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Bilhaur Election Result: विकास दुबे कांड के बाद ब्राह्मणों की नाराजगी का खूब हुआ था प्रचार, विपक्षियों का शिगूफा फेल, खिल उठा कमल

Fri, 11 Mar 2022 07:12 PM IST
शिखा पांडेय राहुल त्रिपाठी, अमर उजाला, कानपुर
राहुल त्रिपाठी, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Fri, 11 Mar 2022 07:12 PM IST
सार

विपक्षियों के एड़ी-चोटी का जोर लगाने के बाद भी भाजपा की सबका साथ-सबका विकास नीति लोगों के मन को भाई। नतीजा यह रहा कि बिल्हौर विधानसभा क्षेत्र में फिर कमल खिला। 

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Bilhaur Election Result 2022: Bilhaur Vidhan Sabha Seats Result
बिल्हौर में भाजपा की जीत पर बुलडोजर से घूमते भाजपाई - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बिल्हौर विधानसभा क्षेत्र के चौबेपुर के बिकरू गांव में वर्ष 2020 में आठ पुलिस कर्मियों की हत्या के बाद कुख्यात विकास दुबे को एनकाउंटर में मौत के घाट उतारने के बाद ब्राह्मणों की नाराजगी का शिगूफा व 2017 के चुनाव में भाजपा के टिकट पर चुनाव जीतने वाले भगवती सागर के पार्टी छोड़ने का रत्ती भर भी असर नहीं दिखा।
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विपक्षियों के एड़ी-चोटी का जोर लगाने के बाद भी भाजपा की सबका साथ-सबका विकास नीति लोगों के मन को भाई। नतीजा यह रहा कि बिल्हौर विधानसभा क्षेत्र में फिर कमल खिला। कुख्यात विकास दुबे कांड के बाद भाजपा से ब्राह्मणों के नाराज होने का माहौल बनाया गया।
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विरोधी दलों ने अपने-अपने ढंग से परिभाषित कर इसका जमकर प्रचार भी किया। लेकिन चौबेपुर और शिवराजपुर के ब्राह्मण बाहुल्य वाले गांवों में इसका कुछ असर नहीं दिखा। योगी आदित्यनाथ की नीतियों कब्जा की गई सरकारी भूमि पर बुलडोजर चलाकर खाली कराने, अपराधियों पर ठोको नीति, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों से वसूली और सबका साथ-सबका विकास की योजना भी लोगों के मन को भा गई है।
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परिणाम यह रहा कि भाजपा के राहुल बच्चा सोनकर ने जीत हासिल कर कमल खिलाया। खास बात यह रही कि विपक्षियों के तमाम जतन के बाद भी यहां न तो सपा की साइकिल रफ्तार पकड़ी सकी और नहीं बसपा का हाथी चिघाड़ सका। कांग्रेस का हाथ भी मतदाताओं को अपनी ओर बुलाने का इशारा नहीं कर सका। 2017 में बिल्हौर से भाजपा के टिकट पर जीतने वाले भगवती सागर के पार्टी छोड़ने का असर भी कहीं नहीं दिखा।

 

चुनाव में कुशल प्रबंधन, बूथ-बूथ और घर-घर पन्ना प्रमुखों की पकड़ भाजपा की जीत का आधार बना। जबकि सपा के कानपुर ग्रामीण संगठन में फूट, चुनाव प्रबंधन का कुप्रभाव, प्रत्याशी की अनुभव हीनता का खामियाजा उठाना पड़ा। वहीं बसपा के आलाकमान द्वारा चुनाव से ठीक पहले प्रत्याशी बदलने और बाहरी प्रत्याशी को क्षेत्रीय चोला पहनाकर मैदान में उतारना पार्टी पदाधिकारियों और समर्थकों को कतई नहीं भाया।

कांग्रेस और आम आदमी पार्टी भी सीमित वोटों पर ही सिमट कर रह गई। मालूम हो कि 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के भगवती प्रसाद सागर 1,02,326 वोट पाकर विजयी हुए थे। बसपा के कमलेश चंद्र 71,160 वोट और सपा के शिव कुमार बेरिया 60,023 वोट पाकर क्रमश दूसरे व तीसरे स्थान पर रहे थे।
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