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Kanpur News: मिट्टी, कागज में समय व स्मृति की कहानी, कलाकारों ने दिखाया नवाचार
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कानपुर। आईआईटी के अप्रोच सेल में बुधवार को द आफ्टरलाइफ ऑफ मटेरियल्स स्टोरीज इन फॉर्म विषय पर कला प्रदर्शनी लगाई गई। यहां पारंपरिक शिल्प और आधुनिक डिजाइन का अनोखा संगम दिखाई दिया। इसमें मिट्टी, फाइबर, कागज और वस्त्र जैसी पारंपरिक सामग्री को समय के साथ नए रूप में प्रस्तुत किया गया।
प्रदर्शनी का प्रस्तुतिकरण शुभानी शर्मा ने किया। शहर की सिरेमिक कलाकार शैली सांगल और रंजीत सिंह रोजी शिक्षा केंद्र के चार डिजाइन इंटर्न्स के कार्य प्रमुख रहे। शैली सांगल पिछले दो वर्षों से बिठूर के कुम्हारों के साथ टेराकोटा कला पर काम कर रही हैं। उन्होंने डिजाइन और तकनीक में नए प्रयोग करते हुए कारीगरों का मजबूत समूह तैयार किया है। उनके कार्यों की खासियत सादगी, न्यूनतम शैली और प्राकृतिक आकृतियां हैं। ये दर्शकों को बारीकियों में सुंदरता खोजने के लिए प्रेरित करती हैं। प्रदर्शनी का आयोजन शतरूपा रॉय के मार्गदर्शन में हुआ।
डिजाइन इंटर्न्स ने भी पारंपरिक हस्तशिल्प को आधुनिक दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया। आस्था अग्रवाल ने कालपी के हस्तनिर्मित कागज कारीगरों के साथ मिलकर नए उत्पाद विकसित किए। अभिषेक टैंक ने दरी बुनाई को आधुनिक डिजाइन के साथ जोड़ने का प्रयास किया। जैस्मिन शर्मा ने फर्रुखाबाद की ब्लॉक प्रिंटिंग कला को नए रूप में पेश किया। मिताली सिंह ने मिट्टी, मूंज और कागज को समकालीन पहचान दी।
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प्रदर्शनी का प्रस्तुतिकरण शुभानी शर्मा ने किया। शहर की सिरेमिक कलाकार शैली सांगल और रंजीत सिंह रोजी शिक्षा केंद्र के चार डिजाइन इंटर्न्स के कार्य प्रमुख रहे। शैली सांगल पिछले दो वर्षों से बिठूर के कुम्हारों के साथ टेराकोटा कला पर काम कर रही हैं। उन्होंने डिजाइन और तकनीक में नए प्रयोग करते हुए कारीगरों का मजबूत समूह तैयार किया है। उनके कार्यों की खासियत सादगी, न्यूनतम शैली और प्राकृतिक आकृतियां हैं। ये दर्शकों को बारीकियों में सुंदरता खोजने के लिए प्रेरित करती हैं। प्रदर्शनी का आयोजन शतरूपा रॉय के मार्गदर्शन में हुआ।
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डिजाइन इंटर्न्स ने भी पारंपरिक हस्तशिल्प को आधुनिक दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया। आस्था अग्रवाल ने कालपी के हस्तनिर्मित कागज कारीगरों के साथ मिलकर नए उत्पाद विकसित किए। अभिषेक टैंक ने दरी बुनाई को आधुनिक डिजाइन के साथ जोड़ने का प्रयास किया। जैस्मिन शर्मा ने फर्रुखाबाद की ब्लॉक प्रिंटिंग कला को नए रूप में पेश किया। मिताली सिंह ने मिट्टी, मूंज और कागज को समकालीन पहचान दी।
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