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भारतरत्न अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा का हुआ अनावरण, स्वतंत्र देव और हृदय नारायण दीक्षित रहे मौजूद
Tue, 24 Dec 2019 10:49 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उन्नाव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उन्नाव
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Tue, 24 Dec 2019 10:49 PM IST
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भाजपा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह
- फोटो : अमर उजाला
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उन्नाव के नवाबगंज में भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर मंगलवार को ब्लाक मुख्यालय परिसर में नवनिर्मित अटल द्वार के साथ ही अटल पुस्तकालय का लोकार्पण भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह व विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने किया।
बाद में पुस्तकालय परिसर में ही लगाई गई अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा का अनावरण किया गया। कार्यक्रम में पहुंचे लगभग एक दर्जन नेताओं ने अटलजी से जुड़े पुराने संस्मरणों को साझा किया। सभी नेताओं ने मुख्यालय परिसर में बने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्मारक पर पुष्प अर्पितकर श्रद्धांजलि दी।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह ने कहा कि देश की राजनिति के महान पुरोधा अटल बिहारी वाजपेयी ने हमेशा साफ सुथरी राजनीति की। राजनीति करने वाली भावी पीढ़ी को उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए। विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने अटलजी से जुड़े संस्मरणों को साझा करते हुए कहा कि जब मैने पासपोर्ट के लिए आवेदन किया था, तब किन्ही कारणों वश पासपोर्ट नहीं बन पाया था।
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इससे नाराज होकर आवेश में मैने उन्हें पत्र लिखकर शिकायत की थी। जिसके जवाब में अटलजी की जब चिट्ठी आई तो उसमें लिखा था कि प्रिय दीक्षित जी आप लेटर में तारीख लिखना भूल गए हैं। एक अन्य किस्सा सुनाते हुए भावुक हुए विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि एक बैठक में अटलजी के साथ बैठे थे। एक फोन आने पर मैं उठकर चला गया। इसी बीच खाली कुर्सी पर एक अन्य नेता आकर बैठ गए। तब उन्होंने कहा कि दीक्षित जी कुर्सी का खेल यही है। आप कुर्सी लेकर जाया करिए।
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बाद में पुस्तकालय परिसर में ही लगाई गई अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा का अनावरण किया गया। कार्यक्रम में पहुंचे लगभग एक दर्जन नेताओं ने अटलजी से जुड़े पुराने संस्मरणों को साझा किया। सभी नेताओं ने मुख्यालय परिसर में बने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्मारक पर पुष्प अर्पितकर श्रद्धांजलि दी।
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भाजपा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह ने कहा कि देश की राजनिति के महान पुरोधा अटल बिहारी वाजपेयी ने हमेशा साफ सुथरी राजनीति की। राजनीति करने वाली भावी पीढ़ी को उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए। विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने अटलजी से जुड़े संस्मरणों को साझा करते हुए कहा कि जब मैने पासपोर्ट के लिए आवेदन किया था, तब किन्ही कारणों वश पासपोर्ट नहीं बन पाया था।
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इससे नाराज होकर आवेश में मैने उन्हें पत्र लिखकर शिकायत की थी। जिसके जवाब में अटलजी की जब चिट्ठी आई तो उसमें लिखा था कि प्रिय दीक्षित जी आप लेटर में तारीख लिखना भूल गए हैं। एक अन्य किस्सा सुनाते हुए भावुक हुए विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि एक बैठक में अटलजी के साथ बैठे थे। एक फोन आने पर मैं उठकर चला गया। इसी बीच खाली कुर्सी पर एक अन्य नेता आकर बैठ गए। तब उन्होंने कहा कि दीक्षित जी कुर्सी का खेल यही है। आप कुर्सी लेकर जाया करिए।