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खतरनाक हवाः दवाएं बेअसर, सांस रोगियों की भरमार, डॉक्टर घबराये

Tue, 08 Nov 2016 04:28 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर Updated Tue, 08 Nov 2016 04:28 PM IST
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 air pollution disturbing to chest patients
प्रदूषण से गंभीर होते जा रहे हालात, ज्यादातर को भर्ती करने की जरूरत
बढ़ते वायु प्रदूषण के कारण सांस रोगियों की दवायें बेअसर हो गई हैं। कानपुर के सबसे बड़े चेस्ट हॉस्पिटल में मरीजों का हुजूम उमड़ा हुआ है। यह सब देख डॉक्टर हैरान और परेशान नजर आ रहे हैं।  
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शहर में वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर है। हवा में धूल के कणों ने कहर ढाना शुरू कर दिया है। दमा रोगियों के सीने में जा रहे धूल के कण उन्हें निमोनिया का मरीज बना रहे हैं। हैलट, मुरारी लाल चेस्ट अस्पताल के साथ ही प्राइवेट अस्पतालों में दमा के मरीज गंभीर हालत में पहुंच रहे हैं। डॉ. मुरारी लाल चेस्ट अस्पताल के विभागाध्यक्ष  डॉ. आनंद कुमार ने बताया कि वायु प्रदूषण के कारण दमा के मरीजों में निमोनिया का खतरा पैदा हो गया है। पहले दवाओं से मरीजों का दमा नियंत्रण में आ जाता था लेकिन अब मरीजों में दमा के साथ निमोनिया भी मिल रहा है। प्रदूषण के कारण दमा के मरीजों को सुबह घर से बाहर नहीं जाना चाहिए। धूल के कण जमीन से कुछ ऊंचाई पर हैं। यह कण आसानी से फेफड़ों में पहुंच जाते हैं। बहुत जरूरी होने पर मुंह पर रुमाल बांधे या मॉस्क का इस्तेमाल करें।
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