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Kanpur News: सजा सुनते ही फफक पड़े चारों दोषी, पीड़ित बोले फांसी पर लटका दो
Sun, 17 Dec 2023 01:06 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Sun, 17 Dec 2023 01:06 AM IST
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कानपुर देहात। मासूम की हत्या के मामले में शनिवार दोपहर 12 बजे से सुनवाई हुई। डेढ़ घंटे दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की एडीजे-13 बकार शमीम रिजवी ने दलील सुनी। इस समय तक दोषियों के चेहरे पर किए का पछतावा नहीं झलक रहा था। दोपहर साढ़े तीन बजे जैसे ही फैसला सुनाया गया, तो सुनैना, परशुराम, अंकुल व उसका साथी वीरेन फफक कर अदालत के अंदर ही रोने लगे। फैसले पर मृतका की मां व पिता ने कहा कि दरिंदों को जिंदा फांसी पर लटका दो। पीड़ित परिवार ने फैसला आने के बाद न्याय मिलने की बात कही।
मृतका की मां व पिता ने बताया कि बेटी की साथ दरिंदगी दिखाई । ऐसे लोगों को फांसी से कम सजा नहीं होनी चाहिए। बताया कि गांव में हुए एक विवाद में अंकुल ने उसके परिवार को धमकी दी थी। इसके बाद ही उसकी बेटी के साथ ऐसी घटना घटित हुई। दीवाली का त्योहार था पूरा परिवार खुश था, इसी खुशी में अचानक से मातम छा गया। तब से लेकर आज तक हमारे कलेजे को ठंडक नहीं मिली। हम दोनों अपने आंखों के सामने दरिंदों को उसी तरह तड़पना देखना चाहते थे, जिस तरह हमारी बेटी तड़पी। पीड़ित माता पिता ने कहा कि आरोपियों को अदालत ने जो सजा दी उससे वह खुश हैं।
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कोर्ट के बाहर टकटकी लगाए थे पीड़ित माता- पिता
घाटमपुर के एक गांव से पीड़ित माता- पिता बस से माती कचहरी दोपहर 11 बजे आ पहुंचे थे। उन्हें उनके वकील ने बताया था कि दोपहर 12 बजे बेटी को न्याय मिलेगा। कोर्ट नंबर-13 के बाहर दोनों पति- पत्नी अपनी दो साल की मासूम बेटी को गोद में लिए बैठे रहे। वह बार - बार चल रही सुनवाई पर टकटकी लगाए थे। उन्हें इंतजार था दरिंदों को सजाए सुनाए जाने का।
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फैसला आने के बाद बिलख पड़े पीड़ित
दोपहर तीन बजे के करीब कोर्ट से एक वकील ने आकर पीड़ित माता, पिता को बताया कि उनकी बेटी को न्याय मिल गया। चारों दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। यह सुनते ही कोर्ट के बाहर एक हाल में खड़े पति- पत्नी बिलखने लगे। उनके साथ मौजूद परिजन भी रोते बिलखते नजर आए। मृतका की मां ने ईश्वर को याद करते हुए कहा कि हे भगवान आज तू ने मेरी सुन ली...।
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नजर नहीं आए दोषियों के घर वाले
अदालत परिसर में दोषियों के परिजन नहीं थे। इसको लेकर चर्चा रही कि चारों ने ऐसी दरिंदगी दिखाई कि आज उनके साथ उनके तक नहीं है। इसको लेकर तरह - तरह की चर्चाएं रही। वहीं जिसे भी पूरे घटनाक्रम के बारे में जानकारी हुई वह यही कहता रहा कि चारों को कम से फांसी होनी चाहिए। हालांकि कोर्ट के फैसले से सभी खुश दिखे।
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कोर्ट के बाहर तैनात रही पुलिस
सजा सुनाए जाने के बाद परशुराम, उसकी पत्नी सुनैना, भतीजे अंकुल व वीरेन को जेल ले जाने के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। कोर्ट परिसर के बाहर आठ से 10 सिपाही सुरक्षा में तैनात रहे। सजा सुनाए जाने के बाद सभी कार्यवाही पूरी होने के बाद शाम चार बजे के करीब उन्हें कोर्ट से बाहर निकाल कर कड़ी सुरक्षा में जेल भेजा गया। इस दौरान सुनैना दहाड़े मार - मार कर रोती नजर आई।
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मृतका की मां व पिता ने बताया कि बेटी की साथ दरिंदगी दिखाई । ऐसे लोगों को फांसी से कम सजा नहीं होनी चाहिए। बताया कि गांव में हुए एक विवाद में अंकुल ने उसके परिवार को धमकी दी थी। इसके बाद ही उसकी बेटी के साथ ऐसी घटना घटित हुई। दीवाली का त्योहार था पूरा परिवार खुश था, इसी खुशी में अचानक से मातम छा गया। तब से लेकर आज तक हमारे कलेजे को ठंडक नहीं मिली। हम दोनों अपने आंखों के सामने दरिंदों को उसी तरह तड़पना देखना चाहते थे, जिस तरह हमारी बेटी तड़पी। पीड़ित माता पिता ने कहा कि आरोपियों को अदालत ने जो सजा दी उससे वह खुश हैं।
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कोर्ट के बाहर टकटकी लगाए थे पीड़ित माता- पिता
घाटमपुर के एक गांव से पीड़ित माता- पिता बस से माती कचहरी दोपहर 11 बजे आ पहुंचे थे। उन्हें उनके वकील ने बताया था कि दोपहर 12 बजे बेटी को न्याय मिलेगा। कोर्ट नंबर-13 के बाहर दोनों पति- पत्नी अपनी दो साल की मासूम बेटी को गोद में लिए बैठे रहे। वह बार - बार चल रही सुनवाई पर टकटकी लगाए थे। उन्हें इंतजार था दरिंदों को सजाए सुनाए जाने का।
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फैसला आने के बाद बिलख पड़े पीड़ित
दोपहर तीन बजे के करीब कोर्ट से एक वकील ने आकर पीड़ित माता, पिता को बताया कि उनकी बेटी को न्याय मिल गया। चारों दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। यह सुनते ही कोर्ट के बाहर एक हाल में खड़े पति- पत्नी बिलखने लगे। उनके साथ मौजूद परिजन भी रोते बिलखते नजर आए। मृतका की मां ने ईश्वर को याद करते हुए कहा कि हे भगवान आज तू ने मेरी सुन ली...।
नजर नहीं आए दोषियों के घर वाले
अदालत परिसर में दोषियों के परिजन नहीं थे। इसको लेकर चर्चा रही कि चारों ने ऐसी दरिंदगी दिखाई कि आज उनके साथ उनके तक नहीं है। इसको लेकर तरह - तरह की चर्चाएं रही। वहीं जिसे भी पूरे घटनाक्रम के बारे में जानकारी हुई वह यही कहता रहा कि चारों को कम से फांसी होनी चाहिए। हालांकि कोर्ट के फैसले से सभी खुश दिखे।
कोर्ट के बाहर तैनात रही पुलिस
सजा सुनाए जाने के बाद परशुराम, उसकी पत्नी सुनैना, भतीजे अंकुल व वीरेन को जेल ले जाने के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। कोर्ट परिसर के बाहर आठ से 10 सिपाही सुरक्षा में तैनात रहे। सजा सुनाए जाने के बाद सभी कार्यवाही पूरी होने के बाद शाम चार बजे के करीब उन्हें कोर्ट से बाहर निकाल कर कड़ी सुरक्षा में जेल भेजा गया। इस दौरान सुनैना दहाड़े मार - मार कर रोती नजर आई।