{"_id":"5f3eca1bffa72e6c6710bf5b","slug":"banda-muslims-gave-shoulder-to-hindu-man-after-death","type":"story","status":"publish","title_hn":"बांदा: हिंदू युवक की अर्थी को मुस्लिमों ने दिया कंधा, ढोल नगाड़े के साथ दी अंतिम विदाई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बांदा: हिंदू युवक की अर्थी को मुस्लिमों ने दिया कंधा, ढोल नगाड़े के साथ दी अंतिम विदाई
Fri, 21 Aug 2020 11:54 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांदा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांदा
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Fri, 21 Aug 2020 11:54 AM IST
विज्ञापन
बांदा: हिंदू युवक की अर्थी को मुस्लिमों ने दिया कंधा
- फोटो : amar ujala
बांदा में गुरुवार को एक अनोखी मिसाल देखने को मिली। यहां एक हिंदू युवक की मौत पर इलाके के मुस्लिमों ने भाईचारे की मिसाल पेश करते हुए उसकी अर्थी को कंधा दिया। इतना ही नहीं ढोल नगाड़े के साथ उसको अंतिम विदाई देकर एक गंगा जमुनी तहजीब की मिसाल पेश की।
माता-पिता का सिर से साया उठ जाने के बाद दादी और छोटे भाई के साथ जीवन बसर कर रहे युवक बंटी के अचानक निधन ने शहर के निम्नीपार स्थित कांशीराम कॉलोनी में सांप्रदायिक सौहार्द का नायाब नमूना पेश कर दिया। युवक के साथ दिन-रात रहने वाले मुस्लिमों ने उसे अंतिम समय में न सिर्फ कंधा दिया, बल्कि अंतिम संस्कार में भी अपना भरपूर सहयोग दिया।
शव यात्रा में हिंदू-मुस्लिम की भागीदारी बराबरी से रही। ऋषि वामदेव और बांदा नवाब की नगरी में इसके पूर्व भी विभिन्न प्रकार के सांप्रदायिक सौहार्द वाले उदाहरण सामने आते रहे हैं। इस समय जबकि कोरोना के चलते लोग अपने निकट संबंधियों के अंतिम यात्रा में शामिल होने से कतराते हैं, उसमें मुस्लिमों द्वारा भागीदारी किए जाने को सभी ने सराहा। युवक का अंतिम संस्कार राजघाट में हुआ। अंतिम संस्कार में महमूद खां व वकील खां सहित बड़ी संख्या में मुस्लिम शामिल रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
माता-पिता का सिर से साया उठ जाने के बाद दादी और छोटे भाई के साथ जीवन बसर कर रहे युवक बंटी के अचानक निधन ने शहर के निम्नीपार स्थित कांशीराम कॉलोनी में सांप्रदायिक सौहार्द का नायाब नमूना पेश कर दिया। युवक के साथ दिन-रात रहने वाले मुस्लिमों ने उसे अंतिम समय में न सिर्फ कंधा दिया, बल्कि अंतिम संस्कार में भी अपना भरपूर सहयोग दिया।
विज्ञापन
शव यात्रा में हिंदू-मुस्लिम की भागीदारी बराबरी से रही। ऋषि वामदेव और बांदा नवाब की नगरी में इसके पूर्व भी विभिन्न प्रकार के सांप्रदायिक सौहार्द वाले उदाहरण सामने आते रहे हैं। इस समय जबकि कोरोना के चलते लोग अपने निकट संबंधियों के अंतिम यात्रा में शामिल होने से कतराते हैं, उसमें मुस्लिमों द्वारा भागीदारी किए जाने को सभी ने सराहा। युवक का अंतिम संस्कार राजघाट में हुआ। अंतिम संस्कार में महमूद खां व वकील खां सहित बड़ी संख्या में मुस्लिम शामिल रहे।
विज्ञापन