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शर्मसार हुई मानवताः खुली सरकारी दावों की पोल, नेत्रहीन पत्नी को ठेलिया पर लादकर पहुंचा अस्पताल
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Updated Fri, 20 Jul 2018 07:40 AM IST
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घायल पत्नी को ठेलिया मं लादकर ले जाता पति
- फोटो : अमर उजाला
प्रदेश सरकार की स्वास्थ्य व्यवस्था को विभाग के ही कर्मचारी पलीता लगा रहे हैं। यूपी के महोबा जिले में गुरुवार सुबह गाय के हमले घायल नेत्रहीन पत्नी को अस्पताल लाने के लिए पति बार-बार 108 एंबुलेंस को फोन करता रहा, पर एंबुलेंस नहीं आई।
थक-हारकर उसने पत्नी को ठेलिया पर लिटाया और अस्पताल पहुंचा, लेकिन यहां कर्मचारियों ने स्ट्रेचर तक मुहैया नहीं कराया। पड़ोसियों की मदद से उठाकर वार्ड के बेड पर ले गया। उपचार कराने के बाद भी उसे ठेलिया से ही पत्नी को घर ले आना पड़ा।
सरकारी दावों की पोल खोलती इस घटना पर पीएचसी जैतपुर प्रभारी डॉ. प्रदीप राजपूत ने अपनी सफाई दी। कहा कि अस्पताल में महिला को घायल अवस्था में लाया गया था। उपचार के बाद परिजन महिला को बिना बताए घर ले गए। जानकारी दी जाती तो वाहन की व्यवस्था कराकर उसे घर भेजा जाता।
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थक-हारकर उसने पत्नी को ठेलिया पर लिटाया और अस्पताल पहुंचा, लेकिन यहां कर्मचारियों ने स्ट्रेचर तक मुहैया नहीं कराया। पड़ोसियों की मदद से उठाकर वार्ड के बेड पर ले गया। उपचार कराने के बाद भी उसे ठेलिया से ही पत्नी को घर ले आना पड़ा।
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सरकारी दावों की पोल खोलती इस घटना पर पीएचसी जैतपुर प्रभारी डॉ. प्रदीप राजपूत ने अपनी सफाई दी। कहा कि अस्पताल में महिला को घायल अवस्था में लाया गया था। उपचार के बाद परिजन महिला को बिना बताए घर ले गए। जानकारी दी जाती तो वाहन की व्यवस्था कराकर उसे घर भेजा जाता।
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अस्पताल कर्मचारियों से मदद मांगी, किसी ने भी उसे सरकारी वाहन मुहैया नहीं कराया
अस्पताल परिसर में ठेलिया पर लेटी घायल महिला
- फोटो : अमर उजाला
इधर, कुलपहाड़ थाने के जैतपुर कस्बा निवासी कमल प्रसाद ने बताया कि गुरुवार सुबह नौ बजे उसकी पत्नी अनीता (40) गाय के हमले से घायल हो गई। सींग लगने से उसका एक पैर फट गया। कमल ने खुद और कई लोगों से भी 108 नंबर एंबुलेंस के लिए फोन कराया, पर एक घंटे तक एंबुलेंस नहीं पहुंची। तब सुबह दस बजे उसने हथठेलिया पर पत्नी को लिटाया और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचा।
वहां कर्मियों ने कमल को स्ट्रेचर नहीं दिया। उपचार कराने के बाद दोबारा ठेलिया पर ही लिटाकर घर ले आया। कमल ने बताया कि अस्पताल कर्मचारियों से मदद मांगी, पर किसी ने भी उसे सरकारी वाहन मुहैया नहीं कराया। वह मजदूरी करके किसी तरह तीन बच्चों व परिवार का पेट पाल रहा है।
वहां कर्मियों ने कमल को स्ट्रेचर नहीं दिया। उपचार कराने के बाद दोबारा ठेलिया पर ही लिटाकर घर ले आया। कमल ने बताया कि अस्पताल कर्मचारियों से मदद मांगी, पर किसी ने भी उसे सरकारी वाहन मुहैया नहीं कराया। वह मजदूरी करके किसी तरह तीन बच्चों व परिवार का पेट पाल रहा है।