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UP: बुंदेलखंड की जैविक अरहर दाल को मिलेगी विश्व में पहचान, जीआई टैग दिलाने की चल रही कवायद
Wed, 04 Dec 2024 03:40 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांदा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांदा
Published by: शिखा पांडेय
Updated Wed, 04 Dec 2024 03:40 PM IST
सार
बुंदेलखंड की जैविक अरहर दाल को विश्व में पहचान मिलेगी। जीआई टैग दिलाने की कवायद चल रही है। मंडल में अरहर दाल की 60 हजार हेक्टेयर में खेती होती है।
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तिंदवारी क्षेत्र में खेतों पर खड़ी अरहर की फसल
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बुंदेलखंड क्षेत्र में पैदा होने वाली अरहर की दाल को अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में जल्द ही नई पहचान मिलेगी। इसके लिए यहां की दाल को जीआई टैग देने की तैयारी शुरू कर दी गई है। कृषि विभाग के अफसरों की मानें तो अरहर की दाल को जीआई टैग मिलने पर किसानों की आमदनी भी दोगुनी होगी।
बुंदेलखंड में चित्रकूटधाम मंडल के चार जिले अरहर की दाल की पैदावार के लिए एक बड़ा हब है। यहां हर साल इसकी खेती का ग्राफ बढ़ रहा है। कोरोना संक्रमण काल के बाद से इस क्षेत्र के किसानों ने अरहर की पैदावार कर अपनी किस्मत चमकाई है। बुंदेलखंड के हमीरपुर जिले में इस बार 19150 हेक्टेयर क्षेत्रफल में किसानों ने अरहर की दाल की बुआई की है। जबकि, महोबा में 4376 हेक्टेयर, बांदा में 24795 हेक्टेयर व चित्रकूट में 20132 हेक्टेयर क्षेत्रफल में अरहर की बोआई की गई है। बुंदेलखंड के इन चार जिलों में ही इस बार 68,453 हेक्टेयर क्षेत्रफल में अरहर की बुआई का किसानों ने रिकॉर्ड बनाया है।
उप कृषि निदेशक विजय कुमार ने बताया कि हमीरपुर, महोबा, बांदा और चित्रकूट जिलों में इस बार अरहर की खेती का रकबा भी पिछले सालों की तुलना में काफी बढ़ा है। बताया कि हमीरपुर में 19143 हेक्टेयर से सात हेक्टेयर अधिक रकबे में बुआई की गई है, जबकि महोबा में आठ हेक्टेयर, बांदा में 3215 हेक्टेयर व चित्रकूट में 897 हेक्टेयर का रकबा अरहर की दाल की पैदावार के लिए बढ़ा है। वर्ष 2021 में 52,888 हेक्टेयर क्षेत्रफल में अरहर की दाल की पैदावार हुई थी।
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अरहर की दाल को जीआई टैग मिलने पर मिलेंगे अच्छे दाम
उप कृषि निदेशक विजय कुमार ने बताया कि बुंदेलखंड की अरहर की दाल को जीआई टैग जल्द ही मिलेगा। इसके लिए उच्च स्तर पर कार्यवाही चल रही है। जीपीएस के जरिये बुंदेलखंड की अरहर की दाल की खेती का सर्वे भी कराए जाने की तैयारी है। जीआई टैग मिलने पर बुंदेलखंड की अरहर की दाल को अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान मिलेगी। किसानों को दाल बेचने पर अच्छे दाम मिलेंगे। बुंदेलखंड क्षेत्र के हमीरपुर, महोबा, चित्रकूट और बांदा समेत चारों जिलों में 19 हजार से अधिक किसान अरहर की दाल की पैदावार करते हैं।
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बुंदेलखंड में चित्रकूटधाम मंडल के चार जिले अरहर की दाल की पैदावार के लिए एक बड़ा हब है। यहां हर साल इसकी खेती का ग्राफ बढ़ रहा है। कोरोना संक्रमण काल के बाद से इस क्षेत्र के किसानों ने अरहर की पैदावार कर अपनी किस्मत चमकाई है। बुंदेलखंड के हमीरपुर जिले में इस बार 19150 हेक्टेयर क्षेत्रफल में किसानों ने अरहर की दाल की बुआई की है। जबकि, महोबा में 4376 हेक्टेयर, बांदा में 24795 हेक्टेयर व चित्रकूट में 20132 हेक्टेयर क्षेत्रफल में अरहर की बोआई की गई है। बुंदेलखंड के इन चार जिलों में ही इस बार 68,453 हेक्टेयर क्षेत्रफल में अरहर की बुआई का किसानों ने रिकॉर्ड बनाया है।
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उप कृषि निदेशक विजय कुमार ने बताया कि हमीरपुर, महोबा, बांदा और चित्रकूट जिलों में इस बार अरहर की खेती का रकबा भी पिछले सालों की तुलना में काफी बढ़ा है। बताया कि हमीरपुर में 19143 हेक्टेयर से सात हेक्टेयर अधिक रकबे में बुआई की गई है, जबकि महोबा में आठ हेक्टेयर, बांदा में 3215 हेक्टेयर व चित्रकूट में 897 हेक्टेयर का रकबा अरहर की दाल की पैदावार के लिए बढ़ा है। वर्ष 2021 में 52,888 हेक्टेयर क्षेत्रफल में अरहर की दाल की पैदावार हुई थी।
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अरहर की दाल को जीआई टैग मिलने पर मिलेंगे अच्छे दाम
उप कृषि निदेशक विजय कुमार ने बताया कि बुंदेलखंड की अरहर की दाल को जीआई टैग जल्द ही मिलेगा। इसके लिए उच्च स्तर पर कार्यवाही चल रही है। जीपीएस के जरिये बुंदेलखंड की अरहर की दाल की खेती का सर्वे भी कराए जाने की तैयारी है। जीआई टैग मिलने पर बुंदेलखंड की अरहर की दाल को अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान मिलेगी। किसानों को दाल बेचने पर अच्छे दाम मिलेंगे। बुंदेलखंड क्षेत्र के हमीरपुर, महोबा, चित्रकूट और बांदा समेत चारों जिलों में 19 हजार से अधिक किसान अरहर की दाल की पैदावार करते हैं।