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मां की साड़ी से कमरे में फांसी लगा ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, कानपुर
Updated Tue, 22 Nov 2016 08:18 PM IST
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कालेज की फीस और खाद-बीज के लिए तीन दिन से बैंक में कतार में लगने और वापस लौटने से परेशान छात्र ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। गुस्साए ग्रामीणों ने बैंक में पत्थरबाजी की। शहर कोतवाली क्षेत्र के मवई बुजुर्ग गांव निवासी सुरेश (18) पुत्र लल्लू प्रजापति रामसेवक शिवहरे डिग्री कालेज, पचनेही में बीएससी द्वितीय वर्ष का छात्र था। मंगलवार को वह गांव स्थित इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक शाखा में रुपये निकालने गया था। दोपहर तक लाइन में लगने के बाद वह अपनी जगह भांजे को खड़ा कर पिता को लेने घर चला गया।
पिता का बैंक में अलग खाता है। उसे भी लाइन में लगने को कहा। लल्लू ने बताया कि वह बैंक जाने के लिए तैयार होने लगा उधर सुरेश ने मां की साड़ी से कमरे में फांसी लगा ली। फंदे से उतारकर उसे जिला अस्पताल लाए। यहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। परिजन शव लेकर वापस गांव चले गए। उधर, घटना से नाराज ग्रामीणों ने बैंक में पत्थरबाजी भी की।
पुलिस ने शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम को भेज दिया। मृतक के पिता का कहना है कि सुरेश को कालेज की फीस के लिए रुपये की जरूरत थी। खेती के लिए भी खाद-बीज खरीदना था। तीन दिन से वह रोज लाइन में लगता था। उसकी बारी आने तक रुपये खत्म होना बताकर वापस कर दिया जाता था। इसी से परेशान होकर उसने जान दे दी। उधर, शाखा प्रबंधक पुलकित सचान का कहना है कि उन्हें प्रतिदिन जितने रुपये मिलते हैं बांट देते हैं। मांग से कम रुपये मिल रहे हैं। इससे एक दिन सभी को देना संभव नहीं है। छात्र उनसे नहीं मिला। उधर, बैंक में दो-चार पत्थर फेंके गए हैं।
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पिता का बैंक में अलग खाता है। उसे भी लाइन में लगने को कहा। लल्लू ने बताया कि वह बैंक जाने के लिए तैयार होने लगा उधर सुरेश ने मां की साड़ी से कमरे में फांसी लगा ली। फंदे से उतारकर उसे जिला अस्पताल लाए। यहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। परिजन शव लेकर वापस गांव चले गए। उधर, घटना से नाराज ग्रामीणों ने बैंक में पत्थरबाजी भी की।
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पुलिस ने शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम को भेज दिया। मृतक के पिता का कहना है कि सुरेश को कालेज की फीस के लिए रुपये की जरूरत थी। खेती के लिए भी खाद-बीज खरीदना था। तीन दिन से वह रोज लाइन में लगता था। उसकी बारी आने तक रुपये खत्म होना बताकर वापस कर दिया जाता था। इसी से परेशान होकर उसने जान दे दी। उधर, शाखा प्रबंधक पुलकित सचान का कहना है कि उन्हें प्रतिदिन जितने रुपये मिलते हैं बांट देते हैं। मांग से कम रुपये मिल रहे हैं। इससे एक दिन सभी को देना संभव नहीं है। छात्र उनसे नहीं मिला। उधर, बैंक में दो-चार पत्थर फेंके गए हैं।
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