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बिकरू कांड: विकास दुबे से संबंध रखने वाले एक और अधिकारी पर गिरी गाज, एसआईटी ने पाया था दोषी
Tue, 29 Dec 2020 03:41 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Tue, 29 Dec 2020 03:41 PM IST
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विकास दुबे कांड: शहीद डीएसपी देवेंद्र मिश्रा, जय बाजपेई
- फोटो : amar ujala
बिकरू कांड में सीओ बिल्हौर सहित आठ पुलिसकर्मियों की हत्या के बाद पुलिस मुठभेड़ में मारे गए शातिर अपराधी विकास दुबे से संबंध रखने वाले एक और अधिकारी पर निलंबन की गाज गिरी है। बिकरू कांड में दोषी पाए गए चौबेपुर के खंड विकास अधिकारी ( बीडीओ) आलोक पांडेय को प्रमुख सचिव ग्राम विकास मनोज कुमार सिंह ने निलंबित कर दिया है।
आलोक के विरुद्ध एसआईटी ने कार्रवाई की संस्तुति की थी। आलोक पांडेय के पास शिवराजपुर ब्लाक का भी प्रभार था। विकास दुबे बिकरू गांव का रहने वाला था। आस-पास के गांव में उसका जबरदस्त प्रभाव था। वह जिसे चाहता उसे ही राशन की दुकान आवंटित होती।
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आलोक के विरुद्ध एसआईटी ने कार्रवाई की संस्तुति की थी। आलोक पांडेय के पास शिवराजपुर ब्लाक का भी प्रभार था। विकास दुबे बिकरू गांव का रहने वाला था। आस-पास के गांव में उसका जबरदस्त प्रभाव था। वह जिसे चाहता उसे ही राशन की दुकान आवंटित होती।
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विकास दुबे कांड
- फोटो : amar ujala
जिस काम के लिए वह कहता वही विकास कार्य संबंधित गांव में होता था। आरोप है कि आलोक पांडे विकास दुबे से लगातार संपर्क में थे और विकास के कहने पर ही बिकरू और क्षेत्र के गांव में मनरेगा योजना, राज्य वित्त, 13 वित्त से काम करते थे।
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत किसे आवाज देना है यह भी विकास दुबे के कहने पर ही तय होता था। एसआईटी ने अपनी जांच में पाया कि आलोक पांडे लगातार विकास दुबे के संपर्क में थे और उसकी मनमानी में साथ देते थे और अनुचित लाभ भी उठाते थे। जांच रिपोर्ट एसआईटी ने शासन को सौंपी दी।
वहां से कार्यवाई के लिए कहा गया इसके बाद प्रतिकूल प्रविष्टि देने और कारण बताओ नोटिस दिए जाने की प्रक्रिया शुरू की गई लेकिन शासन ने आलोक पांडे पर लगे आरोपों को गंभीर माना और मुख्यमंत्री के आदेश पर आलोक पांडे को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। सीडीओ डॉक्टर महेंद्र कुमार ने निलंबन की पुष्टि की है।
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत किसे आवाज देना है यह भी विकास दुबे के कहने पर ही तय होता था। एसआईटी ने अपनी जांच में पाया कि आलोक पांडे लगातार विकास दुबे के संपर्क में थे और उसकी मनमानी में साथ देते थे और अनुचित लाभ भी उठाते थे। जांच रिपोर्ट एसआईटी ने शासन को सौंपी दी।
वहां से कार्यवाई के लिए कहा गया इसके बाद प्रतिकूल प्रविष्टि देने और कारण बताओ नोटिस दिए जाने की प्रक्रिया शुरू की गई लेकिन शासन ने आलोक पांडे पर लगे आरोपों को गंभीर माना और मुख्यमंत्री के आदेश पर आलोक पांडे को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। सीडीओ डॉक्टर महेंद्र कुमार ने निलंबन की पुष्टि की है।