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Kanpur News: ओडीओपी के सब्सिडी में गड़बड़ी सामने आते ही खंगाली जाने लगीं फाइलें
Wed, 11 Feb 2026 01:39 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Wed, 11 Feb 2026 01:39 AM IST
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कानपुर देहात। जिले में एक जनपद एक उत्पाद के तहत वर्ष 2021-22 में करीब 16 इकाइयों को 12.91 करोड़ का ऋण दिला कर उद्योग स्थापित कराए गए। तय समय पर सत्यापन कर विभाग ने 2.18 करोड़ की सब्सिडी स्वीकृत कर दी। इधर बैंक ऑफ इंडिया की ऑडिट में गड़बड़ी सामने आने पर उद्योग विभाग ने पुरानी और नई फाइलें खंगालनी शुरू की है। वहीं उद्योग विभाग हुई गड़बड़ी को लेकर पल्ला झाड़ रहा है। हालांकि जिलाधिकारी ने मामला संज्ञान में आने पर जांच कराने की बात कही है।
एक जिला एक उत्पाद योजना में प्लास्टिक उद्योग शामिल है। बैंक ऑफ इंडिया के महाप्रबंधक ने ऑडिट कराया तो सब्सिडी में गड़बड़ी निकल कर सामने आई। इनमें कुछ इकाइयां कानपुर देहात की होना बताई गईं हैं। हालांकि विभागीय अधिकारी विभाग स्तर पर किसी भी तरह की गड़बड़ी न होने की बात कह रहे हैं। इधर इस मामले की जानकारी के बाद मंगलवार को उपायुक्त उद्योग कार्यालय रनियां में कर्मचारी वित्तीय वर्ष 2021-22 से लेकर अब तक के अभिलेखों का मिलान व जारी की गई सब्सिडी का रिकार्ड खंगालते नजर आए।
विभागीय आंकड़ों की बात करें तो वित्तीय वर्ष 2021-22 में ओडीओपी योजना के तहत 84 लोगों ने उद्यम स्थापित करने के लिए आवेदन किए थे। इनमें से विभाग ने 16 इकाइयों के आवेदन अनुमोदन करते हुए बैंकों को ऋण स्वीकृत के लिए भेज दिए। इधर बैंक से 16 इकाइयों को 12.91 करोड़ का ऋण स्वीकृत हुआ। तय समय पर इकाइयां संचालित हो जाने और स्थलीय सत्यापन के बाद इसी वित्तीय वर्ष में 2.18 करोड़ की सब्सिडी भी बैंक के ऑन लाइन आवेदन के बाद स्वीकृत कर दी गई। हालांकि गड़बड़ी किस स्तर पर हुई इसको लेकर जिम्मेदार पल्ला झाड़ते रहें। वहीं, पांच साल के आंकड़ों की बात करें तो विभाग के अनुमोदन पर बैंकों से 66 औद्योगिक इकाइयों को करीब 83.55 करोड़ रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ। जिन्हें अब तक 8.72 लाख की सब्सिडी जारी की जा चुकी है।
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वित्तीय वर्ष इकाइयां स्वीकृत ऋण जारी सब्सिडी
2021-22 16 12.91 करोड़ 2.18 करोड़
2022-23 17 20.18 करोड़ 2.10 करोड़
2023-24 16 25.50 करोड़ 2.30 करोड़
2024-25- 09 10.41 करोड़ 1.09 करोड़
2025-26- 08 14.55 करोड़ 1.05 करोड़
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इस तरह मिलती सब्सिडी
उद्योग विभाग के उपायुक्त रहे मोहम्मद साउद ने बताया कि उनकी तैनाती जुलाई 2023 में हुई थी। अब उनका तबादला उन्नाव हो गया है। इससे पहले के बारे में कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने बताया कि इकाइयों को स्थापित कराने में लिए गए ऋण पर 10 से 25 फीसदी तक सब्सिडी दी जाती है। इसमें 10 से 25 लाख पर 25 फीसदी, 50 लाख तक पर 20 फीसदी, 50 लाख से दो कराेड़ तक 10 फीसदी और दो करोड़ से अधिक ऋण पर 20 लाख तक की तय सब्सिडी दी जाती है। इसके लिए ऋण स्वीकृत करने वाली बैंक व विभाग संचालित इकाई का संयुक्त रूप से सत्यापन कराती है। इसके बाद बैंक की आईडी से मार्जिन मनी दिए जाने के लिए विभाग को आवेदन किया जाता है। इसके बाद विभाग दो साल के लिए टीडीआर खाते में सब्सिडी रोकने की बात कहते हुए जारी करता है।
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तीन इकाइयों ने कराया था एमओयू
उद्योग विभाग के निवेश मित्र नवनीत द्विवेदी ने बताया कि ओडीओपी के तहत प्लास्टिक का कारोबार करने वाली अधिकांश इकाइयां चल रहीं हैं। इनमें तीन इकाइयों ने वर्ष 2023 में ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी से पहले एमओयू भी कराया था, जो पूरी तरह संचालित हैं। वहीं कुछ इकाइयां बंद हो गईं हैं।
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वर्जन.......
मैने सोमवार की शाम को ही कार्यभार ग्रहण किया है। मेरे संज्ञान में किसी भी तरह का कोई मामला नहीं हैं। बुधवार को दफ्तर पहुंचने के बाद सारी जानकारी करेंगे। इसके बाद स्थिति साफ हो सकेगी। - प्रभात यादव, उपायुक्त उद्योग
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बैंक से मेरे पास किसी भी तरह की कोई रिपोर्ट नहीं आई है। लीड बैंक मैनेजर से इस संबंध में जानकारी की जाएगी। यदि बैंक से कोई रिपोर्ट आती है और किसी भी स्तर पर गड़बड़ी मिलती है तो मामले की जांच कराई जाएगी। - कपिल सिंह, जिलाधिकारी
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एक जिला एक उत्पाद योजना में प्लास्टिक उद्योग शामिल है। बैंक ऑफ इंडिया के महाप्रबंधक ने ऑडिट कराया तो सब्सिडी में गड़बड़ी निकल कर सामने आई। इनमें कुछ इकाइयां कानपुर देहात की होना बताई गईं हैं। हालांकि विभागीय अधिकारी विभाग स्तर पर किसी भी तरह की गड़बड़ी न होने की बात कह रहे हैं। इधर इस मामले की जानकारी के बाद मंगलवार को उपायुक्त उद्योग कार्यालय रनियां में कर्मचारी वित्तीय वर्ष 2021-22 से लेकर अब तक के अभिलेखों का मिलान व जारी की गई सब्सिडी का रिकार्ड खंगालते नजर आए।
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विभागीय आंकड़ों की बात करें तो वित्तीय वर्ष 2021-22 में ओडीओपी योजना के तहत 84 लोगों ने उद्यम स्थापित करने के लिए आवेदन किए थे। इनमें से विभाग ने 16 इकाइयों के आवेदन अनुमोदन करते हुए बैंकों को ऋण स्वीकृत के लिए भेज दिए। इधर बैंक से 16 इकाइयों को 12.91 करोड़ का ऋण स्वीकृत हुआ। तय समय पर इकाइयां संचालित हो जाने और स्थलीय सत्यापन के बाद इसी वित्तीय वर्ष में 2.18 करोड़ की सब्सिडी भी बैंक के ऑन लाइन आवेदन के बाद स्वीकृत कर दी गई। हालांकि गड़बड़ी किस स्तर पर हुई इसको लेकर जिम्मेदार पल्ला झाड़ते रहें। वहीं, पांच साल के आंकड़ों की बात करें तो विभाग के अनुमोदन पर बैंकों से 66 औद्योगिक इकाइयों को करीब 83.55 करोड़ रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ। जिन्हें अब तक 8.72 लाख की सब्सिडी जारी की जा चुकी है।
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वित्तीय वर्ष इकाइयां स्वीकृत ऋण जारी सब्सिडी
2021-22 16 12.91 करोड़ 2.18 करोड़
2022-23 17 20.18 करोड़ 2.10 करोड़
2023-24 16 25.50 करोड़ 2.30 करोड़
2024-25- 09 10.41 करोड़ 1.09 करोड़
2025-26- 08 14.55 करोड़ 1.05 करोड़
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इस तरह मिलती सब्सिडी
उद्योग विभाग के उपायुक्त रहे मोहम्मद साउद ने बताया कि उनकी तैनाती जुलाई 2023 में हुई थी। अब उनका तबादला उन्नाव हो गया है। इससे पहले के बारे में कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने बताया कि इकाइयों को स्थापित कराने में लिए गए ऋण पर 10 से 25 फीसदी तक सब्सिडी दी जाती है। इसमें 10 से 25 लाख पर 25 फीसदी, 50 लाख तक पर 20 फीसदी, 50 लाख से दो कराेड़ तक 10 फीसदी और दो करोड़ से अधिक ऋण पर 20 लाख तक की तय सब्सिडी दी जाती है। इसके लिए ऋण स्वीकृत करने वाली बैंक व विभाग संचालित इकाई का संयुक्त रूप से सत्यापन कराती है। इसके बाद बैंक की आईडी से मार्जिन मनी दिए जाने के लिए विभाग को आवेदन किया जाता है। इसके बाद विभाग दो साल के लिए टीडीआर खाते में सब्सिडी रोकने की बात कहते हुए जारी करता है।
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तीन इकाइयों ने कराया था एमओयू
उद्योग विभाग के निवेश मित्र नवनीत द्विवेदी ने बताया कि ओडीओपी के तहत प्लास्टिक का कारोबार करने वाली अधिकांश इकाइयां चल रहीं हैं। इनमें तीन इकाइयों ने वर्ष 2023 में ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी से पहले एमओयू भी कराया था, जो पूरी तरह संचालित हैं। वहीं कुछ इकाइयां बंद हो गईं हैं।
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वर्जन.......
मैने सोमवार की शाम को ही कार्यभार ग्रहण किया है। मेरे संज्ञान में किसी भी तरह का कोई मामला नहीं हैं। बुधवार को दफ्तर पहुंचने के बाद सारी जानकारी करेंगे। इसके बाद स्थिति साफ हो सकेगी। - प्रभात यादव, उपायुक्त उद्योग
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बैंक से मेरे पास किसी भी तरह की कोई रिपोर्ट नहीं आई है। लीड बैंक मैनेजर से इस संबंध में जानकारी की जाएगी। यदि बैंक से कोई रिपोर्ट आती है और किसी भी स्तर पर गड़बड़ी मिलती है तो मामले की जांच कराई जाएगी। - कपिल सिंह, जिलाधिकारी