लॉकर डकैती: पुलिस की जांच बनेगी पीड़ितों के लिए राहत का आधार, सरकार की भी लेंगे मदद
सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की कराचीखाना शाखा में के 11 लॉकर तोड़े जाने की घटना बैंक के लिए भी अपनी तरह का पहला मामला है। इसमें ग्राहकों को राहत देने के लिए राहत का नया फार्मूला तय किया जा सकता है। साथ ही पुलिस की जांच पीड़ित ग्राहकों को भविष्य में मिलने वाले मुआवजे का आधार बन सकती है।
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कानपुर में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया कराची खाना शाखा के लॉकरों से करोड़ों के गहने चोरी होने के मामले में पुलिस की जांच ही भविष्य में ग्राहकों को मिलने वाली राहत या मुआवजा का आधार बन सकती है। बैंक प्रबंधन के लिए भी यह एक विशेष केस है। लॉकरों से ग्राहकों के गहने चोरी होने का यह देश का पहला मामला बताया जा रहा है, जिसमें बैंक कर्मचारियों ने ही सेंध लगाई हो।
उच्च प्रबंधन पूरे मामले में सरकार और आरबीआई के साथ मंथन की प्रक्रिया भी शुरू कर चुका है। पुलिस की प्रारंभिक जांच में पूरे मामले में बैंक मैनेजर और लॉकर इंचार्ज की भूमिका ही प्रकाश में आई है। सूत्रों ने बताया कि इस पूरे मामले में ग्राहक स्तर से किसी भी प्रकार की लापरवाही अब तक सामने नहीं आई है। सभी लॉकर सालों पहले लिए गए थे और नियमित तौर पर ऑपरेट हो रहे थे और इनका किराया भी मिल रहा था।
बैंक प्रबंधन अपनी साख बचाने के लिए यह देख रहा है कि ग्राहकों को किस तरह से राहत दी जा सकती है। इस पर काम कर रहा है। आरोपियों के दोषी साबित होने की स्थिति में उनकी व्यक्तिगत संपत्ति जैसे उनका पेंशन, सैलरी, व्यक्तिगत पूंजी से रिकवरी की जा सकती है।
सरकार ने तब दी थी राहत
सरकार ने बैंक के डूबने पर ग्राहक हित को देखते हुए बीमा की रकम एक लाख से बढ़ाकर पांच लाख कर दी है। पिछले साल कई कोऑपरेटिव बैंकों के ग्राहकों को पांच लाख तक की बीमा रकम डिपॉजिट एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (डीआईसीजीसी) की ओर से दी गई थी। लॉकर से गहनों के चोरी के मामलों को अलग तरीके से देखा जा रहा है। ताकि ग्राहकों को अधिक से अधिक राहत दी जाए।
तय हो सकता है राहत का नया फार्मूला
आरबीआई ने एक जनवरी 2022 को लॉकर के संबंध में नए दिशा निर्देश निकाले थे। इसमें कहा गया था कि लॉकर से सामान चोरी, आग या अन्य कारणों से नुकसान पर ग्राहक की ओर से दिए जाने वाले किराये का सौ गुना मुआवजा दिया जाएगा। इस बैंक में ग्राहकों के लॉकर का किराया 1200 से 1500 तक है। ऐसे में ग्राहकों के गायब जेवरों, कैश का भुगतान बेहद कम या सीमित होगा। इससे ग्राहकों को कोई लाभ नहीं मिलेगा। इस पूरे मामले में बैंक प्रबंधन के अफसरों ने ही गड़बड़ी की है। लॉकरों से गहने अन्य लोगों की मदद से चुराए हैं। ऐसे में राहत का नया फार्मूला सरकार या आरबीआई तय कर सकती है।