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Atiq Ashraf Murder: लवलेश का गोलियां बरसाने का अंदाज देख पुलिस हैरान, किससे लिया पिस्टल चलाने का प्रशिक्षण?
Wed, 19 Apr 2023 03:24 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, बांदा
अमर उजाला नेटवर्क, बांदा
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 19 Apr 2023 03:24 PM IST
सार
अतीक पर गोलियां बरसाने वाले लवलेश तिवारी का अंदाज देखकर पुलिस हैरान है। वह इस संभावना को टटोल रही है कि शायद इसके लिए उसे प्रशिक्षित किया गया था। साधारण परिवार के लवलेश के हथियारों से लगाव की बात किसी ने नहीं बताई, लेकिन वारदात के दौरान उसने शातिर शूटर की तरह गोलियां चलाईं।
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Atiq Ashraf Murder
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
प्रयागराज के कॉल्विन अस्पताल के पास शनिवार की रात पुलिस कस्टडी में माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की गोलियां बरसाकर हत्या कर दी। हमलावरों ने वारदात के बाद सरेंडर कर दिया। हमलावरों की पहचान सनी, अरुण और लवलेश तिवारी के रूप में हुई। तीनों हमलावरों ने ताबड़तोड़ गोलीबारी की।
अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ को महज 18 सेकंड के भीतर मौत की नींद सुला दिया। शूटरों ने दोनों के पुलिस जीप से उतरने के 32वें सेकंड में पहली गोली दागी। इसके बाद लगातार कुल 20 गोलियां दागीं और 50वें सेकंड तक माफिया भाइयों का काम तमाम हो चुका था।
वहीं, अतीक पर गोलियां बरसाने वाले लवलेश तिवारी का अंदाज देखकर पुलिस हैरान है। वह इस संभावना को टटोल रही है कि शायद इसके लिए उसे प्रशिक्षित किया गया था। साधारण परिवार के लवलेश के हथियारों से लगाव की बात किसी ने नहीं बताई, लेकिन वारदात के दौरान उसने शातिर शूटर की तरह गोलियां चलाईं।
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उसके हाथ में जो पिस्टल थी, उसकी कीमत लगभग आठ लाख रुपये बताई गई है। इतने कीमती हथियार तक साधारण परिवार के लवलेश की पहुंच भी पुलिस के लिए पहेली बनी हुई है। फिलहाल जांच की जा रही है।
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अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ को महज 18 सेकंड के भीतर मौत की नींद सुला दिया। शूटरों ने दोनों के पुलिस जीप से उतरने के 32वें सेकंड में पहली गोली दागी। इसके बाद लगातार कुल 20 गोलियां दागीं और 50वें सेकंड तक माफिया भाइयों का काम तमाम हो चुका था।
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वहीं, अतीक पर गोलियां बरसाने वाले लवलेश तिवारी का अंदाज देखकर पुलिस हैरान है। वह इस संभावना को टटोल रही है कि शायद इसके लिए उसे प्रशिक्षित किया गया था। साधारण परिवार के लवलेश के हथियारों से लगाव की बात किसी ने नहीं बताई, लेकिन वारदात के दौरान उसने शातिर शूटर की तरह गोलियां चलाईं।
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उसके हाथ में जो पिस्टल थी, उसकी कीमत लगभग आठ लाख रुपये बताई गई है। इतने कीमती हथियार तक साधारण परिवार के लवलेश की पहुंच भी पुलिस के लिए पहेली बनी हुई है। फिलहाल जांच की जा रही है।
लवलेश का हमसे लेना-देना नहीं था-पिता
हत्याकांड के बाद शूटर लवलेश तिवारी के पिता का बयान भी सामने आया था। उन्होंने कहा था कि लवलेश का हमसे लेना-देना नहीं था। हत्याकांड से पांच से छह दिन पहले लवलेश बांदा स्थित घर आया था। पहले भी वो कभी-कभी घर आता था। पहले भी वो एक मामले में जेल गया था। लवलेश नशा करता है।
माफिया अतीक और अशरफ को गोली मारकर मौत के घाट उतारने में गिरफ्तार लवलेश तिवारी बांदा शहर के केवटरा मोहाल का रहने वाला है। स्नातक फेल लवलेश नशे का आदि बताया गया है। पिता यज्ञ तिवारी ने बताया कि छह रोज पहले घर आया था। उसका ढर्रा सही नहीं रहा।
स्नातक फेल होने के बाद उसने पढ़ाई बंद कर दी थी। गलत संगत में चला गया। घरवालों ने भी उसका पीछा छोड़ दिया था। चार भाइयों में तीसरे नंबर का था। कोई काम नहीं करता था। पिता ने बताया कि इतनी बड़ी वारदात कैसे कर दी? वह खुद नहीं समझ पा रहे। लवलेश का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। करीब डेढ़ वर्ष पूर्व एक छात्रा को तमाचा जड़ने पर आठ दिन जेल में रहा है। घटना से लवलेश का परिवार दहशत में है।
पेशेवर अपराधियों के पास नहीं मिला मोबाइल
दूसरी ओर, अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या में रोजाना चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। नया खुलासा यह है कि देश भर में चर्चित इस हत्याकांड को अंजाम देने वाले शूटरों के पास मोबाइल तक नहीं था। पुलिस को उनके पास से कोई मोबाइल नहीं मिला है। सवाल यह है कि आखिर मोबाइल नहीं होने के बावजूद उन्हें माफिया भाइयों की लोकेशन आखिर कैसे मिली।
दूसरी ओर, अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या में रोजाना चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। नया खुलासा यह है कि देश भर में चर्चित इस हत्याकांड को अंजाम देने वाले शूटरों के पास मोबाइल तक नहीं था। पुलिस को उनके पास से कोई मोबाइल नहीं मिला है। सवाल यह है कि आखिर मोबाइल नहीं होने के बावजूद उन्हें माफिया भाइयों की लोकेशन आखिर कैसे मिली।
पुलिस ने बरामदगी की कोशिश भी नहीं की
पुलिस ने तीनों शूटरों से जो बरामदगी दिखाई है, उनमें तीन पिस्टल हैं। मोबाइल के संंबंध में कोई जिक्र नहीं है। सवाल यह है कि आखिर यह कैसे हो सकता है कि कासगंज, बांदा और हमीरपुर जनपदों के रहने वाले शूटरों के पास मोबाइल न हो। वह बिना मोबाइल के प्रयागराज आए हों, इसकी भी संभावना न के बराबर है।
यह भी पढ़ें: मैं अभी मरा नहीं हूं: अतीक ने बिल्डर से कहा था- मुझसे जेल में आकर मिलो, आखिरी बार समझा रहा हूं, हिसाब कर दो...
पुलिस ने तीनों शूटरों से जो बरामदगी दिखाई है, उनमें तीन पिस्टल हैं। मोबाइल के संंबंध में कोई जिक्र नहीं है। सवाल यह है कि आखिर यह कैसे हो सकता है कि कासगंज, बांदा और हमीरपुर जनपदों के रहने वाले शूटरों के पास मोबाइल न हो। वह बिना मोबाइल के प्रयागराज आए हों, इसकी भी संभावना न के बराबर है।
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बड़ा सवाल, बिना फोन के कैसे मिली अतीक-अशरफ की लोकेशन
प्रयागराज से उनका कोई कनेक्शन कभी नहीं रहा, यह बात तीनों के घरवाले भी बता चुके हैं। यह भी बताया कि तीनों कभी प्रयागराज नहीं गए। ऐसे में तीनों के यहां बिना मोबाइल के आने की बात गले नहीं उतरती। सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर उनके पास मोबाइल फोन नहीं था, तो उन्हें कैसे पता चला कि अतीक व अशरफ कॉल्विन अस्पताल पहुंचने वाले हैं।
प्रयागराज से उनका कोई कनेक्शन कभी नहीं रहा, यह बात तीनों के घरवाले भी बता चुके हैं। यह भी बताया कि तीनों कभी प्रयागराज नहीं गए। ऐसे में तीनों के यहां बिना मोबाइल के आने की बात गले नहीं उतरती। सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर उनके पास मोबाइल फोन नहीं था, तो उन्हें कैसे पता चला कि अतीक व अशरफ कॉल्विन अस्पताल पहुंचने वाले हैं।