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Kanpur: BCCI चेयरमैन अमीश साहेबा बोले- आधुनिक क्रिकेट में अंपायर को भी रहना होगा अपडेट
Thu, 20 Jul 2023 07:13 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Thu, 20 Jul 2023 07:13 PM IST
सार
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड इन इंडिया (बीसीसीआई) के चेयरमैन अमीश साहेबा इन दिनों कानपुर में हैं। वह कमला क्लब में दस दिवसीय स्कोरर व अंपायरिंग कार्यशाला में ट्रेनिंग दे रहे हैं। प्रस्तुत है उनसे हुई बात के प्रमुख अंश...
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बीसीसीआई के चेयरमैन अमीश साहेबा
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
वर्तमान में आधुनिक क्रिकेट में काफी बदलाव हो रहा है। ऐसे में अंपायरों को भी अपने को अपडेट करना बेहद जरूरी है। वर्तमान में क्रिकेट में नए नियम, बदलाव व टेक्नोलॉजी के आने से अंपायरों का काम भी बढ़ा है। ये बात भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड इन इंडिया (बीसीसीआई) के चेयरमैन अमीश साहेबा ने कही। वह जरीब चौकी स्थित कमला क्लब में दस दिवसीय स्कोरर व अंपायरिंग कार्यशाला में ट्रेनिंग दे रहे हैं।
1- डीआरएस के आने से अंपायरों की भूमिका पर उठ रहे सवालों पर आपकी क्या राय है।
- क्रिकेट काफी हाईटेक हो गया है। ऐसे में कई बार अंपायर का एक फैसला पूरे मैच का निर्णय ही बदल देता है। ऐसे में डीआरएस की भूमिका बहुत ही महत्वपूर्ण है। इससे यदि अंपायर ने गलत भी निर्णय दिया है, तो खिलाड़ी डीआरएस का इस्तेमाल कर फैसले के बारे में जानकारी ले सकता है।
2- अंपायरों के लिए यह कार्यशाला कितनी महत्वपूर्ण साबित होगी।
- क्रिकेट के विकास के साथ-साथ अंपायरों व स्कोररों को भी बदलाव को स्वीकार करना चाहिए। ऐसे में एसोसिएशन की ओर से इस प्रकार की कार्यशाला साल में कई होनी चाहिए। सिर्फ एक 10 दिवसीय कार्यशाला से कुछ नहीं होता है।
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3- इस बार कार्यशाला में लड़कियां भी आई हैं।
- महिला क्रिकेट की तरह ही अब अंपायरिंग में भी लड़कियां काफी तेजी से आ रही है। अब अंपायर ही नहीं स्कारेर भी लड़कियां बन रही हैं। इस कार्यशाला में तीन अंपायर लड़कियां भी शामिल हैं जो मैनपुरी, गाजियाबाद व मुजफ्फरनगर से आई हैं।
4- कार्यशाला में कोई खास तरीका ट्रेनिंग का बताया जा रहा है।
- कार्यशाला कोतीन श्रेणियों में बांटा गया है। पहले श्रेणी में वीडियो दिखाकर चीजों को समझाया गया है। दूसरी श्रेणी में लिखित परीक्षा ली गई है और उनके अनुभव को देखा गया। तीसरी श्रेणी में मैदान पर प्रैक्टिकल भी लिया गया, इसमें मैदान पर अंपायर की गलतियों के बारे में बताया गया है।
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1- डीआरएस के आने से अंपायरों की भूमिका पर उठ रहे सवालों पर आपकी क्या राय है।
- क्रिकेट काफी हाईटेक हो गया है। ऐसे में कई बार अंपायर का एक फैसला पूरे मैच का निर्णय ही बदल देता है। ऐसे में डीआरएस की भूमिका बहुत ही महत्वपूर्ण है। इससे यदि अंपायर ने गलत भी निर्णय दिया है, तो खिलाड़ी डीआरएस का इस्तेमाल कर फैसले के बारे में जानकारी ले सकता है।
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2- अंपायरों के लिए यह कार्यशाला कितनी महत्वपूर्ण साबित होगी।
- क्रिकेट के विकास के साथ-साथ अंपायरों व स्कोररों को भी बदलाव को स्वीकार करना चाहिए। ऐसे में एसोसिएशन की ओर से इस प्रकार की कार्यशाला साल में कई होनी चाहिए। सिर्फ एक 10 दिवसीय कार्यशाला से कुछ नहीं होता है।
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3- इस बार कार्यशाला में लड़कियां भी आई हैं।
- महिला क्रिकेट की तरह ही अब अंपायरिंग में भी लड़कियां काफी तेजी से आ रही है। अब अंपायर ही नहीं स्कारेर भी लड़कियां बन रही हैं। इस कार्यशाला में तीन अंपायर लड़कियां भी शामिल हैं जो मैनपुरी, गाजियाबाद व मुजफ्फरनगर से आई हैं।
4- कार्यशाला में कोई खास तरीका ट्रेनिंग का बताया जा रहा है।
- कार्यशाला कोतीन श्रेणियों में बांटा गया है। पहले श्रेणी में वीडियो दिखाकर चीजों को समझाया गया है। दूसरी श्रेणी में लिखित परीक्षा ली गई है और उनके अनुभव को देखा गया। तीसरी श्रेणी में मैदान पर प्रैक्टिकल भी लिया गया, इसमें मैदान पर अंपायर की गलतियों के बारे में बताया गया है।