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ख्वाबों के बनने-बिखरने की दास्तां है ‘हवालात’
Kanpur
Updated Sat, 11 Aug 2012 12:00 PM IST
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कानपुर। अमर उजाला ‘मां तुझे प्रणाम’ के तहत कार्यक्रमों की श्रृंखला में रविवार को सर्वेश्वर दयाल सक्सेना रचित नाटक ‘हवालात’ का मंचन सांस्कृतिक संस्था बैक स्टेज द्वारा सिविल लाइंस स्थित रागेंद्र स्वरूप सेंटर में शाम 6 बजे किया जाएगा। इस नाटक में मौजूदा दौर के युवाओं के सपनों के बनने-बिखरने और फिर अवसाद के उभरने सरीखी मानसिक स्थिति को बड़े अनोखे ढंग से बयान किया गया है। नाटक में केदारनाथ अग्रवाल की कविताओं को भी शामिल किया गया है। इससे डेढ़ घंटे की यह कहानी और दिलचस्प हो गई है। नाटक निर्देशन और डिजाइन प्रवीण शेखर की है।
नाटक ‘हवालात’ की कहानी चार चरित्र के इर्द-गिर्द घूमती है। परदा हटता है और मंच पर चार लोग नजर आते हैं। इनमें एक सिपाही है और तीन युवक हैं। कड़ाके की ठंड है। युवकों के पास गर्म कपड़े नहीं है। पढ़े-लिखे होने के बाद भी इन युवकों के पास रोजी-रोटी का कोई जरिया नहीं है। सिपाही उन्हें शरारती तत्व समझकर हड़काता है और हवालात में डालने की धमकी देता है। इस पर युवक खुश हो जाते हैं कि चलो हवालात में न ठंड लगेगी और न भूखे रहना पड़ेगा। युवक सिपाही को बताते हैं कि वे राहजन, हत्यारे और नक्सलाइट हैं, वह उन्हें जेल ले जाए। सिपाही उनकी आंखों पर पट्टी बांधकर गोल-गोल घुमाता रहता है। आखिर में जब पट्टी हटती है तो वे अपने को उसी स्थान पर पाते हैं। युवक मायूस हो जाते हैं और सिपाही को अपनी खराब स्थिति के संबंध बताते हैं। कहते हैं कि वे दुर्व्यवस्था का शिकार हैं। जवाब में सिपाही मुंह खोलता है तो युवकों को पता चलता है कि जिस वर्दी को वे इतना ताकतवर मानते है, उनमें व्यवस्था ने कितने छेद कर रखे हैं।
मंच पर चरित्रों के मूड, माहौल को प्रभावी बनाने के लिए रंग-बिरंगी लाइट-इफैक्ट दिया जाता है। इसके साथ ही कहानी के बीच-बीच में केदारनाथ अग्रवाल की कविताएं पिरोई गई हैं। यह पूरा माहौल दर्शकों को बांधे रखता है। मंच के पीछे प्रवीण शेखर के निर्देशन के साथ राजकुमार राजक, संदीप यादव की लाइट डिजाइन तथा नीरज, सतीश, सचिन, आशुतोष और संदीप का मंच प्रबंधन नाट्य मंचन को संपूर्णता देता है। बैक ग्राउंड में कविताओं का पाठ विवेक प्रियदर्शन का है। इस नाटक को एनएसडी दिल्ली के भारत रंग महोत्सव, नेशनल थिएटर फेस्टीवल चंडीगढ़, राष्ट्रीय नाट्य पर्व डिब्रूगढ़ (असम), नेशनल थिएटर फेस्टीवल जयपुर, एकल नाट्य प्रस्तुति उदयपुर, यूपी संगीत नाटक एकेडमी थिएटर फेस्टीवल लखनऊ में बहुत प्रशंसा मिली है। शहरवासी इस नाटक का लुत्फ उठा सकते हैं। प्रवेश पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर अमर उजाला में प्रकाशित विज्ञापन की कटिंग लाने पर दिया जाएगा।
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नाटक ‘हवालात’ की कहानी चार चरित्र के इर्द-गिर्द घूमती है। परदा हटता है और मंच पर चार लोग नजर आते हैं। इनमें एक सिपाही है और तीन युवक हैं। कड़ाके की ठंड है। युवकों के पास गर्म कपड़े नहीं है। पढ़े-लिखे होने के बाद भी इन युवकों के पास रोजी-रोटी का कोई जरिया नहीं है। सिपाही उन्हें शरारती तत्व समझकर हड़काता है और हवालात में डालने की धमकी देता है। इस पर युवक खुश हो जाते हैं कि चलो हवालात में न ठंड लगेगी और न भूखे रहना पड़ेगा। युवक सिपाही को बताते हैं कि वे राहजन, हत्यारे और नक्सलाइट हैं, वह उन्हें जेल ले जाए। सिपाही उनकी आंखों पर पट्टी बांधकर गोल-गोल घुमाता रहता है। आखिर में जब पट्टी हटती है तो वे अपने को उसी स्थान पर पाते हैं। युवक मायूस हो जाते हैं और सिपाही को अपनी खराब स्थिति के संबंध बताते हैं। कहते हैं कि वे दुर्व्यवस्था का शिकार हैं। जवाब में सिपाही मुंह खोलता है तो युवकों को पता चलता है कि जिस वर्दी को वे इतना ताकतवर मानते है, उनमें व्यवस्था ने कितने छेद कर रखे हैं।
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मंच पर चरित्रों के मूड, माहौल को प्रभावी बनाने के लिए रंग-बिरंगी लाइट-इफैक्ट दिया जाता है। इसके साथ ही कहानी के बीच-बीच में केदारनाथ अग्रवाल की कविताएं पिरोई गई हैं। यह पूरा माहौल दर्शकों को बांधे रखता है। मंच के पीछे प्रवीण शेखर के निर्देशन के साथ राजकुमार राजक, संदीप यादव की लाइट डिजाइन तथा नीरज, सतीश, सचिन, आशुतोष और संदीप का मंच प्रबंधन नाट्य मंचन को संपूर्णता देता है। बैक ग्राउंड में कविताओं का पाठ विवेक प्रियदर्शन का है। इस नाटक को एनएसडी दिल्ली के भारत रंग महोत्सव, नेशनल थिएटर फेस्टीवल चंडीगढ़, राष्ट्रीय नाट्य पर्व डिब्रूगढ़ (असम), नेशनल थिएटर फेस्टीवल जयपुर, एकल नाट्य प्रस्तुति उदयपुर, यूपी संगीत नाटक एकेडमी थिएटर फेस्टीवल लखनऊ में बहुत प्रशंसा मिली है। शहरवासी इस नाटक का लुत्फ उठा सकते हैं। प्रवेश पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर अमर उजाला में प्रकाशित विज्ञापन की कटिंग लाने पर दिया जाएगा।
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