक रिश्वत पहुंचाई जाती थी।
जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपियों के बीच टेंडर संबंधी गोपनीय सूचनाएं साझा की जाती थीं। इससे कंपनी को बोली तैयार करने और प्रतिस्पर्धा में बढ़त हासिल करने में मदद मिलती थी। इस प्रक्रिया से सरकारी खरीद की पारदर्शिता और निष्पक्षता प्रभावित हुई। सीबीआई ने बताया कि 24 जून 2026 को शारिक और एजाज के बीच बातचीत हुई थी। इसमें सेफ्टी शू का खरीद आदेश कंपनी के पक्ष में जारी होने की जानकारी दी गई। बातचीत में तय रिश्वत की रकम पहुंचाने के लिए दिल्ली आने को कहा गया था।
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एफआईआर में आरोप है कि चीफ मैटीरियल्स मैनेजर नरेंद्र सिंह और डिप्टी शुभाशीष माइती मिलकर काम करते थे। वे कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाने के एवज में आर्थिक लाभ प्राप्त करते थे। सीनियर क्लर्क लेनिन शर्मा पर कंपनी को टेंडर से जुड़ी गोपनीय जानकारी उपलब्ध कराने का आरोप है। सीबीआई ने कहा कि मामले की विस्तृत जांच जारी है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।
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आरोपियों में चीफ मैटीरियल्स मैनेजर (स्टोर) नरेंद्र सिंह, डिप्टी चीफ मैटीरियल्स मैनेजर (स्टोर) शुभाशीष माइती और सीनियर क्लर्क (स्टोर) लेनिन शर्मा शामिल हैं। इनके साथ मेसर्स मैश इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड और उसके कारोबारी शारिक अली व एजाज अली को भी आरोपी बनाया गया है। सीबीआई अधिकारियों ने रविवार को जाजमऊ स्थित कंपनी में छानबीन की। इसके बाद टीम आरोपी कारोबारियों के घर भी पहुंची और जानकारी जुटाई। एफआईआर के अनुसार, इन रेलवे अधिकारियों पर कंपनी को टेंडर में अनुचित लाभ पहुंचाने का आरोप है। इसके बदले उन्होंने रिश्वत और अन्य अवैध लाभ लेने की साजिश रची। तीनों आरोपी रेलवे के मुख्यालय वडोदरा हाउस, नई दिल्ली में तैनात हैं। कारोबारी शारिक अली और एजाज अली के माध्यम से अधिकारियों तक रिश्वत पहुंचाई जाती थी।
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जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपियों के बीच टेंडर संबंधी गोपनीय सूचनाएं साझा की जाती थीं। इससे कंपनी को बोली तैयार करने और प्रतिस्पर्धा में बढ़त हासिल करने में मदद मिलती थी। इस प्रक्रिया से सरकारी खरीद की पारदर्शिता और निष्पक्षता प्रभावित हुई। सीबीआई ने बताया कि 24 जून 2026 को शारिक और एजाज के बीच बातचीत हुई थी। इसमें सेफ्टी शू का खरीद आदेश कंपनी के पक्ष में जारी होने की जानकारी दी गई। बातचीत में तय रिश्वत की रकम पहुंचाने के लिए दिल्ली आने को कहा गया था।
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एफआईआर में आरोप है कि चीफ मैटीरियल्स मैनेजर नरेंद्र सिंह और डिप्टी शुभाशीष माइती मिलकर काम करते थे। वे कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाने के एवज में आर्थिक लाभ प्राप्त करते थे। सीनियर क्लर्क लेनिन शर्मा पर कंपनी को टेंडर से जुड़ी गोपनीय जानकारी उपलब्ध कराने का आरोप है। सीबीआई ने कहा कि मामले की विस्तृत जांच जारी है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।