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भाजपा ने मदरसे की जमीन से जीता समूचा बुंदेलखंड
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Sun, 12 Mar 2017 05:59 PM IST
सार
लोगों को भाया मोदी के विकास बोर्ड का वादा
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विस्तार
मोदी लहर में शनिवार को मतगणना में तीनों सीटें भाजपा की झोली में आईं तो एक बार लोगों के जेहन में फिर से प्रधानमंत्री मोदी की वह आवाज काय भैया, कैसे हो, का चल रहा है गूंज उठा। इसी उरई सीट पर मोदी ने मदरसे के मैदान से सिर्फ जनपद ही नहीं, बल्कि समूचे बुंदेलखंड की बदहाली को लाखों की भीड़ के सामने आईना दिखाया था। फिर वो चाहे बुंदेलखंड की पानी समस्या हो या फिर अन्ना जानवरों का खौफ या फिर भ्रष्टाचार का पिटारा बना अवैध खनन क्यों न हो। कोई ऐसी समस्या नहीं थीं, जिससे मोदी ने उठाते हुए बुंदेलखंडियों के दिलों को न छुआ हो।
इतना ही नहीं, मोदी ने मदरसा मैदान के मंच से ही बुंदेलखंड विकास बोर्ड बनाने का न सिर्फ वायदा ही किया बल्कि सरकार बनने पर पहली बैठक में उसे पास कराने की बात कही थी । प्रधानमंत्री के यही शब्द शनिवार को ईवीएम से वोटों की शक्ल में जब सामने आए तो सभी हैरत में पड़ गए। केवल जनपद जालौन ही नहीं बल्कि समूचे बुंदेलखंड में भाजपा का परचम लहराने की एक मात्र वजह 20 फरवरी को उरई में हुई मोदी की रैली को ही माना जा रहा है।
तीन चरणों के चुनाव के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चौथे चरण के चुनाव में उतरने की मुहिम जालौन जिले से ही शुरू की। बांदा, चित्रकूट, महोबा, झांसी, ललितपुर जैसे दिग्गज राजनीतिज्ञों के जिलों को छोड़कर प्रधानमंत्री ने उरई के मदरसा ग्राउंड से ही समूचे बुंदेलखंड को मथने की रणनीति बनाई। उनकी यह रणनीति काम भी आई और 20 फरवरी को जब मोदी ने मदरसे का मंच संभाला तो सामने जनसैलाब देख उनके मुंह से भी यही निकला था कि परिवर्तन की आंधी सामने दिखाई दे रही है।
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इसके बाद उन्होंने बुंदेलखंडी शब्द बोलकर जनसैलाब के दिलों को जीता। उनका विजयी अभियान यहीं नहीं रुका, अन्य विरोधियों की तरह उन्होंने सिर्फ दूसरे दलों पर निशाना ही नहीं साधा बल्कि प्रधानमंत्री ने बुंदेलखंड की समस्याओं को भी पुरजोर तरीके से उठाया। अवैध खनन की रोकथाम के लिए सेटेलाइट का इस्तेमाल करने, आत्महत्या को मजबूर होने वाले किसानों, मजदूरों और मध्यम वर्ग के लोगों के लिए विकास बोर्ड का गठन की बात कर उन्होंने जता दिया कि यदि केंद्र की तरह प्रदेश में भाजपा आई तो फिर दोनों सरकारें बनकर विकास की ऐसी गंगा, यमुना बहाएगी कि यहां के लोगों का अच्छे दिनों का इंतजार खत्म हो जाएगा। मोदी की सबसे बड़ी बात जो मतदाताओं के दिलों को छुई, वो थी कि सपा, बसपा व कांग्रेस कोई भी दल बुंदेलखंड के लोगों को तवज्जो नहीं देता। उन्हें वोट बैंक मानकर जेब में ही रखा जाता था। इन बातों का ही एहसास था कि ईवीएम से जब वोटों की बौछार हुई थी तो हर सीट पर कमल ही कमल नजर आ रहा था। जालौन की बौछार समूचे बुंदेलखंड पर वोटों की बारिश बनकर बरसी।
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इतना ही नहीं, मोदी ने मदरसा मैदान के मंच से ही बुंदेलखंड विकास बोर्ड बनाने का न सिर्फ वायदा ही किया बल्कि सरकार बनने पर पहली बैठक में उसे पास कराने की बात कही थी । प्रधानमंत्री के यही शब्द शनिवार को ईवीएम से वोटों की शक्ल में जब सामने आए तो सभी हैरत में पड़ गए। केवल जनपद जालौन ही नहीं बल्कि समूचे बुंदेलखंड में भाजपा का परचम लहराने की एक मात्र वजह 20 फरवरी को उरई में हुई मोदी की रैली को ही माना जा रहा है।
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तीन चरणों के चुनाव के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चौथे चरण के चुनाव में उतरने की मुहिम जालौन जिले से ही शुरू की। बांदा, चित्रकूट, महोबा, झांसी, ललितपुर जैसे दिग्गज राजनीतिज्ञों के जिलों को छोड़कर प्रधानमंत्री ने उरई के मदरसा ग्राउंड से ही समूचे बुंदेलखंड को मथने की रणनीति बनाई। उनकी यह रणनीति काम भी आई और 20 फरवरी को जब मोदी ने मदरसे का मंच संभाला तो सामने जनसैलाब देख उनके मुंह से भी यही निकला था कि परिवर्तन की आंधी सामने दिखाई दे रही है।
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इसके बाद उन्होंने बुंदेलखंडी शब्द बोलकर जनसैलाब के दिलों को जीता। उनका विजयी अभियान यहीं नहीं रुका, अन्य विरोधियों की तरह उन्होंने सिर्फ दूसरे दलों पर निशाना ही नहीं साधा बल्कि प्रधानमंत्री ने बुंदेलखंड की समस्याओं को भी पुरजोर तरीके से उठाया। अवैध खनन की रोकथाम के लिए सेटेलाइट का इस्तेमाल करने, आत्महत्या को मजबूर होने वाले किसानों, मजदूरों और मध्यम वर्ग के लोगों के लिए विकास बोर्ड का गठन की बात कर उन्होंने जता दिया कि यदि केंद्र की तरह प्रदेश में भाजपा आई तो फिर दोनों सरकारें बनकर विकास की ऐसी गंगा, यमुना बहाएगी कि यहां के लोगों का अच्छे दिनों का इंतजार खत्म हो जाएगा। मोदी की सबसे बड़ी बात जो मतदाताओं के दिलों को छुई, वो थी कि सपा, बसपा व कांग्रेस कोई भी दल बुंदेलखंड के लोगों को तवज्जो नहीं देता। उन्हें वोट बैंक मानकर जेब में ही रखा जाता था। इन बातों का ही एहसास था कि ईवीएम से जब वोटों की बौछार हुई थी तो हर सीट पर कमल ही कमल नजर आ रहा था। जालौन की बौछार समूचे बुंदेलखंड पर वोटों की बारिश बनकर बरसी।