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कृत्रिम पैर के सहारे वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाएंगे अक्षय, साइकिल से इंडिया गेट के लिए होंगे रवाना
Mon, 12 Aug 2019 05:32 PM IST
शिखा पांडेय
हिमांशु मिश्र, अमर उजाला, कानपुर
हिमांशु मिश्र, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Mon, 12 Aug 2019 05:32 PM IST
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कृत्रिम पैर के सहारे वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाएंगे अक्षय
- फोटो : अमर उजाला
कृत्रिम (आर्टिफीशियल) पैर के सहारे कानपुर के गांधी ग्राम, रामादेवी निवासी अक्षय 450 किलोमीटर की लंबी दूरी साइकिल से पूरी करने की तैयारी में हैं। अक्षय अगर ऐसा करने में सफल हो जाते हैं तो उनका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हो जाएगा।
खास बात यह है कि अक्षय को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड ने खुद यह टास्क पूरा करने के लिए दिया है। 25 अगस्त को अक्षय इस वर्ल्ड रिकॉर्ड को बनाने के लिए शहर के जेके टेंपल से दिल्ली के इंडिया गेट के लिए रवाना होंगे। उन्हें सात दिनों में यह टास्क पूरा करने के लिए कहा गया है लेकिन अक्षय को विश्वास है कि वह तीन से चार दिनों में यह उपलब्धि अपने नाम कर लेंगे।
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खास बात यह है कि अक्षय को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड ने खुद यह टास्क पूरा करने के लिए दिया है। 25 अगस्त को अक्षय इस वर्ल्ड रिकॉर्ड को बनाने के लिए शहर के जेके टेंपल से दिल्ली के इंडिया गेट के लिए रवाना होंगे। उन्हें सात दिनों में यह टास्क पूरा करने के लिए कहा गया है लेकिन अक्षय को विश्वास है कि वह तीन से चार दिनों में यह उपलब्धि अपने नाम कर लेंगे।
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अक्षय ने बताया कि गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड के लिए उन्होंने करीब दो माह पूर्व आवेदन किया था जिस पर यह टॉस्क दिया गया है। बताया कि दुनिया में अभी तक 450 किमी की साइकिलिंग सात दिन में कोई भी दिव्यांग नहीं कर पाया है।
2010 में जब अक्षय महज 16 साल के थे तब उनका दायां पैर ट्रेन हादसे में कट गया था। अक्षय बताते हैं कि वह ट्रेन से अपनी बहन के घर इलाहाबाद जा रहे थे। भीड़ के कारण गेट के पास खड़े थे। खागा (फतेहपुर) पहुंचे ही थे कि धीमी गति से चल रही ट्रेन से उन्हें भीड़ के बीच किसी ने धक्का दे दिया और वह नीचे गिर पड़े।
एक पैर पर से ट्रेन के दो-तीन डिब्बे निकल गए। लोगों ने ट्रेन रुकवाई और घायल हालत में उन्हें उसी ट्रेन से इलाहाबाद तक ले गए जहां उनका अस्पताल में ऑपरेशन हुआ लेकिन पैर नहीं जुड़ पाए। खेलकूद में माहिर अक्षय अब दिव्यांग हो चुके थे लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
2010 में जब अक्षय महज 16 साल के थे तब उनका दायां पैर ट्रेन हादसे में कट गया था। अक्षय बताते हैं कि वह ट्रेन से अपनी बहन के घर इलाहाबाद जा रहे थे। भीड़ के कारण गेट के पास खड़े थे। खागा (फतेहपुर) पहुंचे ही थे कि धीमी गति से चल रही ट्रेन से उन्हें भीड़ के बीच किसी ने धक्का दे दिया और वह नीचे गिर पड़े।
एक पैर पर से ट्रेन के दो-तीन डिब्बे निकल गए। लोगों ने ट्रेन रुकवाई और घायल हालत में उन्हें उसी ट्रेन से इलाहाबाद तक ले गए जहां उनका अस्पताल में ऑपरेशन हुआ लेकिन पैर नहीं जुड़ पाए। खेलकूद में माहिर अक्षय अब दिव्यांग हो चुके थे लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
पिता के बाद मां ने दिया हौसला
अक्षय के पिता अपून सिंह का 2005 में ही निधन हो चुका है। तब से मां कुसुम सिंह ने ही उनकी देखभाल की। कुसुम का छोटा सा बिजनेस है। पैर कटने के बाद अक्षय ने 2011 में 58 प्रतिशत अंकों के साथ हाईस्कूल और फिर 64.3 प्रतिशत अंकों के साथ 2013 में इंटरमीडिएट पूरा किया। राजकीय पॉलिटेक्निक से डिप्लोमा किया और बीबीए की पढ़ाई भी पूरी कर ली।
रोज 50 किलोमीटर चलाते हैं साइकिल
अक्षय बताते हैं कि 2017 में उन्होंने तय किया कि वह अपने जैसे सैकड़ों युवाओं को नई ऊर्जा देने के लिए काम करेंगे। तभी से उन्होंने साइकिलिंग करना शुरू कर दिया। लक्ष्य बनाया कि वह साइकिलिंग में रिकॉर्ड कायम करेंगे। अब वह रोजाना 50 किलोमीटर साइकिलिंग दो घंटे में पूरा करते हैं।
नंबर गेम
450 किमी की दूरी करनी है तय
7 दिन में पूरा करना है टास्क
अक्षय के पिता अपून सिंह का 2005 में ही निधन हो चुका है। तब से मां कुसुम सिंह ने ही उनकी देखभाल की। कुसुम का छोटा सा बिजनेस है। पैर कटने के बाद अक्षय ने 2011 में 58 प्रतिशत अंकों के साथ हाईस्कूल और फिर 64.3 प्रतिशत अंकों के साथ 2013 में इंटरमीडिएट पूरा किया। राजकीय पॉलिटेक्निक से डिप्लोमा किया और बीबीए की पढ़ाई भी पूरी कर ली।
रोज 50 किलोमीटर चलाते हैं साइकिल
अक्षय बताते हैं कि 2017 में उन्होंने तय किया कि वह अपने जैसे सैकड़ों युवाओं को नई ऊर्जा देने के लिए काम करेंगे। तभी से उन्होंने साइकिलिंग करना शुरू कर दिया। लक्ष्य बनाया कि वह साइकिलिंग में रिकॉर्ड कायम करेंगे। अब वह रोजाना 50 किलोमीटर साइकिलिंग दो घंटे में पूरा करते हैं।
नंबर गेम
450 किमी की दूरी करनी है तय
7 दिन में पूरा करना है टास्क