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Kanpur News: घूसखोरी में जेल गए बाबू और जांच में फंसे चपरासी को कर दिया स्थायी

Sat, 29 Mar 2025 01:52 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 29 Mar 2025 01:52 AM IST
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Babu who went to jail for taking bribe and peon who was caught in investigation were made permanent
कानपुर। नगर निगम के अफसरों ने रिश्वतखोरी में गिरफ्तार बाबू और जांच में फंसे चपरासी को जांच पूरी हुए बिना ही स्थायी कर दिया। इतना ही नहीं बाबू की दोबारा ज्वाइनिंग भी करा दी गई। सूची जारी होते ही इसका खुलासा होने पर खलबली मच गई। मिलीभगत की आशंका पर नगर आयुक्त ने संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब करने के साथ ही दोनों का नाम स्थायीकरण सूची से हटाने के निर्देश दिए हैं।
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इंस्पेक्टर प्रदीप यादव के नेतृत्व में सतर्कता विभाग की टीम ने पिछले साल 24 अगस्त को अपर नगर आयुक्त (प्रथम) मोहम्मद आवेश खान के कार्यालय में कार्यरत बाबू राजेश यादव को घूस लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। पूछताछ में उसने कई अधिकारियों व बाबुओं के नामों का खुलासा किया था।
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आरोपी को कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया था। नगर आयुक्त ने अपर नगर आयुक्त तृतीय अमित कुमार भारतीय को मामले की जांच सौंपते हुए रिपोर्ट तलब की थी। जांच पूरी होने से पहले ही अमित कुमार भारतीय का तबादला वाराणसी हो गया।
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नगर निगम के लापरवाह अफसरों ने किसी अन्य अधिकारी को इस मामले की जांच नहीं सौंपी। उधर, जेल से छूटने के बाद राजेश यादव ने छह मार्च को नगर निगम में दोबारा पदभार ग्रहण कर लिया।

12 मार्च को प्रभारी अधिकारी (विद्या सागर यादव) की ओर से 223 कर्मचारियों के स्थायीकरण का आदेश जारी किया गया था। खास बात यह है कि स्थायीकरण की सूची में सातवें नंबर पर कनिष्ठ लिपिक राजेश यादव और 32 वें नंबर पर जोन छह के जोनल कार्यालय में चपरासी पद पर कार्यरत राजेश शुक्ला का नाम है।

राजेश की नियुक्ति आठ जुलाई 2022 को हुई थी, जबकि राजेश शुक्ला की नियुक्ति 16 दिसंबर 2002 में हुई थी। राजेश शुक्ल पर नशे में धुत्त होकर जोनल अधिकारी से अभद्रता करने के आरोप की जांच चल रही है।

हालांकि, वह ड्यूटी कर रहा है। वहीं, कार्मिक विभाग की तरफ से तैयार की गई स्थायीकरण की सूची में पांच ऐसे कर्मचारियों के नाम शामिल कर नगर आयुक्त सुधीर कुमार से अनुमोदित करा लिए गए, जिनका न्यायालय के आदेश पर पूर्व में ही स्थायीकरण हो चुका है।



राजेश यादव और राजेश शुक्ला का स्थायीकरण कैसे करा लिया गया, इसकी जांच होगी। संबंधित अधिकारियों से जवाब - तलब होगा। दोनों के नाम सूची से हटेंगे। - सुधीर कुमार, नगर आयुक्त
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