यूपी की सभी नदियां की जाएंगी प्रदूषण मुक्त, ये है एनजीटी की तैयारी
कानपुर में गंगा के बाद अब प्रदेश भर की नदियों के जल की गुणवत्ता बेहतर करने का अभियान प्रदेश स्तर पर शुरू हो गया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) के आदेश पर यह काम उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कर रहा है। यह काम कई स्तर पर होगा। सबसे पहले नदियों और उसमें गिरने वाले नालों की गूगल मैपिंग की जा रही है। दो महीने के अंतराल में इसकी रिपोर्ट एनजीटी को सौंपी जानी है।
प्रदेश से होकर बहने वाली गंगा, यमुना, घाघरा और सरयू को मिलाकर छोटी, बड़ी सभी नदियों की संख्या 31 है। इन नदियों के किनारे कितनी औद्योगिक इकाइयां हैं, कितने नाले इन नदियों में गिरते हैं। इसके साथ ही इन नदियों के पानी की गुणवत्ता कैसी है, इसका भी परीक्षण शुरू हो चुका है।
एनजीटी के आदेश के अनुसार इन नदियों को गंगा जल की तरह ही प्रदूषण मुक्त करने की योजना है। इसके साथ ही इन नदियों के किनारों को विकसित करने की योजना भी आगे बनाई जाएगी। एक महीने पहले एनजीटी की तरफ से उप्र पीसीबी को यह आदेश दिया गया था। इसके लिए संबंधित विभागों के अनुसार काम का बंटवारा भी कर दिया गया है।
अकेले गंगा में गिर रहे थे 1100 नाले
नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा (एनएमसीजी) की तरफ से गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के अभियान की शुरुआत से पहले तक गंगा में छोटे-बड़े 1100 नाले गिर रहे थे। कानपुर में इसमें काफी सुधार आया है। बाकी जगहों पर गंगा में गिरने वाले नालों को रोकने की प्रक्रिया एनएमसीजी की तरफ से चल रही है।
यूपी की नदियों को लेकर यह है एनजीटी का प्लान
- सभी नदियों के जल की गुणवत्ता उसमें रहने वाले जलीय जंतुओं के लिए बेहतर बनाना है।
- इन नदियों में सीवरेज और औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले हानिकारक केमिकल जाने से रोकना है।
- नदियों के किनारे की जमीनों को उपजाऊ बनाने और उनको व्यावसायिक खेती में प्रयोग लायक बनाना है।
- शहरी क्षेत्र में नदियों के किनारे पाथ वे और घाट बनाकर उसे सुंदर बनाना है।
प्रदेश की नदियों का जल गुणवत्तापरक बनाने के लिए एनजीटी की बड़ी योजना है। एनजीटी के आदेश पर यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने प्रदेश भर की नदियों का डेटा कलेक्ट करना शुरू कर दिया है। इसमें गिरने वाले नालों की गूगल मैपिंग भी चल रही है। जल्द ही इसकी रिपोर्ट एनजीटी को सौंपी जाएगी।
- कुलदीप मिश्र मुख्य पर्यावरण अधिकारी यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड