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Kanpur News: नंदी के कान में मांगी मन्नत भारेश्वर महादेव करते पूरी
Mon, 29 Jul 2024 02:32 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Mon, 29 Jul 2024 02:32 AM IST
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सावन सोमवार विशेष
फोटो 19::चंबल और यमुना के संगम पर स्थित भारेश्वर महादेव का मंदिर। संवाद
फोटो 20::भारेश्वर महादेव की प्रतिमा। संवाद
चंबल व यमुना के संगम पर स्थित भारेश्वर महादेव मंदिर पर सावन में बड़ी संख्या में आते हैं शिवभक्त
संवाद न्यूज एजेंसी
चकरनगर। क्षेत्र के यमुना चंबल संगम पर स्थित भारेश्वर महादेव मंदिर प्राचीन काल से तपोस्थली रहा है। सावन माह में भारेश्वर मंदिर पर प्रदेश सहित मप्र, दिल्ली, हरियाणा के जनपदों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
मान्यता है कि इस मंदिर में भीम ने भगवान भोलेनाथ की शिवलिंग की स्थापना की थी। अज्ञातवास के दौरान चकरनगर में बकासुर का वध करने के बाद उन्होंने छिपने के उद्देश्य से भरेह में चंबल व यमुना नदी किनारे जंगल में ठहरने के दौरान माता कुंती के पूजा-अर्चना के लिए की थी।
भारेश्वर महादेव मंदिर के पुजारी चंबल गिरि महाराज ने बताया कि मान्यता के अनुसार सावन माह में जो भक्त भगवान भोले नाथ की पूजा करके बाहर नंदी के कान में जो भी मनोकामना मांगता है, वह शीघ्र ही पूरी हो जाती है।
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बताया कि एक बार राजस्थान के बड़े व्यापारी मदन सेठ राजस्थान से बिहार, पटना, कोलकाता नौका से सामान लेकर व्यापार करने जा रहे थे। इस दौरान यमुना व चंबल के भंवर में अचानक उनकी नौका फंस गई। जिसे भगवान भारेश्वर ने बचाया था।लोगों का कहना है कि मंदिर के पास राजा भरेह के जर्जर किला का जीर्णोद्धार किया जाए तो यह स्थान सैलानियों के लिए पर्यटन का बड़ा केंद्र बन सकता है।
तीन करोड़ से हो रहा सुंदरीकरण
ऐतिहासिक भारेश्वर मंदिर का तीन करोड़ रुपये की लागत से सुंदरीकरण कराया जा रहा है। इसमें मंदिर की दीवारें, सार्वजनिक शौचालय, संगीत हाल, श्रद्धालु आवास और संगमरमर सहित रंगाई-पुताई के कार्य कराए जा रहे है।
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फोटो 19::चंबल और यमुना के संगम पर स्थित भारेश्वर महादेव का मंदिर। संवाद
फोटो 20::भारेश्वर महादेव की प्रतिमा। संवाद
चंबल व यमुना के संगम पर स्थित भारेश्वर महादेव मंदिर पर सावन में बड़ी संख्या में आते हैं शिवभक्त
संवाद न्यूज एजेंसी
चकरनगर। क्षेत्र के यमुना चंबल संगम पर स्थित भारेश्वर महादेव मंदिर प्राचीन काल से तपोस्थली रहा है। सावन माह में भारेश्वर मंदिर पर प्रदेश सहित मप्र, दिल्ली, हरियाणा के जनपदों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
मान्यता है कि इस मंदिर में भीम ने भगवान भोलेनाथ की शिवलिंग की स्थापना की थी। अज्ञातवास के दौरान चकरनगर में बकासुर का वध करने के बाद उन्होंने छिपने के उद्देश्य से भरेह में चंबल व यमुना नदी किनारे जंगल में ठहरने के दौरान माता कुंती के पूजा-अर्चना के लिए की थी।
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भारेश्वर महादेव मंदिर के पुजारी चंबल गिरि महाराज ने बताया कि मान्यता के अनुसार सावन माह में जो भक्त भगवान भोले नाथ की पूजा करके बाहर नंदी के कान में जो भी मनोकामना मांगता है, वह शीघ्र ही पूरी हो जाती है।
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बताया कि एक बार राजस्थान के बड़े व्यापारी मदन सेठ राजस्थान से बिहार, पटना, कोलकाता नौका से सामान लेकर व्यापार करने जा रहे थे। इस दौरान यमुना व चंबल के भंवर में अचानक उनकी नौका फंस गई। जिसे भगवान भारेश्वर ने बचाया था।लोगों का कहना है कि मंदिर के पास राजा भरेह के जर्जर किला का जीर्णोद्धार किया जाए तो यह स्थान सैलानियों के लिए पर्यटन का बड़ा केंद्र बन सकता है।
तीन करोड़ से हो रहा सुंदरीकरण
ऐतिहासिक भारेश्वर मंदिर का तीन करोड़ रुपये की लागत से सुंदरीकरण कराया जा रहा है। इसमें मंदिर की दीवारें, सार्वजनिक शौचालय, संगीत हाल, श्रद्धालु आवास और संगमरमर सहित रंगाई-पुताई के कार्य कराए जा रहे है।