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अपराजिता-100 मिलियन स्माइल्सः उठ जाग नारी, अब लड़ बस अपने लिए, तुझे किसी की जरूरत नहीं
Mon, 14 Jan 2019 12:27 PM IST
शिखा पांडेय
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Mon, 14 Jan 2019 12:27 PM IST
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कानपुर में ‘अमर उजाला अपराजिता: 100 मिलियन स्माइल्स’ कार्यक्रम
- फोटो : अमर उजाला
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‘उठ जाग नारी, अब लड़ बस अपने लिए, तुझे किसी की जरूरत नहीं है, तू पूरी है खुद के लिए, हर भाव का तूही स्रोत है, तू संपन्न है, संपूर्ण है...’ बेसिक शिक्षिका अनीता राय ने यह पंक्तियां जैसे ही पढ़ीं, ‘अमर उजाला’ कार्यालय हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। मौका था कानपुर में ‘अमर उजाला अपराजिता : 100 मिलियन स्माइल्स’ के तहत आयोजित महिला सशक्तीकरण आधारित परिचर्चा का।
इसमें अलग-अलग क्षेत्र से आईं महिलाओं ने अपराजिता मुहिम को सराहने के साथ उसको सशक्त करने की आवाज उठाई। कहा कि महिलाओं को छुपी प्रतिभा को सामने लाने के लिए खुद प्रयास करने होंगे। परिचर्चा में होममेकर नीतू भट्ट, अर्पिता शर्मा, शिक्षिका अनीता राय, रेनू अवस्थी, रंजना कोटर स्वरूप, शिक्षिका और समाजसेविका डॉ. संगीता श्रीवास्तव, बैंकिंग सेक्टर से श्रद्धा शर्मा, बीएसएनएल से नीता शर्मा ने अपने विचार प्रस्तुत किए। वक्ताओं ने छुपी प्रतिभा को निखारने, किसी ने हर क्षेत्र में महिलाओं को जागरूक रहने, अभिभावकों को अपनी बेटियों को खुला आकाश देने, लड़कियों को एक टेक्निकल कोर्स में पारंगत करने के मुद्दे उठाए।
महिलाओं ने यूं बुलंद की आवाज
छिपी प्रतिभा को उभारें
घर के काम निबटाने के बाद महिलाएं गप्पें मारने के बजाए अपने हुनर निखारें। सभी में एक न एक प्रतिभा छिपी होती है। महिलाएं मोहल्ले में ऐसे कार्यक्रम आयोजित करें, इससे समय का उपयोग होगा और प्रतिभा भी निखरेगी, इनकम भी बढ़ेगी। कई ऐसी महिलाएं हैं, जिन्होंने घर बैठे कमाई के कई संसाधन खोजे हैं।
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- रेनू अवस्थी, शिक्षिका, प्रभात सीनियर सेकेंडरी स्कूल
हर बात करें साझा
महिलाएं अपने बेटे-बेटियों से हर बात साझा करें। शिक्षा घर से शुरू होती है। अधिकारों, कानूनों के बारे में दोनों को बताएं। आत्मनिर्भरता जरूरी है। बेटी हो खाना तो बनाना ही पड़ेगा, बचपन से उनके मन में न भरें। बेटियों के हुनर को तराशने का काम अभिभावकों को करना होगा।
- नीता शर्मा, बीएसएनएल
सोशल मीडिया को बनाएं जरिया
अपराजिता की मुहिम को सोशल मीडिया से आगे बढ़ाएं। फेसबुक पर पेज बनाएं। फेसबुक पेज महिलाओं के हुनर को दिखाने का अच्छा प्लेटफार्म बन सकता है। साथ ही ऐसी व्यवस्था हो कि अगर किसी महिला को कोई परेशानी हो या अपने अधिकारों के बारे में जानना हो, तो जान सकें।
- अर्पिता शर्मा, होममेकर
महिलाओं को शक्ति याद दिलाने की जरूरत
जैसे हनुमानजी को उनकी शक्ति याद दिलाई गई थी, वैसे ही महिलाओं को भी उनकी शक्ति याद दिलाने की जरूरत है। ‘हम नहीं कर सकते’ जैसे शब्दों को अपनी डिक्शनरी से बाहर निकाल दें। गांवों में महिला सशक्तीकरण की ज्यादा जरूरत है। महिलाओं के लिए शिक्षा, हेल्थ, कानून, अधिकारों को बताने वाले कैंप लगाए जाएं।
- अनीता राय, बेसिक शिक्षिका
पुरुषों की हो काउंसिलिंग
पुरुषों की काउंसिलिंग का सबसे जरूरी कार्यक्रम महिलासशक्तीकरण होना चाहिए, जहां उनको बताएं कि महिलाएं केवल रोटी बनाने वाली मशीन नहीं हैं। उनके हुनर को आगे बढ़ाने के लिए पुरुषों को भी आगे आना पड़ेगा।
- नीतू भट्ट, होममेकर
हर परिस्थिति से जूझना होगा
‘तुम रहने दो, वो भइया कर लेगा’, ‘पापा के साथ ही बाहर जाना’... बचपन से इन्हीं बातों के साथ पली-बढ़ीं लड़कियां अपने अधिकारों के लिए नहीं लड़ सकतीं। लड़कियों को जूझना सिखाएं। कोई टेक्निकल कोर्स भी कराएं।
- डॉ. संगीता श्रीवास्तव, डीजी कॉलेज में प्रोफेसर और सोशल वर्कर
बैंकिंग समझ के लिए लगें कैंप
महिलाएं खाते खुलवाने या एटीएम चलाने में डरती हैं। बोझ मानते हुए इससे पीछे हटती हैं। ऐसी महिलाओं के लिए बैंकिंग कैंप आयोजित कर उनको सुविधाओं के बारे में बताया जाए। यह महिलाओं को अपराजित बनाने जैसा ही है।
- श्रद्धा शुक्ला, एसबीआई
शिक्षा का हो प्रचार-प्रसार
शिक्षा का प्रचार-प्रसार बेहद जरूरी है। शिक्षा से आत्मविश्वास आता है, जो महिलाओं को सशक्त बनाता है। अपने पैरों पर खड़ी महिलाओं को अन्य महिलाओं की तुलना में कम परेशानियां झेलनी पड़ती हैं।
- रंजना कोटार स्वरूप, बेसिक टीचर
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इसमें अलग-अलग क्षेत्र से आईं महिलाओं ने अपराजिता मुहिम को सराहने के साथ उसको सशक्त करने की आवाज उठाई। कहा कि महिलाओं को छुपी प्रतिभा को सामने लाने के लिए खुद प्रयास करने होंगे। परिचर्चा में होममेकर नीतू भट्ट, अर्पिता शर्मा, शिक्षिका अनीता राय, रेनू अवस्थी, रंजना कोटर स्वरूप, शिक्षिका और समाजसेविका डॉ. संगीता श्रीवास्तव, बैंकिंग सेक्टर से श्रद्धा शर्मा, बीएसएनएल से नीता शर्मा ने अपने विचार प्रस्तुत किए। वक्ताओं ने छुपी प्रतिभा को निखारने, किसी ने हर क्षेत्र में महिलाओं को जागरूक रहने, अभिभावकों को अपनी बेटियों को खुला आकाश देने, लड़कियों को एक टेक्निकल कोर्स में पारंगत करने के मुद्दे उठाए।
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महिलाओं ने यूं बुलंद की आवाज
छिपी प्रतिभा को उभारें
घर के काम निबटाने के बाद महिलाएं गप्पें मारने के बजाए अपने हुनर निखारें। सभी में एक न एक प्रतिभा छिपी होती है। महिलाएं मोहल्ले में ऐसे कार्यक्रम आयोजित करें, इससे समय का उपयोग होगा और प्रतिभा भी निखरेगी, इनकम भी बढ़ेगी। कई ऐसी महिलाएं हैं, जिन्होंने घर बैठे कमाई के कई संसाधन खोजे हैं।
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- रेनू अवस्थी, शिक्षिका, प्रभात सीनियर सेकेंडरी स्कूल
हर बात करें साझा
महिलाएं अपने बेटे-बेटियों से हर बात साझा करें। शिक्षा घर से शुरू होती है। अधिकारों, कानूनों के बारे में दोनों को बताएं। आत्मनिर्भरता जरूरी है। बेटी हो खाना तो बनाना ही पड़ेगा, बचपन से उनके मन में न भरें। बेटियों के हुनर को तराशने का काम अभिभावकों को करना होगा।
- नीता शर्मा, बीएसएनएल
सोशल मीडिया को बनाएं जरिया
अपराजिता की मुहिम को सोशल मीडिया से आगे बढ़ाएं। फेसबुक पर पेज बनाएं। फेसबुक पेज महिलाओं के हुनर को दिखाने का अच्छा प्लेटफार्म बन सकता है। साथ ही ऐसी व्यवस्था हो कि अगर किसी महिला को कोई परेशानी हो या अपने अधिकारों के बारे में जानना हो, तो जान सकें।
- अर्पिता शर्मा, होममेकर
महिलाओं को शक्ति याद दिलाने की जरूरत
जैसे हनुमानजी को उनकी शक्ति याद दिलाई गई थी, वैसे ही महिलाओं को भी उनकी शक्ति याद दिलाने की जरूरत है। ‘हम नहीं कर सकते’ जैसे शब्दों को अपनी डिक्शनरी से बाहर निकाल दें। गांवों में महिला सशक्तीकरण की ज्यादा जरूरत है। महिलाओं के लिए शिक्षा, हेल्थ, कानून, अधिकारों को बताने वाले कैंप लगाए जाएं।
- अनीता राय, बेसिक शिक्षिका
पुरुषों की हो काउंसिलिंग
पुरुषों की काउंसिलिंग का सबसे जरूरी कार्यक्रम महिलासशक्तीकरण होना चाहिए, जहां उनको बताएं कि महिलाएं केवल रोटी बनाने वाली मशीन नहीं हैं। उनके हुनर को आगे बढ़ाने के लिए पुरुषों को भी आगे आना पड़ेगा।
- नीतू भट्ट, होममेकर
हर परिस्थिति से जूझना होगा
‘तुम रहने दो, वो भइया कर लेगा’, ‘पापा के साथ ही बाहर जाना’... बचपन से इन्हीं बातों के साथ पली-बढ़ीं लड़कियां अपने अधिकारों के लिए नहीं लड़ सकतीं। लड़कियों को जूझना सिखाएं। कोई टेक्निकल कोर्स भी कराएं।
- डॉ. संगीता श्रीवास्तव, डीजी कॉलेज में प्रोफेसर और सोशल वर्कर
बैंकिंग समझ के लिए लगें कैंप
महिलाएं खाते खुलवाने या एटीएम चलाने में डरती हैं। बोझ मानते हुए इससे पीछे हटती हैं। ऐसी महिलाओं के लिए बैंकिंग कैंप आयोजित कर उनको सुविधाओं के बारे में बताया जाए। यह महिलाओं को अपराजित बनाने जैसा ही है।
- श्रद्धा शुक्ला, एसबीआई
शिक्षा का हो प्रचार-प्रसार
शिक्षा का प्रचार-प्रसार बेहद जरूरी है। शिक्षा से आत्मविश्वास आता है, जो महिलाओं को सशक्त बनाता है। अपने पैरों पर खड़ी महिलाओं को अन्य महिलाओं की तुलना में कम परेशानियां झेलनी पड़ती हैं।
- रंजना कोटार स्वरूप, बेसिक टीचर