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हादसे ने छीनीं दो परिवारों की खुशियां: एक माह पहले तय हुई थी शादी, हादसे ने उजाड़ दी जिंदगी
Thu, 09 Jul 2026 12:06 AM IST
Shikha Pandey
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इटावा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इटावा
Published by: Shikha Pandey
Updated Thu, 09 Jul 2026 12:06 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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आगरा-कानपुर नेशनल हाईवे पर आईटीआई चौराहे के पास हुए भीषण बस हादसे ने दो परिवारों की खुशियां हमेशा के लिए छीन लीं। हादसे में जान गंवाने वाले बस हेल्पर दीपक कुमार और चालक विक्रम सिंह अपने-अपने परिवारों के सहारे थे। दोनों की मौत की खबर मिलते ही परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
दीपक कुमार अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। उसकी बड़ी बहन निर्मला देवी ने बताया कि परिवार में तीन बहनों के बीच दीपक ही अकेला भाई था। पिता दिव्यांग हैं, जबकि मां रामप्यारी देवी का बेटे की मौत के बाद रो-रोकर बुरा हाल है। दीपक पिछले करीब पांच वर्षों से बस में हेल्पर की नौकरी कर परिवार का पालन-पोषण कर रहा था। करीब एक माह पहले ही दीपक का रिश्ता हरियाणा के फरीदाबाद में तय हुआ था। अगले छह माह के भीतर शादी होनी थी और घर में तैयारियां शुरू होने लगी थीं।
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दीपक कुमार अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। उसकी बड़ी बहन निर्मला देवी ने बताया कि परिवार में तीन बहनों के बीच दीपक ही अकेला भाई था। पिता दिव्यांग हैं, जबकि मां रामप्यारी देवी का बेटे की मौत के बाद रो-रोकर बुरा हाल है। दीपक पिछले करीब पांच वर्षों से बस में हेल्पर की नौकरी कर परिवार का पालन-पोषण कर रहा था। करीब एक माह पहले ही दीपक का रिश्ता हरियाणा के फरीदाबाद में तय हुआ था। अगले छह माह के भीतर शादी होनी थी और घर में तैयारियां शुरू होने लगी थीं।
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मंगलवार रात करीब दस बजे बनारस से दीपक की परिजनों से आखिरी बार फोन पर बात हुई थी। वह ड्यूटी पर है और जल्द घर आएगा। किसी को अंदाजा नहीं था कि वह फोन उसकी आखिरी बातचीत साबित होगी। वहीं, हादसे में जान गंवाने वाले हरियाणा के चालक विक्रम सिंह भी परिवार के इकलौते कमाने वाले सदस्य था।
परिवार में पत्नी अंजू, दो बेटियां और एक बेटा हैं। विक्रम लंबे समय से बस चला रहा था। परिवार की जिम्मेदारी उसी के कंधों पर थी। हादसे ने दोनों परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है और उनके सामने भविष्य की बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।