वाद-विवाद प्रतियोगिता: 'सोशल मीडिया पर प्रतिबंध देशहित में जरूरी’, छात्रों ने रखी मन की बात
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नींव के पत्थर तुम्हें सौगंध अपनी दे रहे, जो धरोहर दी तुम्हें वह हाथ से जाने न देना, देश की स्वाधीनता पर आंच तुम आने न देना...। सोशल मीडिया के इस दौर में देश की सुरक्षा दांव पर लग गई है। हैकर इसका सबसे अधिक गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। अब यह युवाओं की ही जिम्मेदारी है कि कैसे सोशल मीडिया के मायाजाल से बचें।
अपने इस ओजस्वी वक्तव्य की बदौलत कानपुर में पीपीएन डिग्री कॉलेज की बीए द्वितीय वर्ष की छात्रा मुदिता मिश्रा को अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से आयोजित मुरारीलाल माहेश्वरी स्मृति अखिल भारतीय वाद-विवाद प्रतियोगिता ‘विचार प्रवाह’ के जिला स्तरीय आयोजन का विजेता घोषित किया गया।
'सोशल मीडिया पर प्रतिबंध देशहित में जरूरी’ विषय पर प्रतिभागियों ने पक्ष और विपक्ष में अपने विचार रखे।जिला स्तर पर आयोजित इस प्रतियोगिता का आयोजन डीएवी कॉलेज के सहयोग से उन्हीं के ऑडिटोरियम में हुआ। प्रतियोगिता को कराने में दयानंद शिक्षण संस्थान का भी सहयोग रहा।
कार्यक्रम की मुख्य डॉ. वीरेंद्र स्वरूप एजुकेशन फाउंडेशन की सचिव कुमकुम स्वरूप रहीं। प्रतियोगिता में 11 डिग्री कॉलेजों के प्रतिभागियों ने विषय के पक्ष और विपक्ष में अपने विचार प्रस्तुत किए। प्रतियोगिता का निष्कर्ष रहा कि सोशल मीडिया के प्रयोग पर प्रतिबंध नहीं बल्कि अंकुश लगे।
दूसरे स्थान पर पीपीएन डिग्री कॉलेज के छात्र अमन शुक्ला, तीसरे स्थान पर अर्मापुर पीजी कॉलेज के किशन सिंह रहे। विजेता को पांच हजार रुपये का पुरस्कार दिया गया। दूसरे स्थान रहे प्रतिभागी को तीन हजार, तीसरे को दो हजार और दो प्रतिभागियों को एक-एक हजार रुपये का पुरस्कार दिया गया।
डीएवी कॉलेज की कृति जैन और डीजी की मानसी द्विवेदी को सांत्वना पुरस्कार मिला। प्रतियोगिता का शुभारंभ डीएवी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अमित श्रीवास्तव, निर्णायक मंडल में मौजूद कानपुर विद्या मंदिर की पूर्व प्राचार्य डॉ. आशा रानी राय, उत्कर्ष अकादमी की निदेशक अलका दीक्षित और हिंदुस्तानी एकेडमी उत्तर प्रदेश की आभा द्विवेदी ने किया।
निर्णायक मंडल ने प्रतिभागियों के विषय, उच्चारण, भाव भंगिमाओं एवं आवाज के उतार-चढ़ाव और प्रस्तुतीकरण के आधार पर प्रतिभागियों को अंक दिए। डॉ. आशा रानी राय ने कहा कि अपने उच्चारण का विशेष ध्यान दें। ‘स’ और ‘श’ में फर्क समझें, कई बार अच्छा भाषण भी उच्चारण की वजह से बेहद खराब लगता है।
अलका दीक्षित ने कहा कि रटे रटाए शब्द न बोलें। वाद विवाद प्रतियोगिता में प्रतिभागियों की बातों को सुनकर तर्क करें। आभा द्विवेदी ने वाद विवाद प्रतियोगिता में बॉडी लैंग्वेज पर फोकस करने के लिए कहा।
संचालन केमिस्ट्री विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अमर श्रीवास्तव ने किया। व्यवस्थाओं की देखरेख अंग्रेजी विभाग की सीनियर असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. श्रुति श्रीवास्तव और आभार स्टैटिक्स विभाग की डॉ. निधि नागर ने किया। डिग्री कॉलेज के छात्र हर्ष, रुचिर, नेहा, सलमान, सिमरन, आदित्य, रुद्रांक, उज्ज्वल ने भी सहयोग किया।
छात्र-छात्राओं ने रखे विचार
- अर्मापुर कॉलेज के किशन सिंह ने कहा कि चुनाव आयोग ने भी माना है कि सोशल मीडिया के जरिए चुनाव सस्ता हो सकता है। सोशल मीडिया से लोगों ने हमारी वैज्ञानिक शक्ति को पहचाना है। ऐसे सोशल मीडिया पर रोक नहीं लगनी चाहिए।
- पीपीएन कॉलेज के अमन शुक्ला ने कहा कि हम चीजों का सही समय में सहीं प्रयोग करें तो सकारात्मक प्रभाव दिखेगा। उसे गलत ठहराने से कुछ नहीं होना। बस जरूरत है तो थोड़े अंकुश और विवेक से कार्य करने की।
- दयानंद पीजी गर्ल्स कॉलेज की मानसी द्विवेदी ने कहा कि हम सोशल मीडिया में ट्वीट कर झट से समस्या का समाधान पा लेते हैं। देश विदेश में रहने के बाद भी परिवार से जुड़े रहते हैं। सोशल मीडिया के लिए कड़े कानून बनाने की जरूरत है, प्रतिबंध लगाने की नहीं।
- डीएवी कॉलेज की कृति जैन का कहना है कि सोशल मीडिया ने अकेलेपन को दूर किया है। सरकार से सीधे जुड़ने का मौका मिला है। अपनी समस्याओं को अधिकारियों तक पहुंचने में आप स्वतंत्र हैं।
ये कॉलेज रहे शामिल
बीएनडी कॉलेज की अनुष्का शर्मा, अन्नू निसल, सरस्वती महिला महाविद्यालय से दिव्या तिवारी, रेश्मा आरा, एएनडी कॉलेज की आरती तिवारी, अनुप्रिया कुशवाहा, आस्था कॉलेज के अक्षत विक्रम, आकांक्षा राठौर, वीएसएसडी के शाल्वक द्विवेदी, विवेक द्विवेदी, डीएवी कॉलेज के आरिफ और कृति जैन, अभिनव सेवा संस्थान महाविद्यालय की आकांक्षा श्रीवास्तव, निधि यादव, डीजी कॉलेज की रूपल कटियार और मानसी द्विवेदी, पीपीएन कॉलेज की मुदिता मिश्रा और अमन शुक्ला, महिला महाविद्यालय की आशी सिंह और आयुषि तिवारी और अरमापुर पीजी कॉलेज की सुप्रिया शुक्ला और किशन सिंह शामिल रहे।
बातचीत
ऐसी प्रतियोगिताएं वास्तव में छात्रों के लिए बड़ा मंच होती हैं, जिनके भीतर प्रतिभा का भंडार छिपा है। - शाल्वक द्विवेदी, वीएसएसडी
प्रतिभागियों के विचारों को सुनकर काफी अच्छा लगा। जीतना हारना अलग बात है, ज्ञान काफी बढ़ा। - विधि यादव, अभिनव सेवा संस्थान
निर्णायक मंडल ने कई बारीकियों को बताया। जिनको आने वाली प्रतियोगिताओं में ध्यान रखा जाएगा। - अनुप्रिया कुशवाहा, एएनडी
मुकाबला कठिन था। काफी नई बातें सुनने को मिलीं। ऐसी प्रतियोगिताएं छात्रों का उत्साह बढ़ाती हैं। - विवेक द्विवेदी, वीएसएसडी