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बांदा: अन्ना गायों को जिंदा दफन करवाने के मामले में नरैनी के अधिशासी अधिकारी निलंबित
Thu, 09 Dec 2021 12:28 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांदा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांदा
Published by: शिखा पांडेय
Updated Thu, 09 Dec 2021 12:28 PM IST
सार
गायों को रातों रात ठिकाने लगाने के लिए नगर पंचायत के अधिकारियों ने जेसीसी से खुदाई करवाकर उन्हें जंगल में दफन करवा दिया। अमर उजाला को यह सूचना पता चली तो इसे प्रमुखता से प्रकाशित किया गया। अगले दिन स्थानीय विधायक मौके पर पहुंचे तो कई जिंदा गायें दफन मिलीं।
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बांदा: अन्ना गायों को जिंदा दफन करवाने का मामला
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
अन्ना गायों को मध्यप्रदेश के जंगल में जिंदा दफन करवाने के मामले में शासन ने बुधवार को नरैनी नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी (ईओ) अमर बहादुर सिंह को निलंबित कर दिया है। अनुशासनात्मक और विभागीय कार्रवाई के आदेश भी दिए गए हैं।
उन्हें नगर निकाय निदेशालय लखनऊ में संबद्ध किया गया है। प्रदेश सरकार के नगर विकास अनुभाग के उप सचिव राजेंद्रमणि त्रिपाठी ने निलंबन का आदेश जारी किया। यह कार्रवाई डीएम की ओर से भेजी गई जांच रिपोर्ट के बाद की गई है।
दरअसल तीन दिसंबर की रात को नरैनी की मोतियारी मंडी में संचालित अस्थायी गोशाला से गोवंशों को कई ट्रकों में लादकर मध्यप्रदेश के पहाड़ी खेरा (पन्ना) के जंगलों में छोड़ा गया था। ट्रक में लादी गई कुछ गायें रास्ते में मर गई थीं, मगर कई गायें जिंदा थीं।
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गायों को रातों रात ठिकाने लगाने के लिए नगर पंचायत के अधिकारियों ने जेसीसी से खुदाई करवाकर उन्हें जंगल में दफन करवा दिया। अमर उजाला को यह सूचना पता चली तो इसे प्रमुखता से प्रकाशित किया गया। अगले दिन स्थानीय विधायक मौके पर पहुंचे तो कई जिंदा गायें दफन मिलीं। मामला तूल पकड़ने के बाद डीएम ने सीडीओ को जांच सौंपी। सीडीओ की जांच में नगर पंचायत के ईओ को दोषी पाया गया।
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उन्हें नगर निकाय निदेशालय लखनऊ में संबद्ध किया गया है। प्रदेश सरकार के नगर विकास अनुभाग के उप सचिव राजेंद्रमणि त्रिपाठी ने निलंबन का आदेश जारी किया। यह कार्रवाई डीएम की ओर से भेजी गई जांच रिपोर्ट के बाद की गई है।
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दरअसल तीन दिसंबर की रात को नरैनी की मोतियारी मंडी में संचालित अस्थायी गोशाला से गोवंशों को कई ट्रकों में लादकर मध्यप्रदेश के पहाड़ी खेरा (पन्ना) के जंगलों में छोड़ा गया था। ट्रक में लादी गई कुछ गायें रास्ते में मर गई थीं, मगर कई गायें जिंदा थीं।
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गायों को रातों रात ठिकाने लगाने के लिए नगर पंचायत के अधिकारियों ने जेसीसी से खुदाई करवाकर उन्हें जंगल में दफन करवा दिया। अमर उजाला को यह सूचना पता चली तो इसे प्रमुखता से प्रकाशित किया गया। अगले दिन स्थानीय विधायक मौके पर पहुंचे तो कई जिंदा गायें दफन मिलीं। मामला तूल पकड़ने के बाद डीएम ने सीडीओ को जांच सौंपी। सीडीओ की जांच में नगर पंचायत के ईओ को दोषी पाया गया।