फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   Allahabad High Court big decision on examination fee

इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, परीक्षा शुल्क बढ़ोतरी पर लगी रोक, दस लाख छात्रों को मिली राहत

Sat, 17 Aug 2019 10:30 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Sat, 17 Aug 2019 10:30 AM IST
विज्ञापन
Allahabad High Court big decision on examination fee
इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) प्रशासन को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फीस वृद्धि मामले में बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों में परीक्षा और खेल शुल्क में की गई बढ़ोतरी पर रोक लगा दी है। हाईकोर्ट के इस फैसले से महाविद्यालयों में पढ़ने वाले करीब दस लाख छात्रों को बड़ी राहत मिली है। 

विज्ञापन


कोर्ट ने यह रोक पं. कुंदन लाल शुक्ल महाविद्यालय, रनिया, सरला द्विवेदी महाविद्यालय अकबरपुर, केएम कॉलेज ऑफ एजुकेशन घाटमपुर, पूज्य भाऊराव देवरस महाविद्यालय सहित 14 अन्य महाविद्यालयों की याचिका पर लगाई है।

विज्ञापन

13 अगस्त को कोर्ट ने यह भी आदेश दिया है कि जब तक इस मामले में अंतिम फैसला नहीं आ जाता तब तक विश्वविद्यालय के छात्रों से पुराने नियम के तहत ही परीक्षा शुल्क लिया जाए। साथ ही कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इस पर 30 अगस्त को सुनवाई करने का आदेश दिया है।

इसी दिन विश्वविद्यालय प्रशासन को जवाब दाखिल करने को कहा गया है। हाईकोर्ट ने इस मसले को 30 अगस्त के अपने टॉप-10 मामले की सूची में रखने को भी कहा है।

इतनी बढ़ाई गई थी फीस

विश्वविद्यालय प्रशासन ने बीते माह स्नातक (बीए, बीएससी, बीकॉम) में 885 रुपये से परीक्षा शुल्क बढ़ाकर 1185 रुपये कर दिया था। इसके अलावा प्रैक्टिकल और मौखिक परीक्षाओं के लिए अलग से सौ रुपये शुल्क देना था। इसी तरह परास्नातक (एमए, एमएससी और एमकॉम) में शुल्क 835 रुपये से बढ़ाकर 1385 रुपये कर दिया गया था।

बीएड के छात्रों का परीक्षा शुल्क 1300 से बढ़ाकर 1500, एमएड में शुल्क 1700 से दो हजार कर दिया गया था। बीएससी नर्सिंग के छात्रों को शुल्क एक हजार के बजाय दो हजार रुपये, बीएससी नर्सिंग चार वर्षीय प्रोग्राम में तीन हजार से बढ़ाकर चार हजार रुपये, एमबीबीएस, बीएमएस, बीयूएमएस के लिए शुल्क 7500 हजार रुपये से बढ़ाकर नौ हजार रुपये कर दिया गया था।

वहीं मेडिकल के पीजी कोर्स में शुल्क 10 हजार से बढ़ाकर 12 हजार, एलएलबी और बीए-एलएलबी में 1020 से बढ़ाकर 1500 रुपये कर दिया गया था। क्रीड़ा शुल्क भी बीस रुपये के बजाय 40 रुपये कर दिया गया था।

विज्ञापन

शासन से बिना मंजूरी लिए बढ़ाई फीस

परीक्षा शुल्क बढ़ोतरी के खिलाफ याचिका दायर करने वाले पं. कुंदन लाल शुक्ला महाविद्यालय, रनिया के प्रबंधक डॉ. सतीश शुक्ला बताते हैं कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने दो वर्ष पूर्व ही परीक्षा शुल्क में जबरदस्त बढ़ोतरी की थी। अब एक बार फिर से इसमें काफी बढ़ोतरी की गई है।

यह शुल्क ग्रामीण क्षेत्र के छात्र देने में असमर्थ हैं। इसके अलावा जो बढ़ोतरी की गई है वह भी नियमों के विपरीत है। इसके लिए विश्वविद्यालय प्रशासन को पहले प्रदेश सरकार से अनुमति लेनी चाहिए थी। यही कारण है कि 15 महाविद्यालयों संग हमने इस फैसले के खिलाफ याचिका दायर की थी।

ईडब्ल्यूएस मामले में भी साधी चुप्पी

गलत तरीके से इकनॉमिकल वीकर सेक्शन (ईडब्ल्यूएस) कोटा लागू करने के मामले में भी विश्वविद्यालय प्रशासन चुप हो गया है। इसकी शिकायत छात्रों ने प्रदेश सरकार से भी की है। इसके अलावा अब छात्र और कुछ महाविद्यालय इसको लेकर हाईकोर्ट जाने की तैयारी में भी हैं। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed