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सीएम की घोषणा वाले 14 करोड़ के कामों की जांच

Tue, 04 Apr 2017 10:13 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर Updated Tue, 04 Apr 2017 10:13 PM IST
सार

-एक्सईएन उपलब्ध नहीं करा रहे अभिलेख
-सीडीओ ने तलब किया स्पष्टीकरण
-सिंचाई प्रखंड तृतीय जांच के घेरे में

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akhilesh yadav announces 14 crore works
डेमो

विस्तार

मुख्यमंत्री की घोषणा वाले 14.85 करोड़ रुपये की लागत के कामों में भी धांधली और लापरवाही का बोलबाला रहा। केन नदी में कटान रोकने को बनाए जा रहे तटबंध में करोड़ों रुपये के बोल्डर पानी में बह गए। पंचमपुर तालाब के जीर्णोद्धार पर सवा दो करोड़ रुपये ठिकाने लगा दिए गए। जबकि सिंधन गांव में बैकफनी के काम में भी अनियमितताएं हुईं। शिकायतों पर डीएम ने सीडीओ को जांच सौंपी। लेकिन एक्सईएन ने कोई अभिलेख नहीं उपलब्ध कराए।
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अब सीडीओ ने अभिलेख पेश करने के लिए तीन दिन की मोहलत देते हुए स्पष्टीकरण भी तलब किया है। तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा पांच नवंबर 2016 को मंजूर किए गए कार्यों में खप्टिहाकलां में तटबंध पर दो करोड़, पैलानी में 4 करोड 24 लाख 29 हजार और सिंधन कलां में 6 करोड़ 38 लाख 57 हजार रुपये सिंचाई प्रखंड तृतीय ने खर्च किए। इन कार्यों में गड़बड़ी की शिकायतें मिलने पर जिलाधिकारी ने मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) को जांच के आदेश दिए।  
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सीडीओ ने अधिशासी अभियंता से उपरोक्त कार्यों के अभिलेेख (मदवार व्यय, इस्टीमेट, एमबी) इत्यादि तलब किए। लेकिन यह अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए गए। इसी तरह पंचमपुर तालाब पर खर्च हुए 2 करोड़ 22 लाख 20 हजार रुपये की जांच के लिए अभिलेख मांगे गए। वह भी नहीं उपलब्ध कराए गए। पैलानी तहसील के सिंधन गांव में बैकफनी कार्यों की जांच के अभिलेख भी सिंचाई प्रखंड तृतीय ने नहीं दिए हैं। 
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अभिलेख उपलब्ध न कराया जाना आपत्तिजनक
सीडीओ राम कुमार सिंह ने जारी किए पत्र में कहा है कि जांच के लिए अभिलेख उपलब्ध न कराया जाना बहुत ही आपत्तिजनक है। उन्होंने अधिशासी अभियंता को अंतिम अवसर देते हुए कहा है कि उनके कार्यालय में तीन दिन के अंदर अभिलेख उपलब्ध कराएं और इसमें की गई देरी का कारण भी बताएं। उधर, अधिशासी अभियंता योगेश कुमार रावल ने बताया कि जांच की बात उनके संज्ञान में नहीं है।


रही बात काम की तो जैसा पैसा मिला वैसा काम किया गया। खप्टिहा कलां, सिंधनकलां व पैलानी में केन नदी पर डेंपेनर (कटान होने पर नदी के पानी को डायवर्ड करना) बनना है। जहां नदी की ठोकर पड़ रही थी, वहां बोल्डर डलवाए गए। 12.50 करोड़ रुपये मिले थे। यह खर्च हो चुके हैं। अधिशासी अभियंता ने कहा कि अभिलेख ज्यादा हैं, इसलिए जांच को पेश किए जाने में विलंब हो रहा है। जल्द ही उपलब्ध कराए जाएंगे। 
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