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दलित-ब्राह्मण कनेक्शन पर काम कर रही बसपा
पंकज प्रसून, अमर उजाला, कानपुर
Updated Sat, 05 Nov 2016 11:49 PM IST
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विधानसभा सीटों पर अपनी स्थिति मजबूत करने में जुट गई बसपा
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भाजपा की दलितों और अति पिछड़ों में सक्रियता को देखते हुए बसपा ने भी नई चाल चली है। पार्टी प्रमुख मायावती दलितों और ब्राह्मणों को एक साथ जोड़कर सत्ता में आने की तैयारी कर रही हैं। दलित-ब्राह्मण गठजोड़ अभियान की शुरुआत कानपुर से कर दी गई है। यह जिम्मेदारी पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी और राज्यसभा सदस्य सतीश मिश्र को दी गई है।
पार्टी सबसे पहले सुरक्षित विधानसभा सीटों पर अपनी स्थिति मजबूत करने में जुट गई है। कहा जा रहा है कि सुरक्षित सीटों पर ब्राह्मण नेता को मतदाताओं को जुटाने की जिम्मेदारी देने के पीछे रणनीति है कि दलितों को ब्राह्मण मतदाताओं का भी समर्थन मिले। कहा जाता है कि जहां पर दलित प्रत्याशी चुनाव लड़ता है, वहां बसपा को ब्राह्मणों का वोट नहीं मिलता है। पार्टी इस बार इसी मिथक को तोड़ना चाहती है। इसी रणनीति पर बसपा पूरे प्रदेश में काम कर रही है। सतीश मिश्र कानपुर मंडल की एक सुरक्षित सीट घाटमपुर में दलित ब्राह्मण गठजोड़ पर बैठक कर चुके हैं, अब 11 नवंबर को वह बिल्हौर सुरक्षित सीट पर समीक्षा बैठक करेंगे। इसी तरह वह पूरे प्रदेश के ब्राह्मण मतदाताओं को सुरक्षित सीटों के दलित प्रत्याशियों को जिताने की मुहिम पर काम करेंगे। कानपुर मंडल में के छह जनपदों में सात सुरक्षित सीटें हैं, जहां पर पार्टी ने दलितों को प्रत्याशी बनाया है। 2007 के विधानसभा चुनाव में बसपा मंडल की किसी भी सुरक्षित सीट पर अपने दलित प्रत्याशी को नहीं जिता पाई थी। पार्टी को लगता है कि यदि इन सीटों पर ब्राह्मण मतदाता भी आ जाएं तो सीट आसानी से निकल जाएगी। यही वजह है कि इस बार पार्टी कोई भी रिस्क नहीं लेना चाहती है। राज्यसभा सांसद और जोनल कोआर्डिनेटर अशोक सिद्घार्थ ने बताया कि अगले सप्ताह सांसद सतीश मिश्र बिल्हौर में कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करेंगे।
कानपुर मंडल की सुरक्षित विधानसभा सीट
घाटमपुर, बिल्हौर, कन्नौज सदर, कायमगंज फर्रुखाबाद, रसूलाबाद कानपुर देहात, औरैया सदर, भरथना इटावा।
2007 में इन सीटों पर थे चार विधायक : जिताने की जिम्मेदारी थी सतीश मिश्र, नौशाद अली, केके गौतम को।
2012 में एक भी सीट में जीत नहीं मिली : जिताने की जिम्मेदारी थी वीर सिंह, रणवीर कश्यप को।
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पार्टी सबसे पहले सुरक्षित विधानसभा सीटों पर अपनी स्थिति मजबूत करने में जुट गई है। कहा जा रहा है कि सुरक्षित सीटों पर ब्राह्मण नेता को मतदाताओं को जुटाने की जिम्मेदारी देने के पीछे रणनीति है कि दलितों को ब्राह्मण मतदाताओं का भी समर्थन मिले। कहा जाता है कि जहां पर दलित प्रत्याशी चुनाव लड़ता है, वहां बसपा को ब्राह्मणों का वोट नहीं मिलता है। पार्टी इस बार इसी मिथक को तोड़ना चाहती है। इसी रणनीति पर बसपा पूरे प्रदेश में काम कर रही है। सतीश मिश्र कानपुर मंडल की एक सुरक्षित सीट घाटमपुर में दलित ब्राह्मण गठजोड़ पर बैठक कर चुके हैं, अब 11 नवंबर को वह बिल्हौर सुरक्षित सीट पर समीक्षा बैठक करेंगे। इसी तरह वह पूरे प्रदेश के ब्राह्मण मतदाताओं को सुरक्षित सीटों के दलित प्रत्याशियों को जिताने की मुहिम पर काम करेंगे। कानपुर मंडल में के छह जनपदों में सात सुरक्षित सीटें हैं, जहां पर पार्टी ने दलितों को प्रत्याशी बनाया है। 2007 के विधानसभा चुनाव में बसपा मंडल की किसी भी सुरक्षित सीट पर अपने दलित प्रत्याशी को नहीं जिता पाई थी। पार्टी को लगता है कि यदि इन सीटों पर ब्राह्मण मतदाता भी आ जाएं तो सीट आसानी से निकल जाएगी। यही वजह है कि इस बार पार्टी कोई भी रिस्क नहीं लेना चाहती है। राज्यसभा सांसद और जोनल कोआर्डिनेटर अशोक सिद्घार्थ ने बताया कि अगले सप्ताह सांसद सतीश मिश्र बिल्हौर में कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करेंगे।
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कानपुर मंडल की सुरक्षित विधानसभा सीट
घाटमपुर, बिल्हौर, कन्नौज सदर, कायमगंज फर्रुखाबाद, रसूलाबाद कानपुर देहात, औरैया सदर, भरथना इटावा।
2007 में इन सीटों पर थे चार विधायक : जिताने की जिम्मेदारी थी सतीश मिश्र, नौशाद अली, केके गौतम को।
2012 में एक भी सीट में जीत नहीं मिली : जिताने की जिम्मेदारी थी वीर सिंह, रणवीर कश्यप को।