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Kanpur News: दवाओं के खरीद-फरोख्त का ब्योरा नहीं दे सके दोनों मेडिकल स्टोर

Mon, 30 Jun 2025 01:54 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 30 Jun 2025 01:54 AM IST
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Both medical stores could not provide details of purchase and sale of medicines
कानपुर। सेन पश्चिम पारा में अवैध रूप से भंडारित 1.81 करोड़ रुपये की दवाइयां बिरहाना रोड स्थित दो मेडिकल स्टोरों से खरीदी गई थीं। ड्रग विभाग शनिवार देर रात तक जांच करता रहा। दोनों संचालकों के पास लाइसेंस मिला, लेकिन दवाओं के खरीद-बिक्री के दस्तावेज नहीं मिल सके। टीम को शक है कि इसमें बिरहाना रोड के और भी मेडिकल स्टोर शामिल हो सकते हैं।
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लगातार नशीली दवाओं के भंडारण की शिकायत के बाद ड्रग विभाग की टीम ने कानपुर देहात और इटावा की टीम के साथ संयुक्त रूप से सेन पश्चिम पारा में छापा मारा था। एक टीम ने साथ सेन पश्चिम पारा मुलायम सिंह के घर पर और दूसरी ने बिरहाना रोड के मेडिकल स्टोरों पर छापा मारा। मुलायम के पास से क्लोनाजेपाम और ट्रामाडॉल जैसी दवाएं मिली थीं। इन दवाओं का बिना डॉक्टरी सलाह के नशे के रूप में भी प्रयोग हो सकता है। टीम ने मेडिकल स्टोर संचालकों को दस्तावेजों को प्रस्तुत करने के लिए 15 दिन का समय दिया है। ड्रग इंस्पेक्टर ओमपाल सिंह ने बताया कि बड़ी मात्रा में मिली नशीली दवाओं के आठ सैंपल जांच के लिए भेज दिए गए हैं। इनकी रिपोर्ट 60 दिन में आएगी। बाकी ये दवाएं जहां से खरीदी गई हैं, उनकी जांच चल रही है।
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टीम को शक है कि कहीं इतने बड़े स्तर पर दवाओं का प्रयोग गलत चीजों में न किया जा रहा हो। सूत्रों की माने तो इसमें बिरहाना रोड से लेकर दिल्ली की फर्मों तक बड़ा खेल है। मुलायम सिंह के यहां मिली दवाओं की खरीद फरोख्त बिरहाना रोड के अलावा दिल्ली की फर्म से की गई है, जिसकी जांच हो रही है। एक टीम दिल्ली भी भेजी जाएगी। इससे पहले कोर्ट के समक्ष जब्त दवाओं के मिले दस्तावेजों को प्रस्तुत किया जाएगा। जांच के बाद मुलायम सिंह पर एफआईआर कराई जाएगी। जो मेडिकल स्टोर 15 दिन में दस्तावेज प्रस्तुत नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई होगी।
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मसवानपुर में दिसंबर में शिकायत के बाद ड्रग विभाग के छापे में लिफाफे में नशीले इंजेक्शन बिकते पाए गए थे, जिसकी रिपोर्ट विभाग के पास आ गई है। उन इंजेक्शनों में नशीला रसायन ब्रुपेनॉर्फिन पाया गया है। मामले में टीम मेडिकल स्टोर संचालक पर एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी में है। ड्रग इंस्पेक्टर ओमपाल ने बताया कि एफआईआर दर्ज कराने से पहले संचालक से पूछताछ भी की जाएगी कि इतनी बड़ी मात्रा में इंजेक्शन कहां से आए और इसकी खरीद कैसे की है।
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