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ये कैसा कर्ज माफः किसी को 19 तो किसी को 50 पैसे की ऋण माफी, कागज देखकर किसान हैरान
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Fri, 15 Sep 2017 02:49 PM IST
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किसानों को 1 9 पैसे और 50 पैसे की ऋण माफी
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ऋण माफी के नाम पर किसानों का सरकार ने मजाक बना दिया है। किसी का 19 पैसे तो किसी का 50 पैसे कर्ज माफ कर दिया गया। अब किसान सरकारी कागज को लेकर हक्का-बक्का हैं। वहीं अधिकारियों का कहना है ऋण मोचन योजना के नियमानुसार एक रुपये भी बकाया है तो वह माफ किया जाएगा।
भाजपा ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में किसानों का ऋण माफ करने का वादा किया गया था। सरकार बनने के बाद लघु व सीमांत किसानों का एक लाख रुपये तक फसली ऋण माफ करने का फैसला लिया गया। इस योजना में पहले चरण में 17134 किसानों का चयन किया गया है, इन्हीं में से पांच हजार किसानों को 11 सितंबर को ऋण मोचन प्रमाण पत्र दिया जा चुका है। इसमें 77 किसान ऐसे हैं, जिनका सौ रुपये से कम का ऋण माफ हुआ है। जबकि, 3216 किसान ऐसे भी हैं, जिनका पूरा एक लाख रुपये माफ हुआ है। एक हजार से कम रुपये माफ होने वाले किसानों की संख्या भी हजारों में है। सरकार ने उन किसानों का ऋण माफ किया है, जिन्होंने 31 मार्च 2016 से पहले फसली ऋण लिया था। उस ऋण की रकम में 1 अप्रैल 2017 तक जमा की गई। धनराशि में जो भी बचा धन है, वह अधिकतम एक लाख रुपये तक माफ किया गया है।
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भाजपा ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में किसानों का ऋण माफ करने का वादा किया गया था। सरकार बनने के बाद लघु व सीमांत किसानों का एक लाख रुपये तक फसली ऋण माफ करने का फैसला लिया गया। इस योजना में पहले चरण में 17134 किसानों का चयन किया गया है, इन्हीं में से पांच हजार किसानों को 11 सितंबर को ऋण मोचन प्रमाण पत्र दिया जा चुका है। इसमें 77 किसान ऐसे हैं, जिनका सौ रुपये से कम का ऋण माफ हुआ है। जबकि, 3216 किसान ऐसे भी हैं, जिनका पूरा एक लाख रुपये माफ हुआ है। एक हजार से कम रुपये माफ होने वाले किसानों की संख्या भी हजारों में है। सरकार ने उन किसानों का ऋण माफ किया है, जिन्होंने 31 मार्च 2016 से पहले फसली ऋण लिया था। उस ऋण की रकम में 1 अप्रैल 2017 तक जमा की गई। धनराशि में जो भी बचा धन है, वह अधिकतम एक लाख रुपये तक माफ किया गया है।
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Etawah (UP): Farmers get loan waiver of 19 paise and 50 paise, say government has played cruel joke on us pic.twitter.com/T5btfOJzBD
— ANI UP (@ANINewsUP) September 15, 2017
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नोटबंदी से लगा किसानों का झटका
किसानों को 1 9 पैसे और 50 पैसे की ऋण माफी
नवंबर 2016 में सरकार ने एक हजार व पांच सौ रुपये के नोट बंद कर दिए थे। इसके बाद किसानों को यह सुविधा दी गई थी कि वह अपने ऋण खाते में यह धनराशि जमा कर सकते हैं, उसका कोई हिसाब नहीं देना है। इस पर अधिकांश किसानों ने अपने लोन के खाते में बंद किए गए नोट जमा कर दिए। इसके बाद कई महीने तक बैंकों में नोट की समस्या रही, जिससे वह दोबारा लोन उठा नहीं सके। इससे चलते वह ऋण माफी के दायरे से बाहर हो गए।
हरचंदापुर गांव के किसान देवनरायन ने बताया कि उन्होंने गजनेर की बैंक आफ बड़ौदा से फसली ऋण लिया था। जिसमें बीच में कुछ रुपये जमा कर दिया था। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं बताया कि उनका इस समय बाकी कितना है, लेकिन यह जरूर कहा कि ऋण माफी में उनका 2 रुपये 60 पैसे का लोन माफ हुआ है। उन्होंने कहा कि ऋण माफी के नाम पर यह मजाक किया गया है। इससे सरकारी आंकड़े दुरुस्त किए जा रहे हैं। ढाई रुपये कर्ज माफ करने का कोई मतलब नहीं है।
खम्हैला गांव के रतीराम दिवाकर ने बताया कि उन्होंने गांव की ही पूर्वी बड़ौदा उ.प्र. ग्रामीण बैंक से केसीसी बनवाया था। उनका 21 हजार रुपये का केसीसी कार्ड बना लेकिन उन्होंने ऋण उठाया नहीं था। फिर भी चार रुपये ऋण माफ होने की जानकारी मिली है। उन्होंने भी इसे मजाक बताया। जुरिया गांव के राकेश की पत्नी पुष्पा देवी ने बताया कि उनका 56 रुपये का ऋण माफ हुआ है। उन्होंने कहा कि इससे ज्यादा रुपये तो आधार कार्ड बनवाने में खर्च हो गए। कई बार बैंक के चक्कर लगाने पड़े। खम्हैला के रामआधार पाल ने बताया कि उनका 59 रुपये ऋण माफ हुआ। इस ऋण माफी का कोई मतलब नहीं है। कहा कि सरकार ने गरीब किसानों के साथ मजाक किया है। किसानों को यह उम्मीद नहीं थी कि उनके साथ ऐसा होगा। कटेठी के उमाशंकर तिवारी ने बताया कि उनका सिर्फ 24 रुपये ऋण माफ हुआ है। इनका कहना है कि सरकार ने कर्ज माफी योजना को ऐसे नियमों में उलझा दिया है, जिससे अधिकांश किसान लाभ पाने से वंचित रह गए।
ऋण माफी योजना ऑनलाइन रही है। कई बार डाटा का मिलान हुआ है। इसके बाद नियमानुसार धनराशि माफ हो गई है। लेकिन इतनी कम धनराशि माफ होने के बारे में अभी तक जानकारी नहीं आई है। फिलहाल अगर ऐसे कोई मामले आते हैं तो उनकी जांच करा ली जाएगी। - केदारनाथ सिंह, सीडीओ
हरचंदापुर गांव के किसान देवनरायन ने बताया कि उन्होंने गजनेर की बैंक आफ बड़ौदा से फसली ऋण लिया था। जिसमें बीच में कुछ रुपये जमा कर दिया था। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं बताया कि उनका इस समय बाकी कितना है, लेकिन यह जरूर कहा कि ऋण माफी में उनका 2 रुपये 60 पैसे का लोन माफ हुआ है। उन्होंने कहा कि ऋण माफी के नाम पर यह मजाक किया गया है। इससे सरकारी आंकड़े दुरुस्त किए जा रहे हैं। ढाई रुपये कर्ज माफ करने का कोई मतलब नहीं है।
खम्हैला गांव के रतीराम दिवाकर ने बताया कि उन्होंने गांव की ही पूर्वी बड़ौदा उ.प्र. ग्रामीण बैंक से केसीसी बनवाया था। उनका 21 हजार रुपये का केसीसी कार्ड बना लेकिन उन्होंने ऋण उठाया नहीं था। फिर भी चार रुपये ऋण माफ होने की जानकारी मिली है। उन्होंने भी इसे मजाक बताया। जुरिया गांव के राकेश की पत्नी पुष्पा देवी ने बताया कि उनका 56 रुपये का ऋण माफ हुआ है। उन्होंने कहा कि इससे ज्यादा रुपये तो आधार कार्ड बनवाने में खर्च हो गए। कई बार बैंक के चक्कर लगाने पड़े। खम्हैला के रामआधार पाल ने बताया कि उनका 59 रुपये ऋण माफ हुआ। इस ऋण माफी का कोई मतलब नहीं है। कहा कि सरकार ने गरीब किसानों के साथ मजाक किया है। किसानों को यह उम्मीद नहीं थी कि उनके साथ ऐसा होगा। कटेठी के उमाशंकर तिवारी ने बताया कि उनका सिर्फ 24 रुपये ऋण माफ हुआ है। इनका कहना है कि सरकार ने कर्ज माफी योजना को ऐसे नियमों में उलझा दिया है, जिससे अधिकांश किसान लाभ पाने से वंचित रह गए।
ऋण माफी योजना ऑनलाइन रही है। कई बार डाटा का मिलान हुआ है। इसके बाद नियमानुसार धनराशि माफ हो गई है। लेकिन इतनी कम धनराशि माफ होने के बारे में अभी तक जानकारी नहीं आई है। फिलहाल अगर ऐसे कोई मामले आते हैं तो उनकी जांच करा ली जाएगी। - केदारनाथ सिंह, सीडीओ