{"_id":"5c21ccaabdec2256ca01dee7","slug":"anam-fatima-from-kanpur-got-golden-pen-honors-in-london","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"कानपुर की बेटी का लंदन में जलवा, इस वजह से मिला ‘गोल्डन पेन अवॉर्ड’","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कानपुर की बेटी का लंदन में जलवा, इस वजह से मिला ‘गोल्डन पेन अवॉर्ड’
Tue, 25 Dec 2018 12:34 PM IST
शिखा पांडेय
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Tue, 25 Dec 2018 12:34 PM IST
विज्ञापन
अनम फातिमा
कानपुर के डिफेंस कालोनी जाजमऊ की अनम फातिमा को लंदन विश्वविद्यालय में एमबीए की पढ़ाई के दौरान भारतीय महिला उद्यमियों को लेकर बनाए गए एक प्रोजेक्ट के लिए गोल्डन पेन अवार्ड से नवाजा गया है। फातिमा को उनके विश्वविद्यालय से प्रोजेक्ट मिला था कि इंडिया में महिलाओं को अपना उद्योग लगाने में किस तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
अपने इस प्रोजेक्ट पर गंभीरता से अध्ययन करने के लिए कुछ दिनों पहले वह लंदन से अपने शहर आईं। यहां पर उन्होंने कई महिला उद्यमियों से मिलकर उनके अनुभव लिए, उनकी समस्याओं और संघर्ष को विस्तार से समझा। इस अध्ययन को उन्होेंने बखूबी अपने प्रोजेक्ट का हिस्सा बनाया, जिसके लिए वह सम्मानित की गईं। इस सम्मान के जरिए उन्होंने कानपुर का नाम भी रोशन किया है। कैंट स्थित सेंट जोसेफ कॉलेज से अनम ने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की पढ़ाई की।
इंटरमीडिएट में उसे 95 प्रतिशत अंक मिले थे। इसके बाद उन्हें एमबीए की पढ़ाई के लिए लंदन विश्वविद्यालय में दाखिला मिल गया। लंदन विश्वविद्यालय में इस समय एमबीए करने वाली अनम कानपुर की एक मात्र छात्रा हैं। अनम महिला सशक्तीकरण की पक्षधर हैं। उनका कहना है कि महिला उद्यमियों पर उनका प्रोजेक्ट काफी तर्कसंगत था, जिसकी वजह से उन्हें गोल्डन पेन हासिल हुआ। यह सम्मान उन्हें 20 दिसंबर को विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह के अवसर पर मिला। अनम के पिता इश्तिखार अहमद उद्यमी हैं। जाजमऊ में अनाम टेनर्स के नाम से उनकी टेनरी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
अपने इस प्रोजेक्ट पर गंभीरता से अध्ययन करने के लिए कुछ दिनों पहले वह लंदन से अपने शहर आईं। यहां पर उन्होंने कई महिला उद्यमियों से मिलकर उनके अनुभव लिए, उनकी समस्याओं और संघर्ष को विस्तार से समझा। इस अध्ययन को उन्होेंने बखूबी अपने प्रोजेक्ट का हिस्सा बनाया, जिसके लिए वह सम्मानित की गईं। इस सम्मान के जरिए उन्होंने कानपुर का नाम भी रोशन किया है। कैंट स्थित सेंट जोसेफ कॉलेज से अनम ने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की पढ़ाई की।
विज्ञापन
इंटरमीडिएट में उसे 95 प्रतिशत अंक मिले थे। इसके बाद उन्हें एमबीए की पढ़ाई के लिए लंदन विश्वविद्यालय में दाखिला मिल गया। लंदन विश्वविद्यालय में इस समय एमबीए करने वाली अनम कानपुर की एक मात्र छात्रा हैं। अनम महिला सशक्तीकरण की पक्षधर हैं। उनका कहना है कि महिला उद्यमियों पर उनका प्रोजेक्ट काफी तर्कसंगत था, जिसकी वजह से उन्हें गोल्डन पेन हासिल हुआ। यह सम्मान उन्हें 20 दिसंबर को विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह के अवसर पर मिला। अनम के पिता इश्तिखार अहमद उद्यमी हैं। जाजमऊ में अनाम टेनर्स के नाम से उनकी टेनरी है।
विज्ञापन
Trending Videos
अनम फातिमा
प्रोजेक्ट की मुख्य बातें जिसने सम्मान दिलाया
अनम फातिमा ने भारतीय महिला उद्यमियों पर अध्ययन करते समय यह पाया कि आम तौर पर यहां की महिलाओं में आत्मविश्वास का स्तर काफी कमजोर रहता है। यदि वे अपने आपसे कुछ करना शुरू भी करती हैं तो दूसरों की राय को अधिक प्राथमिकता देती हैं। अक्सर ऐसी महिलाएं जरा सा असफल होने पर परिवार की तरफ से इस ताने का भी शिकार होती हैं कि रहने दो तुमसे नहीं हो पाएगा।
फातिमा ने अपने प्रोजेक्ट में लिखा है कि भारतीय महिलाओं की सोच और संघर्ष करने की क्षमता दूसरे देशों की महिलाओं से कहीं बेहतर है। सिर्फ वह इस मामले में कमजोर पड़ जाती हैं कि जो उनके मन में है, उसे लोगों के सामने पूरी दृढ़ता से कैसे प्रस्तुत करें। यही वजह है कि वे लंबे समय तक संघर्ष करती हैं, इसके बाद उन्हें सफलता मिल पाती है।
इस तरह के कई उदाहरण भी दिए हैं। अनम ने अपने प्रोजेक्ट के निष्कर्ष में लिखा है कि भारतीय महिलाएं सुनें सबकी और करें अपने मन की। ऐसे में उन्हें तरक्की शत प्रतिशत हासिल होगी। ऐसी कई महिलाओं का उदाहरण भी दिया है। इस उदाहरण में उन्होंने खुद को भी रखा है।
अनम फातिमा ने भारतीय महिला उद्यमियों पर अध्ययन करते समय यह पाया कि आम तौर पर यहां की महिलाओं में आत्मविश्वास का स्तर काफी कमजोर रहता है। यदि वे अपने आपसे कुछ करना शुरू भी करती हैं तो दूसरों की राय को अधिक प्राथमिकता देती हैं। अक्सर ऐसी महिलाएं जरा सा असफल होने पर परिवार की तरफ से इस ताने का भी शिकार होती हैं कि रहने दो तुमसे नहीं हो पाएगा।
फातिमा ने अपने प्रोजेक्ट में लिखा है कि भारतीय महिलाओं की सोच और संघर्ष करने की क्षमता दूसरे देशों की महिलाओं से कहीं बेहतर है। सिर्फ वह इस मामले में कमजोर पड़ जाती हैं कि जो उनके मन में है, उसे लोगों के सामने पूरी दृढ़ता से कैसे प्रस्तुत करें। यही वजह है कि वे लंबे समय तक संघर्ष करती हैं, इसके बाद उन्हें सफलता मिल पाती है।
इस तरह के कई उदाहरण भी दिए हैं। अनम ने अपने प्रोजेक्ट के निष्कर्ष में लिखा है कि भारतीय महिलाएं सुनें सबकी और करें अपने मन की। ऐसे में उन्हें तरक्की शत प्रतिशत हासिल होगी। ऐसी कई महिलाओं का उदाहरण भी दिया है। इस उदाहरण में उन्होंने खुद को भी रखा है।