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'अटल अंदाज'...सब समर्थक ठहाके मार कर हंसे, दूसरे पक्षी आएंगे पार्टी का जनाधार बढ़ाएंगे
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Updated Sat, 18 Aug 2018 07:53 AM IST
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रूरा में मंगल अवस्थी के घर भोजन करते पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी(फाइल फोटो)
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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का कानपुर और कानपुर देहात से गहरा नाता रहा है। विद्यार्थी जीवन से लेकर जनसंघ और भाजपा में रहते कई बार जनसभाओं को संबोधित किया। उन्होंने बिल्हौर और चौबेपुर में कई जनसभाओं को संबोधित किया। यहां के कई आरएसएस पदाधिकारी और वरिष्ठ भाजपाई आज भी उनके भाषणों की चर्चा करके पुरानी यादों में खो जाते हैं। इधर, गुरुवार की शाम अटल जी के निधन की सूचना आते ही लोग शोक में डूब गए।
बिल्हौर निवासी बुजुर्ग शिवदुलारे अवस्थी वर्ष 1980 में चौबेपुर विधानसभा क्षेत्र के भाजपा की टिकट पर चुनाव मैदान में थे। तब पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी चौबेपुर की बैलाही बाजार में चुनावी जनसभा को संबोधित करने के लिए आए थे। शिवदुलारे अवस्थी ने नम आंखों से बताया कि वह 1946 में तब अटल जी के संपर्क में आए थे, जब वह अपने पैतृक गांव बटेश्वर, आगरा से पढ़ाई करने कानपुर के मानीराम बगिया में किराये पर रहते थे।
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बिल्हौर निवासी बुजुर्ग शिवदुलारे अवस्थी वर्ष 1980 में चौबेपुर विधानसभा क्षेत्र के भाजपा की टिकट पर चुनाव मैदान में थे। तब पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी चौबेपुर की बैलाही बाजार में चुनावी जनसभा को संबोधित करने के लिए आए थे। शिवदुलारे अवस्थी ने नम आंखों से बताया कि वह 1946 में तब अटल जी के संपर्क में आए थे, जब वह अपने पैतृक गांव बटेश्वर, आगरा से पढ़ाई करने कानपुर के मानीराम बगिया में किराये पर रहते थे।
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उनका ओजस्वी भाषण को सुनने के लिए जुट गए थे
अपनी बुआ से बात करते पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी(फाइल फोटो)
अटल जी के नेतृत्व में वह वीएसएसडी कालेज में 1956 अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से छात्रसंघ चुनाव में महामंत्री निर्वाचित हुए थे। इसके बाद अटल जी के निर्देश पर चौबेपुर विधान सभा में विधायक पद के लिए प्रत्याशी बने थे। वह हमारे मध्य नहीं हैं, बहुत से स्मरण उनके गम में भूल गया हूं, उनकी यादें-मुलाकातें ही पार्टी-पदाधिकारी-समर्थकों आदि के लिए ऊर्जा और शक्ति हैं।
वर्ष 1998 में शिवराजपुर निवासी तत्कालीन प्रधान संगठन के जिलाध्यक्ष स्व. कृष्ण बिहारी पांडे, फर्रुखाबाद के ब्रम्हदत्त द्विवेदी के नेतृत्व में अटल जी ने पहले विपिन बिहारी पांडे की दुकान पर चाय भी, फिर जन सभा को संबोधित किया था। विपिन बिहारी के अनुसार, अटल जी के कस्बा आने पर कुछ ही मिनट में बड़ी संख्या में लोग उनका ओजस्वी भाषण को सुनने के लिए जुट गए थे।
वर्ष 1998 में शिवराजपुर निवासी तत्कालीन प्रधान संगठन के जिलाध्यक्ष स्व. कृष्ण बिहारी पांडे, फर्रुखाबाद के ब्रम्हदत्त द्विवेदी के नेतृत्व में अटल जी ने पहले विपिन बिहारी पांडे की दुकान पर चाय भी, फिर जन सभा को संबोधित किया था। विपिन बिहारी के अनुसार, अटल जी के कस्बा आने पर कुछ ही मिनट में बड़ी संख्या में लोग उनका ओजस्वी भाषण को सुनने के लिए जुट गए थे।
दूसरे पक्षी आएंगे, पार्टी का जनाधार बढ़ाएंगे
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी(फाइल फोटो)
कानपुर ग्रामीण के पूर्व जिलाध्यक्ष रामशरण कटियान ने बताया कि 1977 में जनता पार्टी की सरकार में जब मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री बने और अटल जी विदेश मंत्री तो बिल्हौर के कार्यकर्ताओं ने काफी मान-मनौव्वल के बाद नेहरू पार्क में रोका था। कहा कि अटज जी कार्यकर्ताओं को बहुत तवज्जों देते थे। यही कारण है कि 1977 में उनके भाषण को सुनने के लिए कई लोग बिल्हौर से कन्नौज तक उनकी गाड़ियों के पीछे-पीछे पैदल गए थे।
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जनता से सीधा संवाद करते थे, वह अपने संबोधन में विपक्षी दलों को ही नहीं, बल्कि पार्टी में मन लगाकर काम न करने वालों को भी नहीं छोड़ते थे। वह पार्टी पदाधिकारियों के संबोधन में अक्सर यहीं कहते थे कि पट्टू पढ़ो तो पढ़ो वरना पिंजड़ा छोड़ो, दूसरे पक्षी आएंगे, पार्टी का जनाधार बढ़ाएंगे।
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के साथ जनसंघ, जनता पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के कई अधिवेशनों में साथी रह चुके शिवदुलारे अवस्थी ने बताया कि 1980 में बैलाही बाजार, चौबेपुर की चुनावी जनसभा में आसपास से ही नहीं बल्कि कई जिलों से भाषण सुनने के लिए लोग आए थे।
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जनता से सीधा संवाद करते थे, वह अपने संबोधन में विपक्षी दलों को ही नहीं, बल्कि पार्टी में मन लगाकर काम न करने वालों को भी नहीं छोड़ते थे। वह पार्टी पदाधिकारियों के संबोधन में अक्सर यहीं कहते थे कि पट्टू पढ़ो तो पढ़ो वरना पिंजड़ा छोड़ो, दूसरे पक्षी आएंगे, पार्टी का जनाधार बढ़ाएंगे।
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के साथ जनसंघ, जनता पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के कई अधिवेशनों में साथी रह चुके शिवदुलारे अवस्थी ने बताया कि 1980 में बैलाही बाजार, चौबेपुर की चुनावी जनसभा में आसपास से ही नहीं बल्कि कई जिलों से भाषण सुनने के लिए लोग आए थे।
मिर्च चाहिए नहीं, मिर्च न खाओ-न खिलाओ
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी(फाइल फोटो)
जनसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहते हुए उन्हें कई ऐसे कार्यकर्ताओं की पहचान भी की और उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया। बताया कि 1999 में उनकी आंखों में बीमारी की सूचना पर पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेई ने एम्स के वरिष्ठ अधिकारियों को बिल्हौर भेजा था, एम्स के अफसर उन्हें लेकर दिल्ली गए और उनकी आंखों की जांचकर रिपोर्ट विदेश जांच के लिए भेजी गई। इलाज के दौरान अटलजी से तो सीधी बात नहीं हुई लेकिन उनके द्वारा भेजे कई सांसद, आईएएस अफसर लगातार उनकी आवभगत में लगे रहे।
भाजपा के जिलाध्यक्ष रहे रामशरण कटियार ने बतायाकि 1985 के दशक में एकबार बिठूर में पार्टी पदाधिकारियों की बैठक के बाद अटल जी के साथ सभी लोग खाना खा रहे थे। तभी कुछ कार्यकर्ताओं ने उनकी थाली में कई मिर्च रख दिए, तब उन्होंने अपने शैली के अनुसार, मिर्च चाहिए नहीं, मिर्च न खाओ-न खिलाओ बात कही थी। उन्होंने समर्थकों से कहा था जब मिर्च हटेगी, द्वेष मिटेगा, अंधेरा, उजाला फैलेगा देश बढ़ेगा। जिस पर सब समर्थक ठहाके मार कर हंसे भी थे और उनके दूर-दृष्टि को बारीकी से समझे भी थे।
भाजपा के जिलाध्यक्ष रहे रामशरण कटियार ने बतायाकि 1985 के दशक में एकबार बिठूर में पार्टी पदाधिकारियों की बैठक के बाद अटल जी के साथ सभी लोग खाना खा रहे थे। तभी कुछ कार्यकर्ताओं ने उनकी थाली में कई मिर्च रख दिए, तब उन्होंने अपने शैली के अनुसार, मिर्च चाहिए नहीं, मिर्च न खाओ-न खिलाओ बात कही थी। उन्होंने समर्थकों से कहा था जब मिर्च हटेगी, द्वेष मिटेगा, अंधेरा, उजाला फैलेगा देश बढ़ेगा। जिस पर सब समर्थक ठहाके मार कर हंसे भी थे और उनके दूर-दृष्टि को बारीकी से समझे भी थे।