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सैफई में सजा अखिलेश यादव का दरबार, टॉपर बहनों को दी ये सौगात, क्यों बोले भारत सपेरों का भी देश रहा
Fri, 16 Aug 2019 07:48 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
यूपी डेस्क, अमर उजाला, इटावा
यूपी डेस्क, अमर उजाला, इटावा
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Fri, 16 Aug 2019 07:48 PM IST
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सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव
- फोटो : amar ujala
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अखिलेश यादव रक्षाबंधन त्योहार मनाने बुधवार शाम ही सैफई पहुंच गए थे। गुरुवार सुबह जब उनके निवास पर दरबार सजा तो आसपास के जिलों की भीड़ जुटने लगी थी। करीब नौ बजे अखिलेश निकले और घर के लॉन में बैठ गए। सबसे पहले उन्होंने अपने गांव की हाईस्कूल-इंटरमीडिएट परीक्षा वर्ष 2019 की 20 टॉपर लड़कियों को 10-10 हजार रुपये के चेक पुरस्कार स्वरूप प्रदान किए।
साथ ही उन्होंने इस धनराशि का शिक्षा पर ही उपयोग करने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि यह त्योहार न केवल भाई-बहन के रिश्तों को पूरा आदर देता है बल्कि आत्मीयता और स्नेह के बंधन से रिश्तों को मजबूती भी प्रदान करता है।
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साथ ही उन्होंने इस धनराशि का शिक्षा पर ही उपयोग करने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि यह त्योहार न केवल भाई-बहन के रिश्तों को पूरा आदर देता है बल्कि आत्मीयता और स्नेह के बंधन से रिश्तों को मजबूती भी प्रदान करता है।
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सैफई में बच्ची से राखी बंधवाने के दौरान अखिलेश यादव
- फोटो : अमर उजाला
वह दो घंटे से ज्यादा जनसंवाद करते और राखी बांधने पहुंची बहनों से राखियां बंधवाते रहे । कन्नौज और मैनपुरी से आई कई मुस्लिम और दलित लड़कियों ने भी उन्हें राखी बांधी। करहल से आई ब्रह्माकुमारी महिला पदाधिकारियों ने भी राखी बांधी।
सपेरों की भी चर्चा की
सपा अध्यक्ष ने कहा कि भारत को सपेरों का देश भी कहा जाता था। इतिहासकारों ने ऐसा लिखा है कि भारत सपेरों का भी देश रहा है लेकिन बदकिस्मती इस बात की है कि असली पहचान माने माने जाने वाले सपेरे बदहाली की जिंदगी गुजर बसर करने को मजबूर है । इन सपेरों के पास न तो आज जमीन है और ना ही जिंदगी को चलाने के लिए कोई रोजी रोजगार।
सपेरों की भी चर्चा की
सपा अध्यक्ष ने कहा कि भारत को सपेरों का देश भी कहा जाता था। इतिहासकारों ने ऐसा लिखा है कि भारत सपेरों का भी देश रहा है लेकिन बदकिस्मती इस बात की है कि असली पहचान माने माने जाने वाले सपेरे बदहाली की जिंदगी गुजर बसर करने को मजबूर है । इन सपेरों के पास न तो आज जमीन है और ना ही जिंदगी को चलाने के लिए कोई रोजी रोजगार।