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ब्रांड कानपुर महोत्सव में अंकिता के गीतों पर झूमे, राजू ने गुदगुदाया
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
Updated Sun, 21 Dec 2014 03:40 AM IST
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ब्रांड कानपुर महोत्सव में शनिवार शाम को सिंगरों ने एक से बढ़कर एक गीत सुनाकर श्रोताओं को थिरकने पर मजबूर किया। वहीं कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव ने कनपुरिया स्टाइल में लोगों को हंसा-हंसाकर लोटपोट कर दिया।
स्टेज के आसपास से निकलते लोगों की खूब चुटकी ली। बाद में सुरेंद्र शर्मा के हांस्य व्यंग व संतोषानंद के गीतों से कनपुरिये झूम उठे।
सांस्कृतिक शाम का आगाज सिंगर विनती सिंह ने दमादम मस्त कलंदर अली दा पहला नंबर गाने के साथ किया।
इसके बाद नीले गाउन और व्हाइट जैकेट में सजी इंडियन आइडल फेम अंकिता मिश्रा ने प्रीत की लत मोहे ऐसी लागी, हो गई मैं मतवाली, तेरे नाम से जी लूं, तेरे नाम से मर जाऊ गीत गाया तो लोग झूमने लगे।
बलम पिचकारी जो तूने मुझे मारी, कजरा मोहब्बत वाला, अंखियों में ऐसा डाला, बीडी जलई ले, जिगर मा बड़ी आग है गीतों की झड़ी लगाई तो कनपुरिये वंस मोर वंस मोर चिल्लाने लगे।
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फिर अंकिता ने जावने जाने मन, कोई यहां नाचे-नाचे गाने सुनाकर लोगों से खूब तालियां बजवाई। इसके बाद सिंगर अरुण दास ने लागा चुनरी में दाग, हम आपके प्यार में गीता गाया।
अगली कड़ी में फैमिली अंताक्षरी फेम सौरभ दुबे ने इक हसीना थी, इक दीवाना था, गीत सुनाकर श्रोताओं को झुमाया। इंडियाज गॉट टेलेंट फेम पांच साल की शांबुरी शर्मा ने दिल चीज क्या है, आप मेरी जान लीजिए गीत पर डांस की शानदार परफार्मेंस दी।
लेजर लाइटों के बीच चल रहे गाने सुनकर दर्शक थिरकते रहे।
राजू ने दिया हंसी का डोज
पीला कोट और नीली जींस पहने राजू श्रीवास्तव ने चिरपरिचित कनपुरिया स्टाइल में दर्शकों को हंसी का डोज दिया। रोलिंग कैमरा पास आते देख बोले अरे-अरे ये लकड़बग्घा कहां आ गया।
कैसे हो आप लो, सब ठीक है ना, कानपुर अपनी जगह पर है.. बोले तो सभी हंस पड़े। फिर बोले पढ़े यही हैं, डिग्री भी ली है, और पढ़ गए होते तो यहां खड़े होते क्या।
फिर बोले देखिए प्यार से सुनेंगे तो सुनाउंगा नहीं तो और हंसाऊंगा। फिर बोले जो हंसे उसका घर बसे, पूछो फिर, कभी हंसा चुटकुला सुनाया तो लोग खिल खिलाकर हंस पड़े।
चुटकुला सुनाया प्यार करना है तो निरमा पाउडर वाली से करो, कहती है पहले इस्तेमाल करो, फिर विश्वास करो। कानपुर की सर्दी पर बोले ऐसी ठंडी में नहाने के लिए जिगर चाहिए।
फिर बोले जिगर नहीं जलाने के लिए डीजल चाहिए। अपने शो के दौरान उन्होंने सरकारी अस्पताल की बदहाली, टेंपो-ट्रकों पर पीछे लिखे नामों, देश में शुरू हुए सफाई अभियान पर लतीफे सुनाए।
माटी तो लगी इसमें मेरे भारत की..
महोत्सव में देररात कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसमें हास्य कवि सुरेंद्र शर्मा ने ‘मंदिर हो या मस्जिद की या किसी इमारत की, माटी तो लगी इसमें मेरे भारत की रचना सुनाकर भाई-चारे का संदेश दिया।
गजेंद्र सोलंकी ने ‘फूलों की परवाह छोड़ तुमने कांटों को सींचा था, बड़े शौक से जो सींचा था वो काटों का बगीचा था। पंक्ति सुनाकर खूब वाहवाही लूटी।
डा. अनु गोपाल ने नारी शक्ति पर इस तरह से आप मुझे न देखिए, भाव सूची नहीं हूं बाजार की, मेरी हर एक सांस में उपन्यास है रचना पेश की।
कवि दिलीप दुबे ने आज के इस दौर में आदमी कितना बदल गया स्टाइल में, खाने को रोटी होने न हो पर हाथ में मोबाइल है..पंक्तियां सुनाकर दर्शकों को गुदगुदाया।
लोकेश शुक्ला ने डाल-डाल पर अब हो गई कागो की भीड़, सोन चिरैइया सोचती कहां बनाऊ नीड़ पंक्तियां पेश करके कम होते वन, जंगल पर कटाक्ष किया।
मंच की अध्यक्षता कर रहे मशहूर गीतकार ने श्रोताओं की मांग पर जिंदगी की न टूटे लड़ी, प्यार करले घड़ी दो घड़ी गीत गाया। डा. सुरेश अवस्थी, कमल मुसद्दी ने भी काव्य पाठ किया।
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स्टेज के आसपास से निकलते लोगों की खूब चुटकी ली। बाद में सुरेंद्र शर्मा के हांस्य व्यंग व संतोषानंद के गीतों से कनपुरिये झूम उठे।
सांस्कृतिक शाम का आगाज सिंगर विनती सिंह ने दमादम मस्त कलंदर अली दा पहला नंबर गाने के साथ किया।
इसके बाद नीले गाउन और व्हाइट जैकेट में सजी इंडियन आइडल फेम अंकिता मिश्रा ने प्रीत की लत मोहे ऐसी लागी, हो गई मैं मतवाली, तेरे नाम से जी लूं, तेरे नाम से मर जाऊ गीत गाया तो लोग झूमने लगे।
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बलम पिचकारी जो तूने मुझे मारी, कजरा मोहब्बत वाला, अंखियों में ऐसा डाला, बीडी जलई ले, जिगर मा बड़ी आग है गीतों की झड़ी लगाई तो कनपुरिये वंस मोर वंस मोर चिल्लाने लगे।
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फिर अंकिता ने जावने जाने मन, कोई यहां नाचे-नाचे गाने सुनाकर लोगों से खूब तालियां बजवाई। इसके बाद सिंगर अरुण दास ने लागा चुनरी में दाग, हम आपके प्यार में गीता गाया।
अगली कड़ी में फैमिली अंताक्षरी फेम सौरभ दुबे ने इक हसीना थी, इक दीवाना था, गीत सुनाकर श्रोताओं को झुमाया। इंडियाज गॉट टेलेंट फेम पांच साल की शांबुरी शर्मा ने दिल चीज क्या है, आप मेरी जान लीजिए गीत पर डांस की शानदार परफार्मेंस दी।
लेजर लाइटों के बीच चल रहे गाने सुनकर दर्शक थिरकते रहे।
राजू ने दिया हंसी का डोज
पीला कोट और नीली जींस पहने राजू श्रीवास्तव ने चिरपरिचित कनपुरिया स्टाइल में दर्शकों को हंसी का डोज दिया। रोलिंग कैमरा पास आते देख बोले अरे-अरे ये लकड़बग्घा कहां आ गया।
कैसे हो आप लो, सब ठीक है ना, कानपुर अपनी जगह पर है.. बोले तो सभी हंस पड़े। फिर बोले पढ़े यही हैं, डिग्री भी ली है, और पढ़ गए होते तो यहां खड़े होते क्या।
फिर बोले देखिए प्यार से सुनेंगे तो सुनाउंगा नहीं तो और हंसाऊंगा। फिर बोले जो हंसे उसका घर बसे, पूछो फिर, कभी हंसा चुटकुला सुनाया तो लोग खिल खिलाकर हंस पड़े।
चुटकुला सुनाया प्यार करना है तो निरमा पाउडर वाली से करो, कहती है पहले इस्तेमाल करो, फिर विश्वास करो। कानपुर की सर्दी पर बोले ऐसी ठंडी में नहाने के लिए जिगर चाहिए।
फिर बोले जिगर नहीं जलाने के लिए डीजल चाहिए। अपने शो के दौरान उन्होंने सरकारी अस्पताल की बदहाली, टेंपो-ट्रकों पर पीछे लिखे नामों, देश में शुरू हुए सफाई अभियान पर लतीफे सुनाए।
माटी तो लगी इसमें मेरे भारत की..
महोत्सव में देररात कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसमें हास्य कवि सुरेंद्र शर्मा ने ‘मंदिर हो या मस्जिद की या किसी इमारत की, माटी तो लगी इसमें मेरे भारत की रचना सुनाकर भाई-चारे का संदेश दिया।
गजेंद्र सोलंकी ने ‘फूलों की परवाह छोड़ तुमने कांटों को सींचा था, बड़े शौक से जो सींचा था वो काटों का बगीचा था। पंक्ति सुनाकर खूब वाहवाही लूटी।
डा. अनु गोपाल ने नारी शक्ति पर इस तरह से आप मुझे न देखिए, भाव सूची नहीं हूं बाजार की, मेरी हर एक सांस में उपन्यास है रचना पेश की।
कवि दिलीप दुबे ने आज के इस दौर में आदमी कितना बदल गया स्टाइल में, खाने को रोटी होने न हो पर हाथ में मोबाइल है..पंक्तियां सुनाकर दर्शकों को गुदगुदाया।
लोकेश शुक्ला ने डाल-डाल पर अब हो गई कागो की भीड़, सोन चिरैइया सोचती कहां बनाऊ नीड़ पंक्तियां पेश करके कम होते वन, जंगल पर कटाक्ष किया।
मंच की अध्यक्षता कर रहे मशहूर गीतकार ने श्रोताओं की मांग पर जिंदगी की न टूटे लड़ी, प्यार करले घड़ी दो घड़ी गीत गाया। डा. सुरेश अवस्थी, कमल मुसद्दी ने भी काव्य पाठ किया।