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भाजपा नेता पन्ना लाल तांबे का निधन, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के रहे करीबी
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Updated Sat, 11 Aug 2018 12:32 AM IST
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कानपुरः भाजपा के कद्दावर नेता और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के करीबी मित्रों में से एक पन्नालाल तांबे का शुक्रवार देर शाम निधन हो गया। वह 85 वर्ष के थे। बृहस्पतिवार को उन्हें उर्सला अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। पिछले तीन वर्षो से वह बीमार चले रहे थे।
पन्नालाल तांबे के बेटे कृष्णालाल तांबे ने बताया कि उनका जन्म रायपुरवा में हुआ था। जहां उनका जन्म हुआ उस जगह को पन्नालाल का हाथा कहा जाता है। उनकी शुरुआती शिक्षा आगनबाड़ी में हुई थी। इसके बाद उन्होंने आचार्य नगर स्थित भारतीय विद्यालय महेशचंद्र चौधरी से इंटर की पढ़ाई की थी। उन्होंने डीएवी डिग्री कॉलेज से बीएड किया। यहीं पर पन्नालाल की मुलाकात पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से हुई। पन्नालाल स्वभाव से मृदुभाषी थे तो जल्द ही उनकी अटल जी के साथ पटरी खाने लगी। दोनों के राजनीतिक करियर की शुरुआत यहीं से हुई थी।
जब इंदिरा गांधी ने देश में आपात काल लागू किया उस समय पन्नालाल तांबे और अटल जी साथ में ही जेल गए थे। जब दोनों जेल से छूटे तो जनसंघ से जुड़ गए। उस समय भाजपा का चुनावचिन्ह दीपक हुआ करता था। जेल से छूटने के बाद दलित समाज में पन्नालाल की छवि और निखर कर सामने आई। भाजपा नेता अनूप अवस्थी ने बताया कि 1977 में वो एमएलसी रहे। जब 1998 में पूर्ण बहुमत से भाजपा की सरकार बनी और अटलबिहारी बाजपेई बने तो 1999 में इन्हें राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। यह सफाई आयोग के उपाध्यक्ष पद पर भी रहे। अनूप अवस्थी ने बताया कि ये संघ के कट्टर समर्थक थे। मोहन भागवत जब शहर आए थे तो उन्होंने तांबे से मुलाकात की थी।
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2014 में हो गई थी पत्नी की मृत्यु
पन्नालाल तांबे पिछले तीन वर्षो से बीमार चल रहे थे। उनकी पत्नी शीला तांबे की मृत्यु 2014 में हो गई थी। तांबे केतीन बेटों में से दो की असमय मृत्यु हो गई थी। सबसे छोटा बेटा कृष्णकुमार तांबे नगर निगम में सफाई कर्मचारी के पद पर तैनात है। इन्होंने प्रेमलता तांबे को गोद लिया था। प्रेमलता का बेटा अभय और बेटी स्नेहा का पालनपोषण पन्नालाल तांबे ने ही किया था।
दलितों के बड़े नेता थे तांबे
पन्नालाल तांबे दलितों के बड़े नेता थे। जब अटल बिहारी बाजपेई ने इन्हें राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग का अध्यक्ष बनाया तो वाल्मीकि समाज में इनकी छवि उभर कर सामने आई। दलित नेता होने के चलते हमेशा से इन्हें पार्टी में अच्छे पद मिले। पन्नालाल तांबे की गिनती भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में होती है।
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पन्नालाल तांबे के बेटे कृष्णालाल तांबे ने बताया कि उनका जन्म रायपुरवा में हुआ था। जहां उनका जन्म हुआ उस जगह को पन्नालाल का हाथा कहा जाता है। उनकी शुरुआती शिक्षा आगनबाड़ी में हुई थी। इसके बाद उन्होंने आचार्य नगर स्थित भारतीय विद्यालय महेशचंद्र चौधरी से इंटर की पढ़ाई की थी। उन्होंने डीएवी डिग्री कॉलेज से बीएड किया। यहीं पर पन्नालाल की मुलाकात पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से हुई। पन्नालाल स्वभाव से मृदुभाषी थे तो जल्द ही उनकी अटल जी के साथ पटरी खाने लगी। दोनों के राजनीतिक करियर की शुरुआत यहीं से हुई थी।
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जब इंदिरा गांधी ने देश में आपात काल लागू किया उस समय पन्नालाल तांबे और अटल जी साथ में ही जेल गए थे। जब दोनों जेल से छूटे तो जनसंघ से जुड़ गए। उस समय भाजपा का चुनावचिन्ह दीपक हुआ करता था। जेल से छूटने के बाद दलित समाज में पन्नालाल की छवि और निखर कर सामने आई। भाजपा नेता अनूप अवस्थी ने बताया कि 1977 में वो एमएलसी रहे। जब 1998 में पूर्ण बहुमत से भाजपा की सरकार बनी और अटलबिहारी बाजपेई बने तो 1999 में इन्हें राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। यह सफाई आयोग के उपाध्यक्ष पद पर भी रहे। अनूप अवस्थी ने बताया कि ये संघ के कट्टर समर्थक थे। मोहन भागवत जब शहर आए थे तो उन्होंने तांबे से मुलाकात की थी।
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2014 में हो गई थी पत्नी की मृत्यु
पन्नालाल तांबे पिछले तीन वर्षो से बीमार चल रहे थे। उनकी पत्नी शीला तांबे की मृत्यु 2014 में हो गई थी। तांबे केतीन बेटों में से दो की असमय मृत्यु हो गई थी। सबसे छोटा बेटा कृष्णकुमार तांबे नगर निगम में सफाई कर्मचारी के पद पर तैनात है। इन्होंने प्रेमलता तांबे को गोद लिया था। प्रेमलता का बेटा अभय और बेटी स्नेहा का पालनपोषण पन्नालाल तांबे ने ही किया था।
दलितों के बड़े नेता थे तांबे
पन्नालाल तांबे दलितों के बड़े नेता थे। जब अटल बिहारी बाजपेई ने इन्हें राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग का अध्यक्ष बनाया तो वाल्मीकि समाज में इनकी छवि उभर कर सामने आई। दलित नेता होने के चलते हमेशा से इन्हें पार्टी में अच्छे पद मिले। पन्नालाल तांबे की गिनती भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में होती है।