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Nazul Property Case: नाला सफाई घोटाले में भी अवनीश की फर्म शामिल, बगैर सफाई जारी करा लिए डेढ़ करोड़

Wed, 21 Aug 2024 08:55 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Wed, 21 Aug 2024 08:55 AM IST
सार

Kanpur News: नाला सफाई घोटाले के मामले में विवेचक की ओर से पत्राचार करने के बाद भी नगर निगम घोटाले से जुड़ी फाइल नहीं दे रहा है। पुलिस कमिश्नर ने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर मजिस्ट्रेटी जांच की मांग की है।

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Avnishs firm also involved in drain cleaning scam, took 1.5 crores without getting the cleaning done
अवनीश दीक्षित - फोटो : amar ujala

विस्तार

कानपुर में सिविल लाइंस स्थित नजूल की जमीन की कब्जेदारी के प्रयास में जेल भेजे गए कानपुर प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष अवनीश दीक्षित के जेल जाने के बाद शुरू हुई उसकी संपत्तियों की जांच में नाला सफाई घोटाले में भी अवनीश की फर्म की भूमिका सामने आई है। जांच में श्री आनंदेश्वर एसोसिएट्स के अलावा नगर निगम की एक कंपनी के बारे में पुलिस को जानकारी मिली।

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पुलिस की प्राथमिक जांच में पता चला कि बिजली विभाग में 90 लाख रुपये का पीएफ घोटाला और नगर निगम में नाला सफाई का ठेका जीतू उर्फ सुनील के नाम था। जीतू अवनीश का करीबी है। जीतू की कंपनी बिजली विभाग के लिए मैन पॉवर उपलब्ध कराती थी। इसके अलावा नगर निगम में नाला सफाई का टेंडर भी इसी कम्पनी द्वारा उठाया गया था। इसमें 1.5 करोड़ रुपये बिना नाला सफाई के ही जारी करा लिया गया।
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सीपी ने डीएम से इस प्रकरण की मजिस्ट्रेट के जरिए जांच कराने को कहा है। चूंकि इन लोगों ने करीब 425 कर्मचारी बिजली विभाग और नगर निगम में लगाए थे। साथ ही इनके वेतन 3000 रुपये फंड के नाम पर काटा था। ऐसे में पुलिस कमिश्नर की तरफ से ईपीएफओ के अधिकारियों को भी पत्र भेजकर यह पूछा गया है कि आखिर लेबरों का पीएफ कैसे कटता है और उसमें कंपनी द्वारा पैसा जमा कराने का क्या तरीका होता है।

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जानकारी नहीं दे रहे केस्को व नगर निगम
जांच के दौरान पुलिस को आरोपियों के साथ ही विभागों के असहयोग का भी सामना करना पड़ रहा है। अवनीश के करीबियों की फर्म की जानकारी मांगने पर नगर निगम और केस्को जवाब नहीं दे रहा है। अभी तक सिर्फ फर्म के द्वारा उपलब्ध कराए गए कर्मियों की पूरी जानकारी नहीं दी गई है। जारी किए गए टेंडर से जुड़े दस्तावेज नहीं दिए गए हैं।

इस तरह से हुआ था फंड घोटाला
पुलिस सूत्रों की माने तो ये घोटाला 90 लाख रुपये का था। जीतू उर्फ सुनील शुक्ला और उनके साथ के लोगों ने डिजिटल सिग्नेचर बनाकर इसी बैंक में दूसरा खाता खोलकर फंड की रकम ट्रांसफर कर ली थी। इस गबन की वजह से केस्को ने बाला जी कंपनी को ब्लैक लिस्ट कर दिया था। कुछ ही महीनों बाद लघु उद्योग विभाग से इस कंपनी की ब्लैक लिस्ट से नाम हटा दिया और ये फिर से काम लेने लगी।

नगर निगम में हुई डेढ़ करोड़ रुपये की अनियमितता को लेकर डीएम से मजिस्ट्रेट जांच कराने के लिए कहा गया है। साथ ही ईपीएफओ को भी पत्र लिखा गया है। जानकारी के आधार पर आगे कार्रवाई की जाएगी।  -अखिल कुमार, पुलिस कमिश्नर

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