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सेहतमंद शरीर में जल्द बनतीं एंटीबॉडी, तभी कोरोना होता पस्त, नशे और चटोरेपन से दूरी में ही भलाई
Thu, 03 Sep 2020 01:46 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Thu, 03 Sep 2020 01:46 PM IST
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कोरोना वायरस (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : PTI
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कोरोना से लड़ने और मरीजों की जान बचाने में प्लाज्मा थेरेपी सबसे अधिक मदद कर रही है। इस थेरेपी का एकमात्र अस्त्र शरीर की एंटीबॉडी है। एंटीबॉडी बनने से संक्रमण के गंभीर लक्षण नहीं उभरने पाते हैं। लेकिन एंटीबॉडी शरीर की सेहत यानी इम्युनिटी सिस्टम पर निर्भर करती है।
विशेषज्ञों की सलाह है कि कोरोना से सुरक्षा तभी मिलेगी जब शरीर सेहतमंद होगा। और जल्द अधिक एंटीबॉडी बनेंगी। इस संबंध में जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के अलावा किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी लखनऊ ने भी शोध शुरू कर दिया है। एंटीबॉडी का पता लगाने संबंधी ऑप्टिकल डेंसिटी पद्धति से जो संकेत मिल रहे हैं, उससे स्पष्ट है कि इम्युनिटी सिस्टम कमजोर होने से एंटीबॉडीज देर में बनती हैं।
नशा, चाट-चटोरापन, फास्ट फूड और आरामतलब लाइफ स्टाइल से शरीर कमजोर होता है। इससे एंटीबॉडी कम संख्या में बनती हैं और कोरोना अधिक समय तक नुकसान पहुंचाता है। संक्रमण मुक्त होने के बाद भी सेहतमंद होने में वक्त लग जाता है।
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विशेषज्ञों की सलाह है कि कोरोना से सुरक्षा तभी मिलेगी जब शरीर सेहतमंद होगा। और जल्द अधिक एंटीबॉडी बनेंगी। इस संबंध में जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के अलावा किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी लखनऊ ने भी शोध शुरू कर दिया है। एंटीबॉडी का पता लगाने संबंधी ऑप्टिकल डेंसिटी पद्धति से जो संकेत मिल रहे हैं, उससे स्पष्ट है कि इम्युनिटी सिस्टम कमजोर होने से एंटीबॉडीज देर में बनती हैं।
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नशा, चाट-चटोरापन, फास्ट फूड और आरामतलब लाइफ स्टाइल से शरीर कमजोर होता है। इससे एंटीबॉडी कम संख्या में बनती हैं और कोरोना अधिक समय तक नुकसान पहुंचाता है। संक्रमण मुक्त होने के बाद भी सेहतमंद होने में वक्त लग जाता है।
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जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के ब्लड ट्रांसफ्युजन विभाग की नोडल
अधिकारी डॉ. लुबना खान ने बताया कि इम्युनिटी का प्रभाव एंटीबॉडी पर पड़ता है। ऐसे में धूम्रपान, नशेबाजी से दूरी बहुत जरूरी है। घरों और क्षेत्रों में प्रदूषण बढ़ाना भी घातक है। पेस्टीसाइड्स वाली चीजों के सेवन से बचने में ही भलाई है। वहीं, केजीएमयू की ब्लड ट्रांसफ्युजन विभाग की प्रोफेसर एंड हेेड डॉ. तूलिका चंद्रा ने बताया कि इस संबंध में शोध
किया जा रहा है। लोगों की एंटीबॉडी की जांच हो रही है।
ऐसी बनती हैं एंटीबॉडीज
प्लाज्मा का लिम्फोसाइट नामक तत्व बी सेल बनाता है। यही सेल एंटीबॉडी में परिवर्तित हो जाती हैं। इसके अलावा टी सेल होती हैं, जो सीधे वायरस पर अटैक करती हैं। बी सेल वायरस के एंटीजन के लिहाज से अपना रूप धारण करती हैं। बी और टी सेल ही इम्युनिटी सिस्टम का महत्वपूर्ण घटक होती हैं। गलत खानपान और लाइफ स्टाइल से इनकी संख्या और क्वॉलिटी प्रभावित होती है।
फिट रहने के लिए ये करें
-मौसमी हरी सब्जियां व फल खाएं, रसायन में पके फलों का इस्तेमाल न करें
-सादा खाना खाएं, तली-भुनी चीजों और गरिष्ठ भोजन के सेवन से बचें
-पूरी नींद लें, योग क्रियाएं और व्यायाम बहुत जरूरी
-अनावश्यक तनाव न लें, मस्त और खुश रहने का प्रयास करें
-बीड़ी, सिगरेट, शराब और दूसरे नशों का सेवन छोड़ दें
अधिकारी डॉ. लुबना खान ने बताया कि इम्युनिटी का प्रभाव एंटीबॉडी पर पड़ता है। ऐसे में धूम्रपान, नशेबाजी से दूरी बहुत जरूरी है। घरों और क्षेत्रों में प्रदूषण बढ़ाना भी घातक है। पेस्टीसाइड्स वाली चीजों के सेवन से बचने में ही भलाई है। वहीं, केजीएमयू की ब्लड ट्रांसफ्युजन विभाग की प्रोफेसर एंड हेेड डॉ. तूलिका चंद्रा ने बताया कि इस संबंध में शोध
किया जा रहा है। लोगों की एंटीबॉडी की जांच हो रही है।
ऐसी बनती हैं एंटीबॉडीज
प्लाज्मा का लिम्फोसाइट नामक तत्व बी सेल बनाता है। यही सेल एंटीबॉडी में परिवर्तित हो जाती हैं। इसके अलावा टी सेल होती हैं, जो सीधे वायरस पर अटैक करती हैं। बी सेल वायरस के एंटीजन के लिहाज से अपना रूप धारण करती हैं। बी और टी सेल ही इम्युनिटी सिस्टम का महत्वपूर्ण घटक होती हैं। गलत खानपान और लाइफ स्टाइल से इनकी संख्या और क्वॉलिटी प्रभावित होती है।
फिट रहने के लिए ये करें
-मौसमी हरी सब्जियां व फल खाएं, रसायन में पके फलों का इस्तेमाल न करें
-सादा खाना खाएं, तली-भुनी चीजों और गरिष्ठ भोजन के सेवन से बचें
-पूरी नींद लें, योग क्रियाएं और व्यायाम बहुत जरूरी
-अनावश्यक तनाव न लें, मस्त और खुश रहने का प्रयास करें
-बीड़ी, सिगरेट, शराब और दूसरे नशों का सेवन छोड़ दें