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प्रशासनिक दावे की खुली पोल: घर-घर बीएलओ पहुंचना तो दूर, वोटर कैंप बूथों से भी गायब दिखे साहब
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Sat, 02 Jun 2018 12:37 PM IST
सार
पहले दिन ही मतदाता पुनरीक्षण अभियान के दावे की हवा निकली
वोटर बनने की आस संजोए शहरी कई बूथों से निराश लौट गए
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विस्तार
यूपी के कानपुर शहर में मतदाता पुुनरीक्षण अभियान के पहले दिन ही बूथों या मोहल्लों में बीएलओ नहीं दिखे। वोटर बनने का सपना लेकर युवा जब बूथ पहुंचे तो उन्हें निराशा हाथ लगी। वहीं, घर-घर बीएलओ पहुंचने के प्रशासनिक दावे की भी पोल खुल गई।
लोगों का कहना है कि अब ये देखना है कि बीएलओ कब आएंगे? या फिर अभियान के नाम पर महज खानापूरी होगी। नए मतदाता बनाने, मृतकों के नाम वोटर लिस्ट से हटवाने, किसी तरह की गलती ठीक कराने का काम चालू हो गया है। जिला प्रशासन का दावा है कि बीएलओ घर-घर जाकर वोटर लिस्ट का सत्यापन करेंगे। वह नए वोटर बनने और मतदाता सूची से नाम हटाने के फार्म बांटेंगे। बाद में उन्हें इकट्ठा कर ईआरओ (इलेक्ट्रोरल इलेक्शन आफीसर) को भेजेंगे। जिले में 3536 बीएलओ हैं। इनके काम की निगरानी के लिए 32 सुपरवाइजर लगाए गए हैं।
हर सुपरवाइजर को दस-दस बूथ दिए गए हैं। अमूमन शिकायतें मिलती रहती हैं कि बीएलओ घर-घर न जाकर बूथ या अन्य किसी स्थान पर बैठकर लोगों से बातचीत के आधार पर वोटर लिस्ट का सत्यापन करते हैं। शुक्रवार को पुनरीक्षण अभियान का पहला दिन था। अमर उजाला की टीमों ने कुछ बूथों पर जाकर देखा कि बीएलओ मतदान केंद्र पर बैठकर ही वोटर लिस्ट का सत्यापन तो नहीं कर रहे हैं। विजय नगर, कल्याणपुर, नारायणी धर्मशाला परेड, प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय हमीरपुर रोड, कर्मयोगी विद्या मंदिर बर्रा छह में बीएलओ नहीं मिले।
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सहायक उप जिला निर्वाचन अधिकारी कमल किशोर का कहना है कि हर बूथ पर ज्यादा से ज्यादा 1300 वोटर हैं। इस तरह हर बीएलओ के हिस्से में करीब ढाई सौ घर आते हैं। बीएलओ के पास एक माह का समय है। इसलिए घर-घर पहुंचकर सत्यापन कर लेंगे। तीन-चार दिन बाद सुपरवाइजर बीएलओ की मानीटरिंग चालू कर उनके काम की जानकारी लेने लगेंगे। सत्यापन न करने वाले बीएलओ मानीटरिंग में सामने आ जाएंगे। इसके बाद उन पर कार्रवाई होगी।
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लोगों का कहना है कि अब ये देखना है कि बीएलओ कब आएंगे? या फिर अभियान के नाम पर महज खानापूरी होगी। नए मतदाता बनाने, मृतकों के नाम वोटर लिस्ट से हटवाने, किसी तरह की गलती ठीक कराने का काम चालू हो गया है। जिला प्रशासन का दावा है कि बीएलओ घर-घर जाकर वोटर लिस्ट का सत्यापन करेंगे। वह नए वोटर बनने और मतदाता सूची से नाम हटाने के फार्म बांटेंगे। बाद में उन्हें इकट्ठा कर ईआरओ (इलेक्ट्रोरल इलेक्शन आफीसर) को भेजेंगे। जिले में 3536 बीएलओ हैं। इनके काम की निगरानी के लिए 32 सुपरवाइजर लगाए गए हैं।
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हर सुपरवाइजर को दस-दस बूथ दिए गए हैं। अमूमन शिकायतें मिलती रहती हैं कि बीएलओ घर-घर न जाकर बूथ या अन्य किसी स्थान पर बैठकर लोगों से बातचीत के आधार पर वोटर लिस्ट का सत्यापन करते हैं। शुक्रवार को पुनरीक्षण अभियान का पहला दिन था। अमर उजाला की टीमों ने कुछ बूथों पर जाकर देखा कि बीएलओ मतदान केंद्र पर बैठकर ही वोटर लिस्ट का सत्यापन तो नहीं कर रहे हैं। विजय नगर, कल्याणपुर, नारायणी धर्मशाला परेड, प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय हमीरपुर रोड, कर्मयोगी विद्या मंदिर बर्रा छह में बीएलओ नहीं मिले।
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सहायक उप जिला निर्वाचन अधिकारी कमल किशोर का कहना है कि हर बूथ पर ज्यादा से ज्यादा 1300 वोटर हैं। इस तरह हर बीएलओ के हिस्से में करीब ढाई सौ घर आते हैं। बीएलओ के पास एक माह का समय है। इसलिए घर-घर पहुंचकर सत्यापन कर लेंगे। तीन-चार दिन बाद सुपरवाइजर बीएलओ की मानीटरिंग चालू कर उनके काम की जानकारी लेने लगेंगे। सत्यापन न करने वाले बीएलओ मानीटरिंग में सामने आ जाएंगे। इसके बाद उन पर कार्रवाई होगी।