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बेहमई कांड : पुराने प्रार्थना पत्र निरस्त
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कानपुर देहात। माती स्थित एंटी डकैती कोर्ट में मंगलवार को बेहमई कांड की सुनवाई हुई। बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने पिछली तारीख में कोर्ट में पुराने प्रार्थना पत्र लंबित होने की बात रखी थी। कोर्ट ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान पुराने प्रार्थना पत्र निरस्त कर दिए, साथ ही उनके निस्तारण का कोई औचित्य नहीं पाया। अब बहस के लिए सात सितंबर की तिथि तय की है।
बेहमई कांड की सुनवाई माती स्थित एंटी डकैती कोर्ट सुधाकर राय की अदालत में हो रही है। 16 अगस्त को बचाव पक्ष के अधिवक्ता गिरीश नारायन दुबे ने कोर्ट को बताया कि वर्ष 2012 में आरोपी राम सिंह की तरफ से केस डायरी की नकल मांगी गई थी। इस प्रार्थना पत्र का अभी तक निस्तारण नहीं हो सका। केस डायरी की नकल भी नहीं मिली है।
वहीं 5 सितंबर 2007 को इस घटना में आरोप पत्र बन चुका है। इसके बाद फिर दोबारा आरोप निर्धारित होने पर आपत्ति की गई थी। इन पत्रों के निस्तारण न होने का मुद्दा रखा था। कोर्ट ने मंगलवार को इन प्रार्थना पत्रों को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने कहा कि मामले में बहस पूरी हो चुकी है अब पुराने प्रार्थना पत्रों का कोई औचित्य नहीं है।
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साथ ही आरोप निर्धारण को लेकर बहस के लिए 7 सितंबर की तिथि तय की है। जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी राजू पोरवाल ने बताया कि अब सात सितंबर को बहस होगी। सुनवाई के दौरान कोर्ट में भीखा व श्यामबाबू कोर्ट में उपस्थित रहे। जेल में बंद पोसा को नहीं लाया गया।
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बेहमई कांड की सुनवाई माती स्थित एंटी डकैती कोर्ट सुधाकर राय की अदालत में हो रही है। 16 अगस्त को बचाव पक्ष के अधिवक्ता गिरीश नारायन दुबे ने कोर्ट को बताया कि वर्ष 2012 में आरोपी राम सिंह की तरफ से केस डायरी की नकल मांगी गई थी। इस प्रार्थना पत्र का अभी तक निस्तारण नहीं हो सका। केस डायरी की नकल भी नहीं मिली है।
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वहीं 5 सितंबर 2007 को इस घटना में आरोप पत्र बन चुका है। इसके बाद फिर दोबारा आरोप निर्धारित होने पर आपत्ति की गई थी। इन पत्रों के निस्तारण न होने का मुद्दा रखा था। कोर्ट ने मंगलवार को इन प्रार्थना पत्रों को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने कहा कि मामले में बहस पूरी हो चुकी है अब पुराने प्रार्थना पत्रों का कोई औचित्य नहीं है।
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साथ ही आरोप निर्धारण को लेकर बहस के लिए 7 सितंबर की तिथि तय की है। जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी राजू पोरवाल ने बताया कि अब सात सितंबर को बहस होगी। सुनवाई के दौरान कोर्ट में भीखा व श्यामबाबू कोर्ट में उपस्थित रहे। जेल में बंद पोसा को नहीं लाया गया।